Wednesday, February 21, 2024

PTM में सिखाया गया हस्ताक्षर करना

 प्रिय साथियों, 

आज मैं आप लोगों के साथ अपने स्कूल में हुई PTM का अनुभव साझा करने जा रही हूँ। आज की PTM 11:00 बजे से शुरू हुई। सभी अभिभावक समय से आये। इस बैठक में मेरे स्कूल के प्रिन्सिपल सर और वाईस-प्रिन्सिपल सर और क्लास टीचर भी शामिल हुए।

बैठक में कुल 32 पेरेंट्स को आना था, लेकिन 26 पेरेंट्स ही शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य निन्मलिखित बातों को जानना था:

बच्चे रेगुलर स्कूल क्यों नहीं आते है?
आते भी हैं तो समय से क्यों नहीं आते हैं?
बच्चे जब स्कूल से घर जाते हैं तो आपलोग उनकी कॉपी चेक करते है कि बच्चे ने आज क्या पढ़ा?
मेरे बच्चों को और क्या सीखने की जरूरत है?

सभी पेरेंट्स ने कुछ उत्तर दिये। कुछ पेरेंट्स बोले कि ठंड के कारण बच्चा लेट आता है। आज से हम कोशिश करेंगे कि मेरा बच्चा रेगुलर स्कूल आए और समय से आए तभी तो मेरा बच्चा कुछ सीख पायेगा।

कुछ पेरेंट्स बोले हम तो पढ़े लिखे नहीं हैं, तो हम किस तरह जान पायेंगें कि मेरा बच्चा क्या सीख रहा है? और क्या नहीं?

मेरा मन यह बात सुनकर थोड़ा उदास हुआ, मैं सोचने लगी कि काश ये लोग भी पढ़े लिखे होते तो जान पाते कि मेरा बच्चा क्या सीख रहा है!

मैंने उनसे एक प्रश्न किया कि क्या आप सभी हस्ताक्षर करना जानते हैं? 
वो बोले, नहीं। 

तो मैंने फिर से प्रश्न किया, क्या आप सीखना चाहेंगे? 
सभी ने हाँ कहा। 

उसी समय मैं सभी को कॉपी-कलम (उनके बच्चों से ली हुई) देकर उनके नाम और हस्ताक्षर की प्रैक्टिस कराने लगी। सभी पेरेंट्स मेरे चारों तरफ बैठ गए। सभी अपना नाम सीखने के लिए उत्साहित थे, यह देखकर मुझे बहुत ख़ुशी हो रही थी। 

प्रिंसिपल सर को भी मेरा यह कार्य बहुत अच्छा लगा, उन्होंने मुझे धन्यवाद भी किया।

सपना कुमारी
बैच-10, बेगूसराय 


दूसरी PTM सोमवार को हुई

 नमस्ते साथियों, 

मैं अपनी PTM का अनुभव आप सभी के साथ साझा कर रही हूँ। यह मेरी करवायी हुई दूसरी PTM है। वैसे तो PTM शनिवार को होती है परन्तु सभी बच्चों के द्वारा मैंने यह सन्देश पहुँचा दिया था कि इस बार PTM सोमवार को सुबह 10 बजे से होगी। 

सोमवार को 10 बजे जब हम स्कूल पहुँचे तो पेरेंट्स (parents) नहीं आये थे। मैंने कुछ देर इंतज़ार भी किया। इतने में ही रोज़ी दीदी आयीं। उन्होंने हमें सलाह दी कि सभी पेरेंट्स को कॉल किया जाए।
 
मैंने और अंजली ने मिलकर सभी पेरेंट्स को कॉल लगाना शुरू किया। थोड़ी देर में कुछ पेरेंट्स आ गए। मुझे थोड़ा डर लग रहा था कि कहाँ से शुरू किया जाये? 

फिर रोज़ी दीदी ने गाइड (guide) किया कि पहले स्वागत कीजिये, उसके बाद सेशन प्लान के अनुसार चलिये। मैंने वैसा ही किया। सेशन प्लान के अनुसार पहले माइंडफुलनेस कराया। पिछली PTM का एक रिकैप (recap) किया। 

उसके बाद रोज़ी दीदी ने रट्टा लगाने और समझकर पढ़ने में अंतर को लेकर एक वीडियो दिखायी। सभी पेरेंट्स ने उस वीडियो को ध्यान से देखा और सुना। पूरा वीडियो देखने के बाद दीदी ने उनसे प्रश्न पूछे। सभी ने अपनी समझ के अनुसार उत्तर दिये। 


कुछ पेरेंट्स ने यह भी बोला कि बच्चे खेल-खेल के माध्यम से ज्यादा सीखते हैं। पेरेंट्स खुद ही प्रश्न पूछ रहे थे। रोज़ी दीदी की हेल्प (help) से हमारी PTM बहुत अच्छे से हो गया। रोज़ी दी को बहुत-बहुत धन्यवाद, हमारी PTM में आने के लिए और इसे सफल बनाने के लिए।

सुप्रीति 
बैच-10, तेघड़ा  

PTM के दसवें सेशन में 14 अभिभावक शामिल हुए

 प्रिय साथियों, 

मैं आज की PTM का अनुभव साझा कर रही हूँ। आज, PTM में 14 अभिभावक शामिल हुए थे। ठंड की वजह से सभी अभिभावक बहुत लेट आए थे। यह PTM का दसवाँ सेशन था। 

सबसे पहले मैंने सभी को आने के लिए धन्यवाद किया, उनका स्वागत किया। फिर हमने “बूझो तो जाने” गेम खेला। यह गेम सभी को अच्छा लग रहा था। सभी जवाब भी दे रहे थे। 

फिर चित्र-पठन हुआ। उसके बाद हम सभी अभिभावकों के साथ कविता-पठन किये। वो लोग कविता करने में झिझक रहे थे। कुछ-कुछ अभिभावक तो अच्छे से कर रहे थे। 

सभी अभिभावकों को घर जाने की बहुत जल्दी थी। वो लोग जाने की जिद्द करने लगे, मैंने उन्हें किसी तरह रोका फिर कविता और चित्र-पठन पर बात हुई। 



PTM में अच्छा हुआ:
14 लोग शामिल हुए। सभी parents इसमें सक्रिय थे और कविता कर रहे थे। 

PTM में अच्छा हो सकता था:
सभी parents टाइम पर आते और सभी मीटिंग के अंत तक रुक सकते थे।

गौशिया प्रवीन
बैच- 9, जमुई 


समुदाय में PTM- उद्देश्य था CRA पर समझ

नमस्ते साथियों,

मैं, जमुई के भंडरा गॉंव से हूँ। मैं आप सभी के साथ अपने समुदाय में करायी हुई PTM का अनुभव साझा कर रही हूँ। 

अधिक सर्दी के कारण कोई अभिभावक स्कूल में PTM में पार्टिसिपेट करने नहीं आये। यह सातवीं PTM थी और इस PTM का उद्देश्य था- CRA (Concrete, Representational & Abstract) पर समझ बनाना। इसमें कुल 16 अभिभावक ही सम्मिलित हुए। 


मैं डोर-टू-डोर (door-to-door) सभी अभिभावकों को उनके घर बुलाने गयी थी। कोई महिला बोल रही थी कि मेरी तबियत ठीक नहीं हैं, किसी ने बोला कि बहुत ठंड हैं और किसी को घर में बहुत काम था। बहुत विनती करने पर कुछ लोग PTM में शामिल हुए और मैं इसे करा पायी। 

संध्या कुमारी
बैच-9, जमुई

Short-Notice पर PTM करवायी

प्रिय दोस्तों,

आज मैं आपके साथ PTM का अनुभव साझा कर रही हूँ। वैसे तो आज हमें क्लस्टर मीटिंग करनी थी परन्तु मुझे मेरी बडी से सूचना मिली कि आज हमें अपने विद्यालय में अभिभावक शिक्षक बैठक (PTM) करवानी है। 

जब मैं कक्षा में पहुँची और मैंने अपनी क्लास-टीचर (Class Teacher) को बताया कि आज PTM करवानी है तो उन्होंने बोला कि ऐसे बिना सूचना के हम बच्चो को नहीं छोडेंगें, कि घर जाकर वो अपने अभिभावकों को बुला कर लायें!

कुछ ही देर में मैंने उन्हें PTM के लिए मनाया। 

विद्यालय के ही शिक्षक गोपाल सर ने बच्चों के अभिभावकों को घर से बुलाने में सहायता की और मैंने पहली बार PTM का नेतृत्व किया। मैंने Save Water के बारे में अभिभावकों को जागरूक किया।  

मेरा इस PTM को करवा कर आत्मविश्वास (confidence) बढ़ा कि अब मैं PTM कराने में सक्षम हो गयी हूँ।

प्रतिमा कुमारी
बैच- 10, तेघड़ा 



क्लस्टर मीटिंग और Fun

 नमस्ते साथियों,

मैं आज आप सभी के साथ कलस्टर मीटिंग का अनुभव साझा कर रही हूँ। हमारे कलस्टर का नाम 'अवसरों की दुनिया’ हैं और यह कलस्टर मीटिंग अरहरा पाटम मंदिर के पास एक स्कूल मे हुई थी। हमारे कलस्टर मे कुल 16 दीदी थी, जिसमें से 12 एडु-लीडर्स थी।

हमारी कलस्टर मीटिंग 10 बजे से शुरू हुई और सभी साथी समय पर पहुँच गये थे। ठंड बहुत ज्यादा होने के कारण एक-दो साथी थोड़ा लेट से पहुँचे। फिर सभी साथी एक जगह पर बैठ गये और हमने माइंडफुलनेस और एक गतिविधि की। 

फिर हमने अपने पिछले महीने के लक्ष्य (goal), “लाइब्रेरी के लिए जगह खोजना” पर बात की। ये लक्ष्य कितना पूरा हो पाया, किसे क्या-क्या चुनौतियाँ आयीं, यह सब जाना। उदयपुर की एडु-लीडर्स ने लाइब्रेरी के लिए स्थान खोज लिया था और फरवरी में लाइब्रेरी का उद्घाटन करने का प्लान है।

हमने अगले महीने का गोल भी यही रखा कि “लाइब्रेरी के लिए जगह खोजना”। क्योंकि पिछले महीने का गोल अधिकतर लोगों का पूरा नहीं हो पाया है।

इसके बाद हमने दो समूह बनाये और बढ़ते कदम पर बात की। अपना-अपना बढ़ते कदम जो साथी बना कर ले गये थे उन्होंने सभी के साथ साझा किया। एक-दूसरे को फीडबैक भी दिया और खुद के फीडबैक पर भी विचार किया। 

हमलोग जो बढ़ते कदम बनाते हैं तो उसे हम कितना स्मार्ट बना पाए? और कहाँ सुधार की जरूरत है? वो सब फीडबैक एक-दूसरे से मिलता है। आज सभी सदस्य अपना बढ़ते कदम बना कर आयी थी और सभी ने साझा भी किया कि हर बार की तरह इस बार भी यह बहुत अच्छा लगा।

उसके बाद मोना दीदी ने स्कूल में ही लाइब्रेरी के लिए एक जगह दिखायी। जगह देखकर हम मोना दीदी के घर गए। सभी ने भर-पेट खाना खाया। सभी को बहुत अच्छा लगा, बहुत मज़ा आया। हमने दीदी को धन्यवाद किया और अपने घर लौट आये। 


सोनम खातून
बैच- 10 (A), मुँगेर 



क्लस्टर मीटिंग का अनुभव और समस्याएँ

 प्रिय साथियों,

मैं आप सभी के साथ अपने क्लस्टर का अनुभव साझा करने जा रही हूँ। मेरे क्लस्टर का नाम पावर ऑफ एडु-लीडर्स है। हमने मीटिंग की शुरुआत मेडिटेशन से की। ज़ेबा दीदी, सुप्रिया दीदी और मैंने सांझा किया कि पिछ्ले महीने ऐसा कौन सा पल था, जिसे याद करके हमें खुद पर बहुत ज्यादा प्राउड (proud) फील हुआ। 

उसके बाद हम सभी ने एक-दूसरे से बढ़ते कदम शेयर किया। एक-दूसरे को फीडबैक देकर पिछले एजेंडा पर बातचीत करने लगे। पिछले महीने हमारा एजेंडा था कि हम 30 किशोरियों को पढ़ाई से जोड़ें,उनका नामांकन (enrolment) करवायें। 


सभी के अनुभव सुनकर निन्मलिखित चैलेंज निकल कर आये:

गाँव में वैसी लड़कियाँ नहीं मिली जिन्होंने पढ़ाई छोड़ दी थी।
बहुत सारी लड़कियों का आधार कार्ड नहीं बना है।
बहुत सारी लड़कियों का बैंक में अकाउंट नहीं बना है।
मुझे भी अपनी कम्युनिटी में एक भी ऐसी लड़की नहीं मिली जिसने पढ़ाई छोड़ दी हो लेकिन मुझे दूसरी समस्या का सामना करना पड़ा। मुझे 20-22 बच्चे ऐसे मिले जो आंगनवाड़ी भी नहीं जाते थे।
हमारे गाँवों में हम अपना एजेंडा कंप्लीट नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि लड़कियाँ मिल नहीं रही हैं। इसलिए हम लोग दूसरे गाँव जा रहे हैं पर इसके लिए हमें ऑटो के किराये की जरूरत है।
बहुत सारी लड़कियों की फाइनेंशियल कंडीशन अच्छी नहीं है, इस वजह से उनको पढ़ाई छोड़नी पड़ी।
दो ऐसी लड़कियाँ भी मिली, जिनकी उम्र 15 से 18 साल है लेकिन उन्हें अपना नाम भी लिखना नहीं आता।  
बहुत लड़कियों के पास CLC ना होने की वजह से वो आगे की कक्षाओं में नामांकन नहीं करा पा रही हैं।

इन समस्याओं को जानने के बाद हमने अगले एजेंडा पर बात की। हमारा अगला एजेंडा है कि 30 लड़कियों का एनरोलमेंट करवाना। फिर हमने डीब्रीफ किया। अंत में हम सभी ने क्लस्टर फॉर्म भरे।

क्या अच्छा हो सकता था?

हमारे क्लस्टर में बहुत सदस्य ऐसे हैं जो क्लस्टर को सीरियस नहीं ले रहे हैं। जिस दिन मीटिंग होती है उसी दिन वह बताते हैं कि वह नहीं आने वाले हैं। बहुत सारी एडु-लीडर्स और बडी, टाइम पर क्लस्टर में मौजूद नहीं होती हैं।

क्या अच्छा हुआ?

उपस्थित सदस्यों ने अपना बढ़ते कदम अच्छे से शेयर किया।

सभी ने कम्युनिटी के चैलेंज शेयर किये।

सभी कोआपरेट (cooperate) कर रहे थे और सपोर्ट करने के लिए तक तत्पर थे। 


संध्या कुमारी
बैच- 10, तेघड़ा