Sunday, April 28, 2019

अनुभव: शिक्षक अभिवावक बैठक (रोहित रैना- i-Saksham फेलो जमुई)


आज मैंने और अमन सर ने मिल कर मेरे सेंटर पर शिक्षक अभिभावक बैठक(PTM ) करायी l

हमने PTM कराने से पहले इसका प्लान बना लिया था कि PTMकैसे करना है और उसमें क्या-क्या चीजें करवाना है l  हमने PTM कराने का समय 10:30 से रखा l सभी बच्चे इस समय स्कूल जा चुके थे इसीलिए मैंने कुछ बच्चों के साथ ही इसका शुरुआत किया l सबसे पहले हमने खुद को अभिभावकों से  परिचित कराया l फिर हमने उनसे कुछ सवाल पूछे-PTM क्या है ? हम PTM क्यों करवाते हैं l PTM क्यों जरूरी है और इससे हमें क्या फायदा है ? कुछ पेरेंट्स जो पिछले मीटिंग में आए थे उन्होंने कुछ बताया और बाकी सब नहीं बता पाए ,  फिर हमने उन्हें विस्तार रूप से समझाया कि PTM का मतलब Parents teacher meeting होता है|.हम शिक्षक और अभिभावक आपस में बच्चों केे बारे में बात करते हैं , की बच्चे कैसे पढ़ रहे हैं और क्या सीख पा रहे हैं ? इससे हमें यह पता चलता हैं , की बच्चो केे लिए हम और आप क्या - क्या   कर सकते हैं ? इसे हर महीना करना चाहिए l
अभिभावक इन बातों को ध्यान से सुन रहे थे , और समझ रहे थे l फिर हमने पिछले PTM केे बारे में पूछा की जो आज से तीन महीने पहले हुआ था , तब से लेकर अब तक आपके बच्चे में क्या बदलाव आया ? आप  अपने बच्चों पर कितना ध्यान दे पा रहे है ? सभी अभिभावक अपने- अपने बच्चों केे बारे में बता रहे थे , कि वो पहले से बेहतर हैं और अपना काम भी करते हैं , कुछ अभिभावक ये भी बोल रहे थे कि उनके बच्चे बदमाशी भी करते हैं l
हमने अभिभावकों को पिछले तीन महीने में शिक्षा केंद्र में क्या-क्या कराया गया उसके बारे में जानकारी दी| हमने उन्हें असर test , Midline test और बाल उत्सव के बारे में बताया| बाल उत्सव का पोस्टर भी हमारे दीवार पे लगा हुआ था जो न्यूज़ में आया था , उसको भी दिखाये l
फिर हमने अभिभावकों को TLM (Teaching and Learning Materials) के बारे में बताया| हमने उन्हें बताया की किस तरह इन सामग्री का इस्तेमाल कर के हम बच्चों की विषय पर पकड़ मजबूत बनाते हैं| हर TLM का इस्तेमाल अभिभावकों से खुद करवाया l अमन सर और हमने इस तरह से बारी- बारी TLM का यूज किया-
1: मोतियो का माला-हमने अभिभावकों को दो - दो के group में बाटा और सभी को एक - एक मोती का माला दिया| फिर हमने उन्हें अंक बोले और वे तुरंत उस अंक के बराबर मोती गिन कर बता रहे थे l उन्हें बहुत ही अच्छा लग रहा था ,ये सब करने में l हम उन्हें यह अवगत करा रहे थे कि बच्चे इसी तरह से गिनती सिखते हैं l
2. UTH BLOCK का इस्तेमाल - हमने इसका भी इस्तेमाल अभिभावकों के बीच किया| हमने बताया कि जो digit single हो वो Unit होगा यानि की ईकाइ ex:- 1,2,3 आदि| इसी तरह से हमने block के साथ TENS समझाया:-जैसे ही 9 + 1 होगा वो 10 TEN हो जायेगा l फिर मैंने इसी तरह Hundred को भी समझाया l
3. ASER Test: फिर हमने Aser बारे में बताया कि हम ASER test के माध्यम से बच्चों के शिक्षा के स्तर को जांचते हैं|हम कक्षा में बच्चों को स्तर के अनुसार ही पढातें हैं|
4. Fantastic phonics: हमने अभिभावकों को fantastic phonics का कार्ड देकर उन्हें खुद उस पर लिखने बोला l उन्हें हम बता रहे थे कि बच्चे को हम यह सब लिखने देते हैं l
5: Tablet Use: हम parents को tab📱 केे बारे में बताये की इससे हम क्या - क्या करते हैं , उन्हें Rhyms का video दिखाए , कुछ apps केे बारे में बताया l हमने BOLO app केे बारे में बताया की इससे- हम खुद कैसे पढ़ सकते हैं , और बच्चे भी इसको कैसे इस्तेमाल करते है l
6. Library: Library केे बारे में बताए की इसमें बच्चे अपने मनपसंद कहानी को पढ़ते हैं , और किताब घर भी ले जाते हैं l
7:- Print Rich classes: हमने अभिभावकों को  पूरा दीवार मे लगे हुए चित्रों को दिखाया l वे बहुत खुश  थे , यह सब देखकर क्योंकि वे हमारे center में पहली बार इतना सब कुछ देख रहे थे l

फिर हमने उन्हें चैलेंज के बारे में बताया ex:- H.W ,Attendance, late, साफ़ - सफाई इत्यlदी| हमने बताया कि बच्चों का इन सभी चीज़ों का पालन करना अधिक प्रशंशनीय होगा| वे बोल रहे थे कि वे अपने बच्चों पर ध्यान देंगे| हमने अपने लक्ष्य केे बारे में भी उन्हें बताया कि हम बच्चे  को कब तक इतना सिखा देंगे l
हमने अभिभावकों से फीस के बारे में भी बात की और उन्हें बताया की समय पर फीस देना कितना महत्वपूर्ण है| इसके साथ ही अभिभावकों ने अपनी दिक्कतें और आशाएं भी व्यक्त की|

इस बैठक में माताओं की ही उपस्तिथि थी जो प्र्शंशनिय तो थी परन्तु यह सवाल भी सामने लायी कि "आखिर बच्चों के पिता की अनुपस्तिथि का क्या कारण हो सकता है?"


अंत में सभी अभिभावकों ने हस्ताक्षर कियेऔर हम सब लोगों ने मिल कर तस्वीर खिचाई और फिर सभी लोग अपने - अपने घर चले गये l इस बार का PTM पहले से ज्यादा बेहतर रहा|

Friday, March 1, 2019

Sonam, i-Saksham fellow writes about her classroom experience for the day.




आज हमारा गणित और EVS का session था। इस session मे हुए खुद का बच्चो के experience को आप लोगो के साथ साझा करने जा रही हूँ।

सबसे पहले पाँच मिनट सफाई पर बात किए।  मैंने सभी बच्चे से पूछा कि कौन - कौन ऐसे है जो स्नान कर के आए है। 95℅ बच्चो ने हाथ उठाया। मुझे ऐसा लग रहा कि दिन प्रतिदिन बच्चे पहले कि अपेक्षा मे अब साफ रहने लगे हैं। [ यह संभव इस तरह हो पाया है कि मैने बच्चो को बोली कि यदि आप स्नान करके साफ सफाई मे नहीं आयेंगे तो मैं बैग लेकर पुनः आप को घर वापस भेज दूंगी।]

इसके बाद प्रार्थना (तू ही राम...) और राष्ट्रगान हुआ। बच्चे मुंगेर जिला का News paper पढ़े और मैंने सभी बच्चों  से इस से संबंधित कुछ प्रश्न पूछे। जैसे - आपके पंचायत का नाम क्या है?, आप कौन से जिला मे रहते है?...... 85℅ बच्चे अच्छे से बता पाए। सभी बच्चे कक्षा मे आए और उन्होंने Meditation के साथ गायत्री मंत्र और महामृत्युं जय मंत्र का उच्चारण किया।

गणित कक्षा की शुरुआत दिए गए होमर्वक पर बातचीत से हुई। बच्चे  बोर्ड पर चित्रो के माध्यम से यह सीख पाए कि कौन- कौन सी वस्तु ऐसी है जो एक दूसरे पर जम(टिक) पाती है और कौन - कौन सी वस्तु ऐसी है जो नहीं जम पाती। मैंने अभी दो से तीन उदाहरण बताया कि प्रारंभिक के एक बच्चे (नाम - सिध्दांत) बोले कि दीदीजी कुर्सी पर कुर्सी भी टिक सकता है। जो कि मुझे सुनकर काफी अच्छा लगा। फिर सभी बच्चो ने बताया। इसके बाद 2 - डिजिट और जोड़ के बच्चो को शंकु के आकार का क्या - क्या होता है उसे सोचकर लिखने बोले। जब मै कॉपी चेक की तो बच्चो ने काफी हद तक सोचकर लिख पाए। उस समय मुझे अच्छा feel हुआ। फिर मैंने प्रारंभिक के बच्चो को मोती और माचिस की तिल्लिया से बच्चो को 10 - 15 तक की पहचान करायी।


   
           EVS की शुरूहात भी पिछली कक्षा पर बातचीत से हुई। EVS मे शिर्षक "हमारा शरीर" मे आज बच्चो ने हाथ के कार्य के महत्व को चित्रो के माध्यम से जाना। इसके बाद हाथो से संबंधित एक गतिविधि किए। गतिविधि का नाम था, "हमारा साफ दिखने वाला हाथ भी गंदा है।" एक ग्लास पानी और एक प्लेट लाए। सभी बच्चो ने पूछने लगे कि क्या कीजिएगा। फिर मैने सभी बच्चे से पूछे कि किसका - किसका हाथ साफ है लगभग बच्चो ने अपना हाथ उठाया। फिर मैंने उन्हीं उन्हीं बच्चो को बुलाकर प्लेट मे हाथ धुलाया। सभी ने ध्यानपूर्वक देखने लगे।

बच्चे EVS मे हाथ से संबंधित Activity (साफ दिखने वाला हमारा हाथ भी गंदा है) करते हुए।



जब पानी गंदा हुआ तब बच्चों की समझ मे आया और बोल पड़े कि इस लिए खाने से पहले हाथ धो के खाना चाहिए। तब मै बोली हाँ! बच्चे इस  गतिविधि को करके खुश थे। आज मुझे यह देखने को मिला कि बच्चो मे किसी प्रकार की भेदभाव की भावना नहीं है जब मै गंदे पानी को बाहर फेकने बोली तो बच्चो ने बहुत ही उत्साह से फेके और धोकर रख दिए। जो मुझे और भी अच्छा लगा।

धन्यवाद.........
                              

Wednesday, February 27, 2019

Sonam, i-Saksham fellow writes about her classroom experience for the day




आज मैं अपने session मे हुए खुद का experience और बच्चों के experience साझा करने जा रही हूँ। आज सबसे पहले पाँच मिनट सफाई पर बात की। इसके बाद प्रार्थना(तू ही राम....) और राष्ट्रगान हुआ। बच्चे मुंगेर जिला का News paper पढ़े और एक बच्चे ने अपने याद से एक छोटा सा कहानी सुनायी। सभी बच्चे फिर कक्षा में आए और Meditation किए।


 आज मेरा हिन्दीं और अंग्रेजी का session था। सबसे पहले मैं अंग्रेजी कक्षा की शुरूआत (Ten little finger...) Rhymes को Action के साथ कराए जो कि बच्चे को याद था और आसानी से कर पाए। सभी बच्चे होमर्वक भी कर के लाए जिसकी जाँच मैने बोर्ड पर  की। जिसमे एक बच्चा नहीं लिख पाया और बाकी सब लिख पाए। इसके बाद मैं बोर्ड पर एक मानव शरीर का चित्र नामांकरण के साथ किए। जिसे 50℅ बच्चो ने बनाया। फिर मैंने सभी बच्चों से पूछा कि what is this👂,👅...? इसी तरह और भी पूछते गए। जो 90℅ बच्चे बता पाए।
पहेलियों  का चित्रों से मिलान 
       हिन्दीं कक्षा की शुरूआत पिछले session पर बातचीत से हुई। बच्चे आज पहेलियाँ को pictute के साथ किए। शब्द और अनुच्छेद स्तर वाले बच्चो से पढ़वाया गया और उस सभी का  उत्तर प्रारंभिक के बच्चे दे पाए। आज फिर प्रारंभिक के बच्चे मिट्टी और आटा से अक्षर सीख रहे थे। पहले दिन जब मैंने  बच्चो के सामने मिट्टी और आटा रखे तो सभी बच्चे उसे बहुत शान्त और ध्यानपूर्वक देखने लगे। मैं सबसे पहले बच्चो को सोचने बोली कि ये जो मिट्टी और आटा है इसका करेंगे क्या?  कुछ  बच्चो ने बताया कि रोटी बेलने बताइएगा, तो कुछ बच्चो ने बताया कि हमलोग को मिट्टी से गंदा कीजिएगा।  इसके बाद जब मै बनाना शुरू की तो कुछ बच्चो ने बताया कि चूल्हा (Oven) बनाइएगा। फिर तुरन्त बाद बच्चो ने बोला कि अ बन रहा है। बच्चो ने बोलने लगे कि हम भी बनाएँगे  तो फिर थोड़ा -थोड़ा मिट्टी और आटा सभी बच्चे को दिए और सभी ने अलग - अलग अक्षर बनाए। सभी बच्चो ने काफी उमंग के साथ बना रहे थे। लगभग बच्चो मे अ से अ: तक की समझ बन पायी।


आटा और मिट्टी से अक्षर की समझ


कुछ मिट्टी और आटा मै घर से लेकर गई मुझे कुछ अजीब सा लगा। जब मै बच्चो के सामने प्रयोग की तो बच्चो के लिए काफी successful रहा। यह idea मुझे session plan बनाने के दौरान आया और मैं इसे Plan मे भी डाल दी।

Sunday, January 20, 2019

24 मार्च का वो दिन ...............: कैफ़ी



24 मार्च का वो दिन ............... (कैफ़ी की कलम से)

मै भागता हुआ जमलपुर अवंतिका सिनेमा स्थित श्याम वाटिका हाल में प्रवेश किया  सभी के चेहरे चमक रहे थे , कोई भाग कर सामान ला रहा था, तो कोई हॉल को सजाने में व्यस्त था |  मुझ पर निगाह पड़ते ही लोगों ने एक ही साथ मुझे गुड मोर्निग कह कर मेरा अभिवादन किया, सभी नये –नये लिबास में काफी सुंदर दिख रहे थे, सभी लोग  बेसब्री से उन पल का इंतज़ार कर रहे थे, जो साल में एक ही बार आता है , आप भी सोंच रहे होंगे वो कौन सा दिन था ? कोई ख़ास दिन था ? जी हाँ , वो दिन था 24  मार्च यानि आई –सक्षम का स्थापना दिवस !

मै पहुँचते ही मेस वाले को कॉल किया, उनकी तैयारी के बारे में उनसे जाना , वो थोडा असमंजस में थे , की खाना कहाँ बनाऊ यहाँ या कही और, मै ने स्पष्ट शब्दों में कहा वो आप समझए,  हमारी बुकिंग सिफ यहाँ हाल की हुई है , थोडा देर के बाद फिर उनका फोन आया, और उन्हों ने कह, सर खाना बनाने का सारा सामान मै यहाँ ला चूका हूँ ! और इधर हॉल के मेनेजर ने मालिक को फोन कर दिया, और मालिक ने मुझे तलब की हाल मालिक के सामने वाले कुर्सी पर मै ठाट से बैठ गया ,  मालिक ने पहले मुझे गुराते हुए देखा, और मैने भी पलक झपकने तक  उनकी आँखों में आंखे डाल कर उन्हें भरपूर देखा, इनसे उन्हें ये आभास हो गया था, की किस लहजे  में इनसे बात करना चाहिए , उन्होंने काफी सोंचने के बाद  अपने मोबाइल पर  उंगलिया फेरते हुए अपने निगाह को निचे करते हुए ,मुझ से कहा, “आप ने जितने में बुक किया है उसे तीन गुणा पैसा अधिक देना होगा” मै मुस्कुराता हुआ उनसे पूछा किस ख़ुशी में सर, उन्हों ने कहा, “आप से खाना बनाने की बात नही हुई थी” मेने कहा बिलकुल, आप सच कह रहे है, मै ने मेस वाले को बुलाया और कहा की आप यहाँ से अपना सामन लेकर चले जाए, या फिर आप इनसे बात करकर समस्या का समाधान कीजये! मेरे पासा जितने में बात हुई है उनसे अधिक देने में सक्षम नही हूँ, इतना बोलकर मै वहा से निकल गया !

सभी लोग प्रोग्राम कैसे जल्द से जल्द शुरू हो इनकी तैय्यारी में लगे थे  और इधर जमुई की टीम भी  दस्तक दे चुकी थी , सभी लोग  काफी उत्साहित थे ,और कुछ लोग चिंतित भी , की हम किसी भी वजह से लेट न हो , और इनकी चिंता भी वाजिब थी क्योंकि, लोग कई किलोमीटर की सफ़र कर के आये थे, जितना आवश्यक प्रोग्राम होना था उतना ही आवश्यक सभी लोगों को समय पर घर पहुंचना भी ,
इसी बात को ध्यान में रख कर अमन जी मेरे पास आये, काफी शालीनता से मुझ से पूछा कैफ़ी जी प्रोग्राम कब शुरू होगा ? मेरे पास  कोई टाइम बताने को नही था , क्योंकि जो समय हमलोगों ने निर्धारित किया था उनसे 20 मिनट लेट हो चुके थे , तभी मेरी निगाह शबनम और काजल को ढूँढने लगी , शयद अमन जी ये समझ रहे थे की हर बार की तरह मंच संचालन की ज़िम्मा मेरे पास है , पर मै इसबार काजल और शबनम को इसके लिए तैयार किया था !
तैय्यारी के समय ये दोनों थोडा घबराई हुई थी , और ये घबराहट स्वाभाविक है और ये सबको होता है,  आप  कोई भी नया काम करते हो और वो नया काम मंच संचालन से सम्बंधित हो तो, घबराहट का आलम क्या हो उसका अंदाज़ा आप लगा सकते है , कई लोग पुरे प्रोग्राम में इस चिंता में रहते है की एंकर कही मुझे मंच पर न बोला ले,  मंच संचल को लेकार मेरा अनुभव ये है की  लोगों के सामने बोलने के लिए आपको आत्मविश्वाश प्राप्त करना होगा, और ये कोई किताब पढ़ कर या कोई विडियो देख कर नही आयेगा, आपको इसके लिए सतत पर्यास करना होगा, ये ज़रूर हो सकता है, पहली बार आप ये काम कर रहे हो तो, शायद लोगों को अच्छा न लगे पर , इसमे किसी को निराश नही होना चाहिए , क्यों की इसे हम सीखने का क्रम मान सकते है,  और इस गलतियों से सीख कर आगे और बेहतर किया जा सकता है, इसे को ध्यान में रख कर मै ने नये लोगों से एंकरिंग करवाई थी , प्रोग्राम के समय कई लोगों ने मुझ आकर कहा की कैफ़ी जी माइक आप थामये , अगर मै उसकी बात मान लिया होता तो आज जितना शबनम में आत्मविश्वाश आ पाया है शयद ये नही आ पता , क्योंकि लोग कुछ कर के ही सीखते है, 
हर   चीजों को दो पहलु होता है , सकरात्मक और नकारात्मक दोनों हमारे लिये काम की है, नकारात्मक से सीख कर हम अपने गलतियों को कम कर सकते है और सकरात्मक  चीज़े हमारे आत्मविश्व को बढ़ाएगा , उसी निगाह से इस पुरे प्रोग्राम को देखें तो , आप अनुभव कर पायें होंगे जब जमुई से आये लोगों के साथ मुंगेर के लोग मिल रहे थे, और एक दुसरे को जान रहे थे, जिसे  पहले फेलो ग्रुप में नाम से जानते थे आज उसे साक्षात् देख पा रहे थे  अब जब भी उनका नाम आयेगा तो , उनकी तस्वीर भी दिमाग में बनेगी ,  हम कह सकते है इस प्रोग्राम के वजह से दोनों टीम के संबंधों में मजबूती आई होगी ,
इसमें कुछ हमारे  रेमेडिअल बैच के लोग थे, वे लोग  सभी से मिल कर  आई-सक्षम को बेहतर तरीके से जान पाए होंगे, सोनम भारती शबनम और वे सभीलोग जिन्हों ने कार्यक्रम में भाग लिया तथा मंच पर चढ़ कर कुछ बोल पाई हम ये कह सकते है उस दिन के बाद से उनका आत्मविश्वाश बढ़ा होगा , सोनम भारती , तानिया ,  शबनम ये सब ऐसा नाम है! जब हमलोग  फेलोशिप की शुरुआत कर रहे थे, तो इनके अभिभावक को समझाने  नको चने चबाना पड़ा,  अंग्रेजी एक एक वाक्य first connect  then convince   हमलोग को जो दिक्कत आ रही थी वो यही वजह थी, की हमलोग उनके परिवार से अच्छे से सम्बन्ध स्थापित नही कर पाए थे, जिस कारन उसे  हमारी बातों को समझने में उसे कठिनाई हो रही थी, और ये ज़िन्दगी का अनुभव भी है, आप चाहे कितनी भी अच्छी बात क्यों ना समझाए आगर आप से उनका संबंध अच्छा नही है, वो आप की बात  नही मानेगा,
 आज वही लोग कुछ कर के दिखाते है, या अपनी सोंच को लिख या बोल कर अभिव्यक्त  कर पाते है,  जो पहले अपनी  अत्म्विश्याश की कमी के वजह से उसे लज्जा की घूंट समझ कर पी  लिया करती थी, हम कह सकते है की धीरे –धीरे ही सही परिवर्तन आ रहा है, मै अपनी बातों को इकबाल की इस शायरी से ख़त्म करना चाहूँगा !
                      मंजिल से आगे बढाकर मंजिल तलाश कर ,
                    मिल जाय तुझको दरया तो समंदर तलाश कर !

(Kaifee is a member of i-Saksham team)

Tuesday, November 27, 2018

क्या मैं भी?


एक भीड़, दौड़ते-खेलते उत्साह से भरे बच्चे जो हर गतिविधि में भाग लेने के लिए पूरे जोश से भरे है और अपनी बारी के इंतज़ार में लगे हैं |

 स्कूल के हर थोड़ी दूर पर बनी अलग-अलग गतिविधि के काउंटर पर अपना रजिस्ट्रेशन कराने के लिए लाइन में खड़े बाल उत्सव का आनंद ले रहे |

उस भीड़ में एक बच्ची सामने आकर बोलती है “भैया, हम भी भाग लेंगे”, मैंने पूछा “किसमें भाग लोगे?” तब तक पास खड़े एक बच्चे ने कहा “सर ई पागल है, आप जाइये” मुझे लगा ये मजाक कर रहा है या इसे चिढ़ा रहा है “मैंने फिर उससे पूछा “बोलो किस्में भाग लोगे?” फिर उस बच्चे ने बोला “सर इसका दिमाग ख़राब है, इसको रहने दीजिये” मुझे थोडा गुस्सा सा आया “मैंने उससे कहा, तुम ठीक हो ना-जाओ अपने काउंटर पर जाओ” | फिर जब मैंने उससे अलग-अलग गतिविधि के बारे में पूछा तो उसने चित्रकारिता में भाग लेने में अपनी रूचि दिखाई, उसे उस रूम में ले गया जिसमें चित्रकारिता हो रही थी | जब मैंने शिक्षिका से उसका नाम लिखने को कहा, वहां भी उपस्थित 4-5 बच्चे एक साथ उसे पागल-पागल कहने लगे और मुझे सलाह देने लगे की “सर ई तो पागल है इसका दिमाग ख़राब है- ये नहीं बना पायेगी इसको नहीं आता है|” मुझे बहुत गुस्सा आया मैंने सब को शांत रहने को और अपना पेंटिंग पर ध्यान देने को कहा | फिर उसे पेंटिंग बनाने के सारे-साधन दिए और मैं वहां से अपने गतिविधि के काउंटर पर चला आया|


मुझे आश्चर्य तो तब हुआ जब प्रदर्शनी के समय सब बच्चे अपना-अपना चित्र दिखा रहे थे मैं भी देख रहा था और जो बच्चे उसे पागल और न जाने क्या-क्या कह रहे थे उन सबसे उस बच्चे की पेंटिंग अच्छी दिख रही थी (तुलना एक सोच मात्र का था) और वहां पर भी उसके पेंटिंग को देख वे बच्चे हंस रहे थे |

इस पूरे दृश्य ने मुझे बहुत सोचने पर मजबूर किया, बच्चे जो आगे चल कर समाज की एक मजबूत कड़ी बनते है उनमें ये कैसी भावना जागृत हो रही है, कैसे समाज में सहभागिता की सोच को विकसित किया जायगा, कैसे हम बच्चों में फर्क न कर सभी के अन्दर की प्रतिभा को सराहा जा सकेगा | इसमें कोई शक नहीं की हर बच्चे के अन्दर अपनी एक अलग प्रतिभा है जिसे बस मौका देने की जरुरत है उसकी भागिता को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है |

पंचायत सरारी गाँव में “i -Saksham द्वारा कराये जा रहे  बाल उत्सव के अनुभव पर आधारित


अमन प्रताप सिंह
सदस्य I-Saksham