Wednesday, November 6, 2019


Each letter of the alphabet has a story to tell…

T’ tells the story of the Table where the teachers- Sangeeta and Sonam stood up to display on the wall, the poster for Van Mahotsav (Forest Day) for their class children.

‘B’ tells the story of the ‘Bananas and Biscuits’ that Saurabh brought and shared with his hungry friends. 

P’ tells the story of the Paper with which Parvati decorated her Rakhi and tied on her classmate, Pandav’s wrist.

As more stories get unfolded, we will take a look at the different ways in which the Edu-Leaders of i-Saksham have made learning the Letters of the Alphabet fun, creative and thus effective. And the children? They were only left asking for more. Quite like the letters, each Letter Teaching Technique had a different story to tell, unique memories and observations to be revealed..

Chalk Challenge

·      It seemed as if a page from a Language textbook had come alive on the floor! It all started with a chalk. Two forms were designed by the Edu-Leader, one was a word and the other was the matching picture to it. The children had to simply string the letters together to read the word and identify the matching picture! Oh, and they had to fill up within the chalk outline too. With colours? No! With slippers. And the outcome: children ended up without their slippers but with an increased appetite to practice writing their letters and words the same way, the very next day!

      An Inter-Connected Chain of Letters

·        i-Saksham Edu-Leader, Sangeeta was enthusiastic about shared learning. Whether it was to learn a new technique as a teacher or whether it was to involve the class in a co-operative group activity, sharing was the key to learn! Sangeeta said, “The children were tracing the letter ‘a’ on each others’ backs. This is a technique that I learnt from my Buddy, Sonam Bharti. It helped those children especially who were having difficulty in writing.”

      Flash The Cards

The i-Saksham Edu-Leaders use Letter Cards in many different ways to engage the children. The cards could be hung up on the wall and their sequences altered so that children develop a more solid foundation of letter and phonic sound comprehension. Several classroom games too have been developed using these Letter Cards. One of them includes randomly picking up a Letter Card, identifying it and singing a rhyme that begins with the letter.

In this picture, Edu Leader Sangeeta is teaching children how to construct words using the letter flashcards

Likewise, i-Saksham Edu-Leader, Rohit’s favourite game with his class children is distributing one Letter Card to each child in the class and then calling out a word, say, चमक. The children with each of the letters stand up in the required order to make up the word. 
After building foundational letter recognition and word building skills, Edu-Leader Rohit focusses on developing reading skills. In this picture, he’s encouraging the children to read aloud.
Matra ki Yatra

The matra (vowels in Hindi) are made with thick chart paper and stuck on the board. Children combine it with letters to distinguish between the sounds. Rohit explained, “When we write the words with the matras on the board with a chalk, they get rubbed off easily and children forget. But when the matras remain stuck on the board, the concept remains fresh in the child’s memory for longer.”

Charisma of Colors

Another creative teaching technique involved blending crafts and colours in making words! The colourful beads that would be used for stringing were used innovatively by the teacher, while the children enjoyed practicing the letter forms and uniquely designed them.

Learn with Tech

Educational apps have also been tapped to enrich the learning experience of the letters of the alphabet. Several App based learning games like ‘Hindi Matra Waale’, ‘Varnmala’, ‘Word Swipe’  etc. have  helped the children in writing the letters, and in hearing and saying the sounds, reading and naming the letters, moving their hands smoothly and even recognizing the colours.

As a result of these diverse creative teaching strategies, the children have started taking a deeper interest in not only writing and reading in class, but also helping their fellow classmates in picking up these skills. As one child listens, the other one helps them recognize and name the sound of the letter. As one child names aloud the letter or the word, another child helps him or her by holding the hand and writing that word or letter in the book. And the question that the teachers get asked the most, “didi, when will we do this activity again? Should we learn this again?”

Sunday, September 29, 2019

जीविका की कहानी उसी की जुबानी - रोहित की कलम से

जीविका की कहानी उसी की जुबानी  

नमस्कार दोस्तों ,
                   पिछले  शनिवार को हमलोग जीविका ग्रुप से मिले एक दुसरे को जाने ! बहुत ही अच्छा लगा सबो से मिलकर ! जैसे की हम सब लोग जानते है , की हमारे गाँव या शहर से हमारे परिवार में से कोई न कोई जीविका ग्रुप से  जुड़े हुए  हैं  !
हमलोग भी जीविका केे बारे में कुछ न-कुछ जानते हैं , लेकिन अाज  हमने इसे  विस्तार से जानने के लिए जीविका का ही  एक सदस्य C.M रोशनी जी से कुछ बातचीत किये !  इनसे हुई बातचीत केे कुछ अंश आप लोगों के समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूं !

मैं:  नमस्कार मैं रोहित मैं भी सोनाय का ही रहने वाला हूँ , मैं आपको जीविका में  जुड़े बहुत दिनों से देख रहा हूं ! आप इसके C.M  पद पर भी हैं ! मैं आपसे इसके बारे में कुछ  कुछ जानकारी जानना चाहता हूँ  और आपके  अनुभवों को जानना चाहता हूं !

C.M :  जी हाँ जरूर  क्यों नही, हम जहाँ तक इसके बारे में जानते है आपको जरुर बताएँगे !

मैं : पहले मैं यह जानना चाहूंगा की CM का क्या  कार्य है ? पहले अपने बारे में ही थोड़ा बता दीजिये !
CM: पहले मैं भी एक स द  ही  था , जो इस ग्रुप का जो CM था ! उसका कुछ दिनों से तबियत खराब चला रहा था , तो ग्रुप में दिक्कते होनी लगी इसलिए मुझे उनके स्थान पर चुना गया , तब से मै इसी पद पर हूँ ! 10 ग्रुप पर एक CM को चुना जाता है !  मेरा काम है , की हर  week में अलग - अलग समुह में बैठक कराना मैं इन दसो ग्रुप को सही से चलाऊ और भी लोगों को समुह में जोड़ कर कोशिश करूँ ! इसके अलावा कोई ऋण उठा केे देना ! खाता वही का हिसाब करना ऑफिस में इसके लिए meeting में जाना और भी  कुछ जिम्मेदारी का जो हमें करनी होती है !

मैं:    स्वयं  सहायता समूह क्या हैं ?
CM: स्वयं सहायता समूह महिलाओं का ऐसा समूह है जिससे  महिला  राशि का बचत कर खुद की  सहायता व अपने परिवारों का भरण - पोषण करें !  यह पंच सूत्रों से मिलकर बना है !( i) नियमित सप्ताहिक बैठक (ii) नियमित सप्ताहिक बचत (iii ) नियमित ऋण की मांग (iv ) नियमित  ऋण की वापसी ( v) नियमित लेखांकन ...सभी महिलाएं एकजुट होकर सशक्त हो सके , अपने परेशानियों को खुद निपटा सके ! इस समूह का उद्देश्य यही है कि हम सब महिलाएं एकजुट होकर अपना सहायता कर सकें !

मैं: इसमें  पुरुष क्यों नहीं शामिल हो सकते हैं सिर्फ महिला ही क्यों ?
CM:  (हंसते हुए कहती है ) देखिये ऐसे तो  ज्यादातर पुरुष घर में रहते नहीं है !  जो भी घर का देखभाल हिसाब -किताब  करना होता सब महिलाएं ही  करती है ,  और हम महिलाओं में बचत की भावना होती है ! जहां तक होता  हैं हम लोग बचत करने का बहुत कोशिश करते हैं !

मैं :  इस समूह कितने लोग शामिल हो सकते हैं ?
CM :   एक समूह में अधिकतम लोगों की संख्या 15 होती है लेकिन  कम से कम 10 से 12 लोग शामिल जरूर होनी चाहिए !

मैं : आपको समूह बनाने के लिए क्या - क्या करना पड़ता है?
CM: हमें समूह बनाने के लिए अपने गांव के महिलाओं से मिलना पड़ता है और उन्हें इसके बारे में बताना पड़ता है कि इससे हमें  बहुत  फायदा है  ,इससे हम  जुड़कर अपने राशि में बचत कर सकते हैं और भी कई फायदा उठा सकते हैं !

मैं : इस समूह में कौन - कौन से लोग शामिल हो सकते हैं ?
CM: इस समूह में 18 से ऊपर  वर्ष की महिलाएं और 60 वर्ष से नीचे तक की महिलाएं सिर्फ रह सकती है , इसमें गरीब  महिला और  जिसकी आय कम होती है वह शामिल हो सकते है ,  लेकिन आजकल तो सभी लोग इसमें शामिल हो रहे हैं !  जरूरत नहीं कि इसमें सिर्फ पढ़े-लिखे महिला ही शामिल हो सकती है ,  बस इन्हे इनकी कुछ जानकारी होनी चाहिए !

मैं: क्या इसमें आप लोगों की बैठक भी होती है अगर हां तो कब -  कब और कैसे  ?  इस बैठक में क्या-क्या बताया जाता है ?
CM:  जी हां इसमें बैठक होना बहुत ही जरूरी होता है ! क्योंकि इसका अधिकतर प्रक्रिया बैठक के समय ही होता है ! इस समूह का बैठक सप्ताह में एक बार होता है ,  यह C.M के द्वारा कराया जाता है !   सप्ताह के बैठक में ₹10 जमा करना होता है ,  खाता बही और बचत से संबंधित बातचीत भी होती है ! इसका एक और बैठक होती है ,जो महीने में एक बार होती है,  इसे हम V.O Meeting कहते हैं ! इस बैठक में जितने भी ग्रुप होते हैं , सब एक जगह शामिल होते हैं ! जैसे : इस गाँव में total 12 group है , इन बारहों को इस मीटिंग में शामिल होना  अनिवार्य होता ! इस मीटिंग में ऋण के अलावा और भी कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलती है !

मैं :  जहां तक हम सुने आपके अलावा इसमें और भी कई सदस्य शामिल होते हैं ,वो कौन - कौन होते हैं और उनका  कार्य क्या - क्या होता है ?
CM: हां इसमें मेरे अलावा ,  तीन और मुख्य सदस्य होते हैं !  अध्यक्ष कोषाध्यक्ष और सचिव !  अध्यक्ष का काम होता है खाता बही से संबंधित देखभाल करना ,  कोषाध्यक्ष का काम होता है पैसे का देखभाल करना  और सचिव का काम होता है ग्रुप में लोगों को बुलाना और इस पर  सही से कार्य करवाना !

मैं : इसमें आपके बहुत सारे खाता बही भी होते हैं उसमें आपका  क्या क्या कार्य होता है ?
CM: हां  इसमें   पांच पुस्तिकाए  होती हैं , ऋण पुस्तिका, कार्यवाही पुस्तिका ,लेन देन  पुस्तिका ,बचत पुस्तिका, खाता - बही  अन्य ! (इस इस खाता बहि के नाम से आप समझ रहे होंगे कि इसका क्या कार्य होता होगा )

मैं : इसमें खाता खुलवाने का क्या  प्रक्रिया है ? हम कौन कौन सा बैंक में खाता खुलवा सकते हैं ?
CM:  जहां तक मैं जानता हूं , हमारा ग्रुप का खाता बिहार ग्रामीण बैंक में खुला हुआ है ! और भी अन्य बैंको में खाता खुलवा सकते हैं लेकिन इसके बारे में मुझे जानकारी नहीं है !  खाता खुलवाने के लिए सबसे पहले  कम से कम 10 लोगों की जरूरत होती है ,  उनमें से तीन सदस्य को  अध्यक्ष कोषाध्यक्ष और सचिव  को चुना जाता है ,   और सब मिलकर ग्रुप का कोई नाम रखता है जैसे हमारा ग्रुप का नाम है शिव गुरु ग्रुप  खाता खुलवाने के समय इन तीनों सदस्य का फोटो document  और सिग्नेचर लगता है ,  या खाता किसी का पर्सनल खाता नहीं होता ! जब कभी इस से पैसे निकालने की जरूरत होती है तो इन तीनो सदस्यों का जरूरत होता है !

मैं : क्या इस समूह में आप के अध्यक्ष का और भी कोई नियम होते हैं !
CM:  हां इस समूह में  सदस्य और अध्यक्षों के कुछ नियम होते हैं ! सभी को समय पर बैठक बुलाना होता है !  जो ऋण  है उन्हें समय पर वापस करना होता है ! देर होने पर यह लोग ग्रुप मिलकर कुछ फाइन का भी  करते है , जैसे 5रु. या 10 रूपया  उन सदस्यों को देना आता है जो विलंब करते हैं !  अगर इस में से कोई एक लोग ऋण  नहीं पूरा कर पाए तो सभी सदस्यों को मिलकर इसे पूरा करना होता है ,  क्योंकि इस  समूह को हम सब मिलकर के चलाते हैं  न !  इस समय में तो सभी सदस्य नियम बनाते हैं उसे सभी को  मनना होता है ! अगर कोई सदस्य इस ग्रुप को छोड़ना चाहता तो उसने जो भी ऋण लिया उसे  ब्याज के साथ चुकता करना होता है  अथवा अगर वह नहीं लिए हैं   तो उनका जो भी पैसा निकलता है तो उन्हें खाते से निकाल कर दिया जाता है ! फिर  उन्हें आगे मिलने वाले लाभों से वंचित होना पड़ता है !

मैं : अच्छा, अगर हम फायदा पर बात करें तो इससे  जुड़कर आपको क्या लाभ मिल रहा है ?  क्या आप इससे संतुष्ट हैं ?
CM: हाँ , फायदा तो बहुत मिल रहा तभी तो  समूह से जुड़े हुए हैं ! पहले जब कभी  रुपयो की जरूरत होती थी , तो महाजन केे पास से 5 रु. या 10 रु.   सैकडे के हिसाब से ऋण लेना पड़ता था ! जो बहुत ही ज्यादा होता है ,  लेकिन हमे  इससे 1 रु.  ब्याज की दर से ऋण मिल जाता है , और  जैसे से पिछला ऋण चुकाते जाते है और भी ज्यादा ऋण मिलता है साथ ही साथ - RF:  इलाज के लिए अगर पैसा मिलता है ,तो उसका कोई ब्याज देना नही होता और PF के अलावा और भी अन्य लाभ मिलता है !

मैंने : क्या यह प्रगति पर है ? क्या सरकार इसे आगे बढ़ाने केे लिए  सहयोग कर रही है ? future में आप इसे कहाँ तक देखते है !
CM:  हां यह तो बहुत प्रगति पर है , ऐसे  तो यह एक गैर सरकारी संस्था है ! लेकिन महिलाओं का एकजुटता देखकर सरकार भी हम लोगों को बहुत  मदद कर रही है ! अभी हम हर जगह देख रहे हैं कि हर  महिला जीविका से जुड़ी हुई ,  भविष्य में या और भी आगे बढ़ेगा और हम लोग को बहुत मदद मिलेगी इससे !

मैं : क्या I-Sakham के बारे में आप कुछ सुने हैं !
CM: हाँ , मैं तो बराबर देखता हूं कि i- सक्षम के कुछ लोग आपके सेंटर पर आते रहते हैं ! मैं आपके PTM meeting में भी कई बार शामिल हो चूका हूँ ! इसलिए मुझे पता है इसके बारे में !

मैं : क्या आपको पता है , अब i- सक्षम आपके जिविका केे लिए शिक्षा पर कार्य कर रही है कुछ दिन पहले ही जमुई और  खैरा ब्लॉक केे  गांव से  एक- एक ट्यूटर का चुनाव किया गया और उन्हें पटना में एक  सप्ताह तक आवास में रख ट्रेनिंग दिया गया ! अब वे जमुई में रह कर  2 साल तक ट्रेनिंग करेंगे !  और साथ ही साथ वे अपने गांव के  सरकारी विद्यालय में  पढ़ाएंगे ! इसके लिए उन्हें जीविका तरफ से कुछ fee भी मिलेंगे !
CM: ये तो सच -मुच बहुत बड़ा  खुशखबरी है !  मुझे भी इसके बारे में कहा गया था , लेकिन मैं इन बातों को समझ नहीं पाया ! अगली बार जब कहेंगे तो मैं अपनी तरफ से भी एक tutor को देना चाहूंगा !

मैं : क्या इसके बारे में आप अपने तरफ से कुछ msg देना  चाहेंगे , आपके बातों को कुछ और लोग भी पढ़ रहे होंगे  !
 CM: मैं तो इतना ही कहना  चाहूंगा कि आप ही लोग बच्चे का भविष्य है ! जो भी माता है  एवं बहनें हैं  अपने बच्चे को जरुर  स्कूल भेजे ,  और सभी महिलाएं आपस में एकजुट होकर रहें !  जब हम लोग जागरूक होंगे तभी शिक्षा आगे बढ़ेगी !  धन्यवाद !!

मैं : आपका बहुत - बहुत  धन्यवाद रोशनी जी आपने हमें अपना कीमती समय निकालकर इन सब चीजों की जानकारी  बहुत ही अच्छे से दी !

(फिर हम बात - चीत को  समाप्त करते हैं और अपने अपने घर चले जाते हैं )

रोहित  i -Saksham  फ़ेलोशिप बैच दो में है. 

Friday, September 20, 2019

The Sky- Our Dream: By Rohit, i-Saksham batch 2 fellow


Hello friends ,
Today I was teaching children in class. Suddenly some children came out and started to make fun. I thought that children was  fighting with anyone, when I went out and saw, the children were showing something by pointing at the sky! I clicked a photo of them all. I told the kids this is a rocket. Which goes far into the sky. Then I asked everyone to go to class and started teaching. I also told the children some information related to the sky.

The word the sky is our favorite word from the beginning. We hear many stories about the sky in our childhood. Our grandparents used to tell a lot of stories about it. When we used to sleep at night, we used to dream of the sky. Sometimes I felt like flying in an airplane with my friends. Sometimes he used to see such flies! When dreaming of suddenly falling from the sky, sleep was broken. Used to play stories with friends for a long time, everyone narrated their dreams.

Trying to count stars while we slept on the terrace. It was great to hear the story of the seven brothers of the stars. Grandparents used to say, the day you count the stars you will become a king and whatever you ask for through the breaking stars will be fulfilled. We used to hear a lot about the story of the moon uncle.( chand Mama) At that time, we really considered sun and moon as one human being. When we used to get angry, we were entertained by pointing at the sky. When someone was in trouble, people would sit up and ask for prayers. Whenever we asked, it was said that God is above. They are all watching When thinking about the sky, there was a strange kind of magical feeling. Used to think if we had wings, we would fly like birds. There was a great desire to take a walk in the sky.

As we went forward. We kept learning a lot about it. Till I readers in 5th class. The sky was a mystery to us. When we moved beyond this, there was something else in the book. Chanda Mama was not written anywhere, and no Suraj was some man, and there was mention of the Suraj  does not walk We were surprised to know that our earth is a planet and it is also hanging in the sky! When we read about the planets, we understood those things very closely and went very deep. Now that flying dream did not come in the night, I do not know why he could not even see the dream. Those magical things no longer looked magical. Perhaps we knew the truth of it. We started confusing the things that used to be told to us by the stories of Chand Mama. It was no longer a dream thing with friends, it was directly done to its depth. I learned about the 9 planets which we previously knew only by day. We knew the reason for the rain from the sky. We told some of all this to our family and friends who did not even know about it. All of them also used to be surprised, is this true? He used to feel sorry for some time that, even if we had studied, today we would have had all this information too. But even today, when we look at the sky, it is childish. Looks so cute when colorful rainbows are formed in the sky, when the shining stars twinkle in the night. When clouds create new shapes. When the moon changes its shape. The rising and setting sun when the big and red - appears. The colorful clouds that make the day even more colorful. The dripping rain drops from the sky, which makes the weather even more pleasant. Our relationship with the sky is very strong, every time we keep trying to find new information from it. Scientists keep searching for it in different ways. Sometimes Mars keeps going to the moon sometimes. Many experiments were successful too, a few days ago, Chandrayaan Mission 2 was  unsuccessful. But we still stand with courage, we believe that this mission will definitely succeed next time! Great people who must have discovered the planets, when they looked at the sky, what would they think. If they thought that the sky was confined to the clouds, would we know about these things today? .........
We also want that we do not remain confined to the cloud, try to look beyond the cloud too because the sky is infinite. ......

#written by Rohit Raina

Thursday, September 19, 2019

रिमझिम बरसात - कनक की कलम से

          रिमझिम बरसात -   कनक की कलम से 

आज का मौसम कुछ अनोखा सा महसूस हो रहा है.
झांकी जब खिड़की से बाहर तो ऐसा लगा बचपन खड़ा है.
ये सोचने वाला बात है ना आखिर क्या था खिड़की के बाहर जिसे देख बचपन याद आने लगी.
वो रिमझिम सी बरसात जो पिछले दो घंटों से हो रही थी.
अगर हम होते बच्चे तो अभी पानी में छप - छपा रहे होते,
अगर हम होते बच्चे तो अभी कीचड़ में खेल रहे होते,
अगर हम होते बच्चे तो कागज की कश्ती बना कर बहा रहे होते,
और अगर हम होते बच्चे तो अभी तक माँ से दो - चार चमाटे खा चुके होते.
इतनी बातें खिड़की के पास खड़े होकर सोचती रह गई और ये रिमझिम बरसात कब खत्म हो गई पता भी ना चला..... 

Tuesday, September 17, 2019

शिक्षक बच्चो को शारीरिक दंड क्यों देते है ? - By Rohit Raina

शिक्षक बच्चो को शारीरिक दंड क्यों देते है ?

 और बच्चो पे इसका क्या की प्रभाव पड़ता है ?.. शारीरिक दंड* जैसे :- छड़ी मारना , एक पैर पर खड़ा रखना , मुर्गा बनाना , धुप में खड़ा रखना और भी कई प्रकार केे शारीरिक दंड बच्चो को पढाई केे दौरान गलतियां करने पर दिया जाता है !
शिक्षक बच्चो को शारीरिक दंड देते है  इसका कई कारण हो सकते हैं ! ( सभी शिक्षक ऐसा नही करते हैं )
इसके निम्न कारण हो सकते हैं !
बच्चे  HW नही बना के लाते इससे उसको मार पड़ती है !
क्लास में हल्ला करने के कारण मार पड़ती है , बदमाशी के कारण मार पड़ती है !
क्लास में बिना पूछे कोई काम  करता तब मार पड़ती है !
बच्चे  शिक्षक का  बात नही मानता इसके लिए मार पड़ता है !
दुसरे बच्चे के तुलना करके पीटना !
कोई अलग ही तरह का खेल खेलना जैसे : लट्टू  नचाना  , गुल्ली डंडा खेलना , लड़ाई झगड़ा वाला खेल खेलना इत्यादि !
absent के कारण !
test में कम अंक लाने या फ़ैल हो जाने के कारन ! 
कभी – कभी तो बीच – बीच में बच्चे का पेरेंट्स खुद आके बोलते हैं की  मेरे बच्चे घर में पढाई नही करता और नाही मेरे बात मानता है , इसे पीटिये ! लेकिन आज तक  मैंने  किसी पेरेंट्स के मुह से ये नही सुना की इसे दंड नही  दीजियेगा ! इस कारण से भी शिक्षक  गुस्सा होकर  बच्चो को पिटते हैं ! 
उदहारण के तौर पे  मान लीजिये मैं एक एसा शिक्षक हूँ , जो इस तरह के बातो को सोचकर बच्चो को शारीरिक दंड देता है ! ( बल्कि मै ऐसा नही करता हूँ )
H .W अगर न बनाया तो : - अगर आज मैं इसे नही पिटा तो कल से फिर HW नही बनाएगा मुझे इसे पीटना चाहिए !
बदमाशी करने पर : अगर मैं इसे नही पिटा तो इसी तरह से ये बदमाशी करते रहेगा , इसे देख कोई दूसरा भी ऐसे करेगा !
बिना पूछे कोई काम करना जिससे नुकसान का डर हो  : मुझे इसे  PUNISH  करना चाहिए  , नही तो ये दुबारा एसा करने को सोचेगा !
शिक्षक का बात न मानने पर : मैं इसे बहुत बोलता हु फिर भी मेरा बात नही मानता अगर मैं इसे पिटा तो ये मेरा  हर बात मानेगा !
दुसरे बच्चे के तुलना करके पीटना : अगर मैं इसे दुसरे बच्चो के साथ तुलना करके पिटूँगा तो ये भी उसी के जैसा बनने का कोशिश करेगा !
PARENTS के बात न मानने पर : हमे तो पेरेंट्स के तरफ से FULL आर्डर मिला है , मैं इसे किसी भी तरह से सुधार सकता हूँ ! मैं इसे punish भी  कर सकता हूँ ,  तब ये घर में सब काम सही सही - करेगा और parents का बात भी मानेगा !
शिक्षक को ऐसा लगता है की , बच्चे को इस तरह  पढ़ाने से जल्दी सिख जायेगा , लेकिन ऐसा नही होता है ! जब शिक्षक कभी बहार निकलते है तो बच्चे उनके दर से छुप जाते है , उसको पता है अगर सर हमे देख लिया तो मार खाना निश्चित है ! जब बच्चा शिक्षक से दर जाता है , तो शिक्षक को बहुत ख़ुशी होती है , की बच्चा हमसे डर  रहा है !
मुझे अच्छी तरह से याद है , जब मैं middle स्कूल में पढता था मुझे वो फीलिंग आज भी याद है ! साथ – ही साथ मुझे tution का भी सारी बातें याद है !
जब कोई HW मिलता था , और नही बना पाते थे , तो अगले दिन  मार लगता था , या कोई पनिशमेंट मिलता था ! जिससे साथी लोग हँसते भी थे !       feeling :- गुस्सा भी आता था , और सर्मिंदगी महसूस होती थी !
मन उदास हो जाता था ! कभी – कभी ज्यादा hw मिलता था  तो ! tution  ही नही जाते थे !
absent : - इसका भी नियम था एक दिन नही जाते थे तो 10 छड़ी मार लगती थी !
कभी – कभी सर से इतना दर जाते थे की कुछ दिन सवाल ही नही पूछते थे , हमे लगता था अगर पूछेंगे तो कही फिर न मार पर जाये ! ...............................और भी कई सरे फीलिंग होती थी पनिशमेंट के कारण !
कभी – कभी सर  अगर दुसरो के साथ तुलना करके पिटते थे तो और भी बुरा लगता था ! demotivate  के साथ – साथ कभी –कभी  तनाव ग्रस्त भी महसूस करते थे ! कुछ students तो पढना छोड़ दिया था !
हाँ लेकिन उन कारणों में से कभी – कभी हम सोचते थे  की हमे आखिर punishment क्यों क्या जाता था खुद में  बदलाव लाने के लिए मेहनत  भी करते थे !  लेकिन इस तरह से कुछ students ही खुद में changing लाया ! बाकि कई लोगों पर इसका कोई प्रभाव नही पड़ता था !
ऊपर दिए गये जो भी punishment की बात कही गई , जरुरी नही की उसमे सभी चीजे एकही शिक्षक अपनाई हो कुछ बहुत अलग होते है , कुछ  शिक्षक punishment को अपने क्लास में बिल्कूल  नही अपनाते है !
* इससे बच्चों पर और भी कई प्रभाव पड़ते है !
1) डर से school / tution नही जाना
2) शिक्षक से सवाल  पूछने से डरना
3) पढाई से नफरत करने लगना
4) dipression में आ जाना
6)सही से सो नही पाना 
7 ) demotivate हो जाना +  और भी कई तरह केे  बुरे प्रभाव बच्चे पर पड़ते हैं ! जो सही नही हैं ! हमे बच्चो केे भावनाओ को समझना चाहिए ! कि वो किस तरह से सोचते हैं , क्या चाहते हैं ? हमे उनके जैसा बनके सोचना चाहिए उसकी  रोजमर्रा की जिंदगी में झांककर देखना चाहिए ! और हमें उसका सहयोग करना चाहिए ! तब यह शायद खत्म हो सकता है !  हमने  पिछले शनिदवार I-Saksham office में एक छोटा सा video देखा वो भी इससे बहुत मिलती जुलती है !  .........यह मेरे नजरिये से था ! आपके नजरिये से क्या  हो सकता है ?
                    . .......धन्यवाद .............By Rohit Raina

Monday, September 16, 2019

MY GOAT - by Rohit Raina


Hello friends, today I am going to share with you about my goat,
today I clicked on it pic of you who are looking at the goat in this picture.
it is my goat, its color is white and black. We call it Memni lovingly. It looks so cute. My mother bought it at someone's place. When it was very small. In childhood, she also looked very cute. Now it has grown, it has given birth to seven children so far, some of them goats have been given by the mother to others. Just a few days ago, she again gave birth to two small children like herself. I have named both of them as Loli-Molu! These  are very naughty .Its horns has not come out yet. These are fight and fight, and also play. Sometimes it even eat the page in the wall. My mother loves to raise animals. She looks after it very well. Whenever it falls ill, treatment it to the doctor too. It tastes like grass, bread, rice and many other things. My mother takes it to the farm every day for grazez .Sometimes she brings grass herself. It also has some difficulties in raising it, sometimes it goes to another field, so you have to listen to the scolding too. When harvest time comes, it has to be tied in a peg . So that it does not go into another field. When I ask my mother about it, she tells me that I love to raise it. We love caring for animals. Along with this, my mother likes to adopt many other animals such as: - Dog,  chicken, cow etc. Also I like animal .
              ... Thanks...

Our pond - By Rohit Raina


This pond is located right next situated our house. This is the largest pond in our village. There are many ponds like this. But this is the only pond from cleanliness to depth. At first it was small in size. But after digging there was a lot of difference.

This pond fills during the rainy season, but when there is no rain in the year, this pond will come to the brink of drying, which causes a lot of trouble for the animals! Many fish are also found in this pond. It also has a lotus flower. Once a year it is dried and the catch fishes .

We consider this pond sacred because in our Chhath festival of Hindus, all the people of the village take a bath in this pond and worship at this place. We also know it by the name of Chhat Ghat and Badki Ahara Pokhar .

We used to take a lot of bath in this pond in my childhood because earlier the water was clean but now gradually its importance is also decreasing. The reason is that washing clothes, bathing animals, cleaning utensils, throwing trash etc. are happening in this pond. Due to which pollution is spreading in our pond. Still animals drink of this pond. Which is a disease sign. We should not pollute the pond. This is having a huge impact on our environment. This is harming all animals.