“इतने साल बाद पढ़कर क्या करोगी?”
यह सवाल मुझसे एक महिला शिक्षक ने तब पूछा, जब मैं अपनी एडू-लीडर नेहा का एडमिशन करवाने जमालपुर के एन. सी. घोष स्कूल गई थी। नेहा की शादी को 10 साल हो चुके, वह तीन बेटियों की माँ है, और 9 साल बाद उसने दोबारा पढ़ाई शुरू करने का फैसला किया था।
शुरुआत में, हर दरवाज़े पर रुकावट थी। शिक्षक ठीक से बात करने को तैयार नहीं थे। कभी कहा गया—कल आइए, पहले वाली क्लास टीचर से मिलिए। उस महिला शिक्षक की बात—"इतने साल बाद पढ़कर क्या करोगी?"—सबसे ज़्यादा चुभ गई।
नेहा ने एक पल के लिए हिम्मत हार दी और कहा—“छोड़ दीजिए, अब नहीं होगा।”लेकिन फिर मैंने और नेहा ने तय किया कि इतनी दूर आकर अब पीछे नहीं हटेंगे।
यह हमारा संयुक्त नेतृत्व था। हमने चुप रहकर बहस करने के बजाय, समस्या को हल करने पर ध्यान केंद्रित किया।
हमने स्कूल के सर से सारी स्थिति खुलकर बताई और मदद माँगी। सर ने मदद की। वकील से संपर्क हुआ। 2018 का रजिस्टर, कोर्ट के कागज़, वकील की फीस—खर्च बढ़ रहा था और हिम्मत टूट रही थी, लेकिन हमने ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स तैयार किए।
आखिरकार, नेहा का एडमिशन हो गया। जब मैम ने कहा “कल से कॉपी-किताब लेकर स्कूल आना,”
वह सिर्फ़ एक वाक्य नहीं था, वह 9 साल के बाद छँटता अंधेरा था।
नेहा की आँखों में खुशी थी। नेहा ने यह साबित किया कि शिक्षा की कोई उम्र नहीं होती। एक माँ, 3 बच्चों की ज़िम्मेदारी के बाद, 9 साल बाद फिर से स्कूल जा सकती है, तो बदलाव संभव है।
लेखिका परिचय:
नाम: खुशी कुमारी
परिचय: खुशी मुंगेर जिले के भागीचक, जमालपुर गाँव की रहने वाली हैं।
i-Saksham से जुड़ाव: वह वर्ष 2024 में i-Saksham के बैच-11 की एडू-लीडर हैं।
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