"तुम्हें कोई काम-धाम नहीं है क्या?"
मेरा नाम रिया है। मैं पूर्णा खैरा की रहने वाली हूँ और बैच-11 की एडू-लीडर हूँ।
जब लोग यह कहते थे, तो मैं मुस्कुरा देती थी। लेकिन घर लौटते वक्त मन में एक ही सवाल होता था — क्या यह सब कभी बदलेगा?
शुरुआत में PTM का नाम सुनते ही लोग बहाने बनाने लगते थे। किसी के पास समय नहीं था, किसी को लगता था कि इससे कुछ फायदा नहीं। माइंडफुलनेस की बात करती तो लोग हँस देते — "ये सब करने से क्या होगा?" और कभी-कभी सीधे कह देते — "तुम्हें कोई काम-धाम नहीं है क्या? बार-बार घर बुलाने चली आती हो!"
मैं चुप रहती। मुस्कुराकर कहती — "चलिए ना, थोड़ी देर बैठकर बात करेंगे।"
और फिर अगली बार फिर जाती।
i-Saksham में एक बात समझ आई थी — लोगों को बदलने से पहले उनसे जुड़ना ज़रूरी है। इसलिए मैंने हार नहीं मानी। घर-घर जाती रही। उनकी चिंताएँ सुनती रही। बच्चों की पढ़ाई पर बात करती रही। हर बार उसी उम्मीद के साथ — "आज की बैठक में ज़रूर आइए।"
धीरे-धीरे कुछ बदलने लगा।
पहले जो अभिभावक आने से बचते थे, वो खुद पूछने लगे — "मीटिंग आज ही है ना?" और अगर किसी महीने बैठक नहीं हो पाती, तो फोन आता — "इस बार PTM कब होगी?"
उस दिन की PTM में मैंने शुरुआत माइंडफुलनेस से की।
यही गतिविधि जिसे कभी लोग बेकार समझते थे — उस दिन सब शांत होकर उसमें शामिल हुए। गतिविधि के बाद एक अभिभावक ने मुस्कुराते हुए कहा —
"अब इससे मन हल्का लगता है।"
मुझे अपने वो शुरुआती दिन याद आ गए जब यही लोग इसे मज़ाक में उड़ा देते थे।
बातचीत में बच्चों की पढ़ाई, मोबाइल, खान-पान, दिनचर्या — सब पर खुलकर बात हुई। पहले जो कहते थे कि स्कूल बंद है तो पढ़ाई भी बंद है, वो अब खुद बच्चों की आदतों के बारे में पूछ रहे थे। उत्कर्ष की मम्मी ने बताया कि उनका बेटा अब रोज़ स्कूल जाने से पहले उन्हें प्रणाम करके जाता है। यह सुनकर मुझे पता चला कि जो बातें हम बच्चों के साथ करते हैं, वो घर तक पहुँच रही हैं।
बैठक के अंत में एक अभिभावक ने कहा — "आप महीने में दो बार आइए। आपसे बात करके अच्छा लगता है।"
मैं भावुक हो गई। यही वो लोग थे जो कभी कहते थे — "तुम्हें कोई काम-धाम नहीं है क्या?"
दो साल पहले PTM एक बैठक थी जिसमें कोई नहीं आना चाहता था।
आज वही लोग फोन करके पूछते हैं कि अगली बैठक कब है।
लेखिका परिचय
नाम: रिया सिंह
परिचय: पूर्णा खैरा की रहने वाली हैं। i-Saksham बैच-11 की एडू-लीडर हैं। B.A. पूरी की है।
i-Saksham से जुड़ाव: बैच-11
लक्ष्य: सरकारी नौकरी प्राप्त कर आत्मनिर्भर बनना और शिक्षा के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाना।