"इससे क्या फायदा? यह पढ़ नहीं सकती।"
यह सादिया की माँ ने पहली बार मुझसे कहा था। न गुस्से में, न दुख में, बस इतनी सहजता से, जैसे यह कोई तय बात हो। जैसे उन्होंने बहुत पहले ही मान लिया था कि उनकी बेटी की कहानी यहीं खत्म होती है।
मेरा नाम सलिना खातून है। मैं मुजफ्फरपुर के सकरा प्रखंड के मझौलिया गाँव की रहने वाली हूँ और बैच-12 की एडू-लीडर हूँ।
पहली बार जब मैंने सादिया को देखा, तो वो किशोरी सेशन में किसी कोने में खड़ी थी। जैसे ही कोई उसकी तरफ देखता, वो और सिकुड़ जाती। मैंने उससे बात करने की कोशिश की, लेकिन वो डर के कारण बोली ही नहीं। बस खड़ी रही।
सादिया पाँचवीं पास कर चुकी थी, लेकिन पढ़ना-लिखना नहीं आता था। इस वजह से छठी में दाखिला नहीं हुआ था और दो साल से पढ़ाई छूटी हुई थी। घर के बाहर किसी से बात करना तो दूर, वो सामने भी नहीं आती थी।
मैंने तय किया कि पहले उसकी माँ से बात करूँगी।
माँ से पहली बार मिली तो उन्होंने सुना, लेकिन भरोसा नहीं किया। शायद उन्हें लगा कि यह भी एक और आने-जाने वाली लड़की है जो कुछ दिन बाद भूल जाएगी।
लेकिन मैं जाती रही।
दूसरी बार, तीसरी बार, चौथी बार। हर बार उनसे बात की, उनकी बात सुनी, सादिया के बारे में पूछा। धीरे-धीरे उन्होंने महसूस किया कि मेरा आना रुकने वाला नहीं है। और धीरे-धीरे उन्होंने यह भी महसूस किया कि उनकी बेटी की पढ़ाई अभी खत्म नहीं हुई है, बस रुकी हुई है।
जब माँ का मन बदला, तो सादिया को सेशन में भेजना शुरू किया। पहले जबरदस्ती। फिर खुद से। और जब उन्होंने देखा कि सादिया घर लौटकर कुछ बताती है, कुछ बोलती है, कुछ सीखकर आती है, तो उनका भरोसा और पक्का होता गया।
सादिया की चचेरी बहनें भी उसे साथ लाने लगीं।
महीने बीते। सात-आठ महीने।
और फिर एक दिन सेशन में सादिया ने खुद हाथ उठाया।
वही सादिया, जो कभी सामने नहीं आती थी, अब गतिविधियों में हिस्सा ले रही थी। दूसरों को भी बुला रही थी। AG टॉक में खुद आगे आकर अपनी बात रख रही थी, अपने लक्ष्य बना रही थी।
जो A, B, C नहीं पहचानती थी, अब वर्णमाला लिखती है। किताब से देखकर लिख लेती है।
इस साल उसका छठी कक्षा में दाखिला हो गया। वो अपनी सहेली के साथ रोज़ पैदल स्कूल जाती है।
और जब भी वो मुझे देखती है, तो खुद आगे बढ़कर बात करती है।
उसकी माँ भी अब खुद पूछती हैं कि अगला सेशन कब है।
लेखिका परिचय
नाम: सलिना खातून
परिचय: मझौलिया गाँव, सकरा प्रखंड, मुजफ्फरपुर की रहने वाली हैं। i-Saksham बैच-12 की एडू-लीडर हैं।
लक्ष्य: शिक्षा के माध्यम से समुदाय में बदलाव लाना।