Friday, May 19, 2017

गिनती माला से गणित की शुरुआत


By- Amar Kumar
आज मैं बहुत उत्साहित था क्योंकि caMAL टेस्ट के जरिये बच्चों के शैक्षिणिक स्तर को जानने के बाद आज मैं अपने दो दोस्तों एकता और अमन के साथ कस्तूरबा गांधी विद्यालय में बच्चो को एक नए प्रयोग के साथ गणित पढ़ाने के लिए जाने वाला था I मैं और एकता, 3 बजे दोपहर विद्यालय पहुँच गयें | अमन भी हमारे पहुँचने के 5 मिनट बाद विद्यालय पहुँच गए | दोपहर का समय था, सभी बच्चियां अपने कमरे में आराम कर रहीं थी I हमारे पहुँचने के 10 मिनट के अन्दर सभी बच्चियां कक्षा में आ गयीं और सभी ने एक साथ “Good Afternoon” कहते हुए हमारा अभिनंदन किया I
सबसे पहले मैंने बच्चियों को पहले से बनी हुई गिनती माला दिखाया | सभी बच्चियां इसे देखकर बहुत खुश हुई और बोला “भैया ये तो माला है |” फिर मैं बोला “बिल्कुल ठीक कहा, ये मोतियों की माला ही है | इसे हम गिनती माला भी कहते हैं और आज हमलोग इसी गिनती माला की मदद से गणित में कुछ मजेदार सीखेंगे I और सबसे अच्छी बात यह है की आप सभी अपने लिए अपनी गिनती माला स्वयं बनायेंगे |"
तभी सभी बच्चियों ने आश्चर्य के साथ देखते हुए कहा “हम कैसे गिनती माला बनायेगे? हमें तो नहीं आता” I फिर हमने बच्चियों से 5 मिनट मांगते हुए सब बताने और दिखाने की बात कही | सभी बच्चियां खुश थीं, क्योंकि उन्हें लग रहा था की आज वे सब कुछ नया करने वालीं हैं |
अपनी कक्षा को आगे बढ़ाते हुए मैंने सभी बच्चियों को 6 की संख्या में बाँटा और उनका एक ग्रुप बना दिया | इस तरह हमारे पास 12 ग्रुप बनकर तैयार हो गया | सभी ग्रुप को हमने 1 नायलोन की रस्सी का टुकड़ा और दो रंगों की 100 से अधिक मोतियाँ दी |
फिर मैंने सभी को पहले से बना हुआ गिनती माला दिखाया और बताया की आप सभी को भी इसी प्रकार का गिनती माला बनाना है | माला की ओर दिखाते हुए हमने माला की एक जैसे रंग की मोतोयों को गिना और उन्हें समझाया की कैसे एक जैसे रंग की मोतियों को 10-10 की संख्या में सजाया गया है | आप सभी को समूह में ठीक इसी तरह से 10 मोतियाँ जो एक रंग की हो उन्हें गिनते हुए माला में पिरोना और अपने लिए एक गिनती माला बनानी है | सभी सभी बच्चियां उत्साहित होकर समूह में इस कार्य पर लग गयीं |  
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गिनती माला पर अभ्यास करती बच्चियां
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एक दूसरे को अभ्यास करते देख सीखती बच्चियां
 

माला बनते वक्त हमने देखा की हर ग्रुप में 2-3 बच्चियां सक्रिय रूप से भाग ले रही थी और बांकी की बच्चियां माला बनाने में उनकी सहायता कर रहीं थीं | जैसे हर ग्रुप में 2 बच्चियां रस्सी के दोनों छोर को पकड़ी हुए थी और उनसे अपने साथियों के द्वारा गिने हुए मोतियों को पिरोने का काम कर रहीं थी, और बांकी की बच्चियां एक रंग की मोतियों को इकठ्ठा करने में, उन्हें 5 या 10 के समूह में अलग करने में अपने साथियों की मदद कर रहीं थी | 2-3 ग्रुप में एक-दो ऐसी भी बच्चियां थी जिन्होंने अपने साथियों की मदद नहीं की | इसका कारण ये भी हो सकता है कि यह क्रियाकलाप करने में इतने लोगो की आवश्यकता नहीं पड़ी या उन्हें समझ में नहीं आ रहा हो की वे अपने ग्रुप की मदद कैसे करें या इनमे से कुछ बच्चियां ऐसी थी जिन्हें गिनती नहीं आती थी | कारण जो भी हो, इसमें अच्छी बात यह दिखी की जिन बच्चियों को ठीक से गिनना नहीं आ रहा था वे भी मोतियों को 5-5 के समूह में गिनकर अपने साथियों की मदद कर रहीं थीं |
10 से 15 मिनट के अन्दर सभी ग्रुप के पास 100 मोतियों वाली एक माला बनकर तैयार हो गयी | अपने द्वारा बनाये गए माले को देख कर उनकी ख़ुशी का ठिकाना न था | कभी वे माला अपने गले में डालती तो कभी अपने दोस्तों के गले में | उनकी माला उनके घुटनों तक लटक रही थी | फिर उन्होंने एकता को बुलाया और उनके गले में माला पहनते हुए अपनी ख़ुशी जाहिर की | यह नजारा देख कर मुझे भी बहुत ख़ुशी का अनुभव हो रहा था I
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अपने समूह की मदद से तैयार माला दिखाती हुई बच्चियां

माला के बन जाने के बाद मैंने अनुभव किया की बच्चियां अभी उर्जावान हैं क्यों न पिछली कक्षा में दिए गए गृहकार्य की जाँच कर लिया जाये | मैंने बच्चियों से पूछा की जिन्होंने अपना गृहकार्य पूरा कर लिया है वे अपना हाथ उठाए | 18 बच्चियों को छोड़कर सभी ने हाथ उठाया |  जब मैंने बच्चियों से गृहकार्य न करने का कारण पूछा तो उनमे से 12 बच्चियों ने बताया था कि वे बच्चियां पिछली वर्ग में शामिल नहीं थी | इनमे से कुछ बच्चियां घर चली गयीं थी तो कुछ का नया नामकरण हुआ था | शेष 6 बच्चियों में से 2 ने बताया की उनका कॉपी नहीं मिला और 4 बच्चियों ने बताया कि पिछली कक्षा में जो पढ़ाया गया था उन्हें समझ में नहीं आया था I मैंने कहा, “मै आपलोगों को फिर से बताऊंगा घबराने की कोई बात नहीं है I” गृहकार्य की जाँच करने के लिए मैंने सभी ग्रुप से कहा की हर ग्रुप से कोई एक बच्ची उठे और अपने ग्रुप की सभी बच्चियों का कॉपी जमा कर ले I सभी ग्रुप की बच्चियों ने ऐसा ही किया | कॉपी जमा हो जाने के बाद मैंने उनसे कहा कि वे सभी कॉपी को अपने बगल के ग्रुप के साथ बदल लें | फिर मैंने सभी गृह कार्य(छोटी और बड़ी संख्या की पहचान) के प्रश्नों का हल को बोर्ड पर बनाकर दिखाया बच्चियों से कहा की वे उत्तर देखकर सही गलत कर दें | इसी बीच एक सवाल जिसमे मैंने गलती से गलत चिन्ह का प्रयोग किया था उसपर एक बच्ची जिसका नाम प्रिया है खड़ी होकर बोली “भैया ये सवाल आप ने तो गलत बना दिया है I” यह देख मुझे काफी ख़ुशी हुई I मैंने यह महसूस किया की बच्चियों का धीरे-धीरे अब गणित में समझ बन रहा है, क्योंकि जब मैंने बच्चियों का पहला गणित का टेस्ट लिया था तो मैंने यह पाया की गणित में इनकी समझ थोड़ी कम थी I आज प्रिया को आत्मविश्वास के साथ बोलते हुए मुझे लग रहा था की सफलता मिलनी ही है |
फिर मैंने बच्चियों से बात की कि कितनों ने कितना प्रश्न सही किया है तो मैंने पाया कि लगभग सभी बच्चियों ने अपना गृहकार्य सही बनाया था I गृह कार्य समाप्त करने के बाद मैंने बच्चियों से कहा की भैया या दीदी आप को कोई अंक या संख्या बोलेगे/बोलेगी I  आपको गिनती माला में उतनी मोतियों को गिन कर दिखाना है और साथ ही साथ उस संख्या को कार्ड की सहायता से दर्शाना है जिसमे अंक अंकित हैं I हमलोग ये भी देखेगे की कौन-सा ग्रुप  पहले करता है और कौन अंत में I सारे बच्चो में इस नई प्रतिस्पर्धा के लिये ख़ुशी की लहर दौड़ गई | सभी बच्चियां अच्छा ठीक है कहते हुए तैयार हो गयीं I
अमन आगे आये और बच्चियों को बारी-बारी से 1 से लेकर 100 तक की अलग-अलग अंक एवं संख्या बोलने लगे और बच्चियां बहुत तेजी से संख्या के बराबर मोतियाँ गिनकर और साथ में कार्ड सही क्रम में सजा कर दिखने लगीं | हमने आपस में एक नियम बनाया की एक ग्रुप में एक बच्ची को एक बार ऐसा करना है ताकि सभी बच्चियों को करने का मौका मिल सके I इस तरह जैसा हमारा अंक या संख्या बदलता वैसे ही समूह की बच्चियां बादल जाती जो मोती या कार्ड की सहायता से उस अंक या संख्या को दर्शाती थीं | इस प्रकार के अभ्यास में मैंने पाया की जीत की होर में बच्चियां अपने ग्रुप की लड़की को धीरे से कार्य करते देख खुद को रोक नहीं पाती थीं और उनके बदले वे ही गिनती करके उनके हाथ में दे कर दिखने बोलती थीं | हमारे मना करते हुए समझने पर की दूसरों को भी मौका दें, उन्होंने बहुत हद तक खुद को रोका पर जल्दबाजी साफ दिख रही थी |
मोती के माध्यम से मैंने इसी तरह बच्चियों को पहाड़ा दर्शाने के लिये कहा I सभी ग्रुप की बच्चियों ने 1-10 तक में आने वाले एक संख्या को चुना और गिनती माला एवं कार्ड की मदद से पहाड़ा दर्शाया I यहाँ मुझे और बच्चियों को थोड़ी परेशानी हुई, क्योंकि हमारे पास धागा और कार्ड को जोड़ने के लिए पिन कम पड़ गये थे इसलिये 2-3 ग्रुप को मिलकर एक ग्रुप बनाना पड़ा जिससे ग्रुप में सदस्य की संख्या अधिक बढ़ गयी I   
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पहाड़ा दर्शाती हुयीं बच्चियां
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संख्या दर्शाती हुयीं बच्चियां
गर्मी अधिक होने के कारण कुछ बच्चियाँ पानी पीने का आदेश मांगने लगी और मुझे भी काफी प्यास लग रही थी  इसलिये हमने 10 मिनट का ब्रेक लेने का निश्चय किया ताकि पानी पी लिया जाये I  
पानी पीने के बाद मैंने बच्चियों को गणित माला की मदद से पूर्व की भांति जोड़ और घटाव करवाया I सभी बच्चियां गिनती  माला की मदद से जोड़ और घटाव आसानी से कर पा रही थीं I
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जोड़ एवं घटाव पर अभ्यास करती हुयीं बच्चियां

हमने घड़ी की तरफ देखा 6 बजने वाला था और मै काफी थक गया था लेकिन बच्चो का उत्साह में कोई कमी नहीं दिख रही जिस कारण मै भी अपनी थकान भूल गया और बच्चियों से वापस आने का वादा किया I
क्योंकि अमन कस्तूरबा गाँधी विद्यालय पहली बार गए थे इसलिए बच्चियों ने अमन का परिचय अंग्रेजी में पूछा I उन्होंने मुझसे भी एक दो सवाल अंग्रेजी में किया | यह सब देखकर मुझे काफी ख़ुशी महसूस हो रही थी | हमारे परिचय के बाद अब बच्चियों ने पिछली कक्षा में सीखे हुए हिंदी कविता “लकड़ी की काठी” को action के साथ गाकर सुनाया | सभी के चेहरे पर मुस्कान थी I सभी बच्चियां हमलोगों को Bye Bye शब्द  बोलते हुये दरवाजे तक छोड़ने के लिये आई I इस प्रकार आज का दिन कस्तूरबा गाँधी में बहुत ही उम्दा रहा I
 

Sunday, January 8, 2017

कक्षा से नये शब्दों की शुरुआत

                                                   कक्षा से नये शब्दों की शुरुआत 
 by Ekta
हम सभी अपने आसपास की चीजों को निरंतर देखते रहते हैं, बहुत कुछ सीखते हैं | जैसे:- कोई प्रकृति प्रेमी कभी अकेला नहीं होता, वो प्रकृति से ही प्रभावित होता है और उसी से प्रोत्साहित भी | बस देखने का नजरिया है कि कौन कहाँ से, कैसे सीख रहा है |
अगर हम अपने पाठ्य पुस्तक पर गौर करें तो उसका निर्माण भी कुछ इसी तरह है | हमारी पुस्तकें भी हमारे आसपास के ज्ञान का सार है |
मैंने भी मेरी कक्षा का अगला चरण इसी को ध्यान में रखते हुए शुरू किया | मैंने कक्षा में मौजूद 11  वस्तुओं का अंग्रेजी नाम बच्चियों से बात करते-करते कागज के टुकड़ों में लिखना शुरू कर दिया | हमारे बातचीत के केंद्र बिंदु भी यही वस्तुएं थें | इस दौरान मैंने बच्चों से कुछ सवाल किये| जैसे- अच्छा बताओ इस कक्षा में क्या-क्या दिखाई दे रहा है? जवाब आया कुर्सी, बोर्ड, मार्कर, पेन, कॉपी, बुक, फेन, शांति का कपड़ा, खिड़की आदि | फिर मैंने पूछा क्या किसी को इस रूम में दरवाजा दिख रहा है क्या? सभी ने बोला हाँ दीदी! दरवाजा भी है | फिर मैंने पूछा अच्छा बताओ दरवाजे को अंग्रेजी में क्या बोलते है? जिसको पता हो बस वो अपना हाथ उठाए | मैंने देखा 35 लड़कियों में मात्र 2 ने अपना हाथ खड़ा किया | जब मैंने एक से बोलने को कहा तो बोली दीदी ठीक से याद तो नहीं है D से शब्द शुरू होता है शायद | दूसरे ने “दूर-दूर” कहा | फिर मैंने कहा आज हमलोग इन्ही सब का अंग्रेजी नाम सीखेंगे |
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मैंने कक्षा आरंभ की और पुर्जे में मौजूद सबसे छोटा शब्द pen निकला और बच्चों को दिखाया | केवल 5 बच्चिओं को छोड़कर बाकि सब ने इसको देखते ही इस शब्द से परिचित होने के समर्थन में हाथ उठाया| फिर मैंने सीमा से पूछा बताओ ये क्या लिखा है? सीमा ने इसका उच्चारण सही-सही किया | फिर मैंने इससे मिलता-जुलता शब्द fan उठाया और सभी को दिखाया | फिर उन 5 बच्चियों ने अपना हाथ नहीं उठाया | इस बार मैंने बरती से इसका उच्चारण करने बोला | उसने इसका उच्चारण ठीक-ठीक किया मगर इस शब्द के पहले फ अक्षर पर विशेष जोड़ दिया इससे इस शब्द की सुन्दरता थोड़ी फीकी पर गयी | फिर मैंने रानी से इसका उच्चारण करने को बोला और उसने सही-सही उच्चारण किया | फिर बरती ने रानी के साथ इसका उच्चारण करने का अभ्यास किया | इस बीच सभी बच्चियां रानी के साथ धीमे स्वर में इसके उच्चारण का अभ्यास कर रहीं थीं | फिर धीरे-धीरे हमारा अभ्यास बढ़ता चला गया, शब्द से परिचित होने के सन्दर्भ में उठने वाले हाथों की संख्या घटती चली गयी | उन 5 बच्चियों ने आखरी तक अपना हाथ नहीं ही उठाया | इसका मुख्य कारण ये था कि इन्हें अक्षर जोड़कर शब्द बनाने अभी कठिनाई महसूस होती है | फिर एक शब्द ऐसा आया जिसमे किसी ने हाथ नहीं उठाया | वो शब्द था chalk | फिर जब मैंने बताया ये चाक लिखा हुआ है तो उनमे से किसी ने कोई सवाल नहीं किया और मान लिया की ये चाक लिखा हुआ है | फिर मैंने ही पूछा लेकिन ये चाक कैसे हो सकता है इसमें तो L लिखा हुआ है इसको हमलोग पढ़ ही नहीं रहे है| सभी ने फिर आश्चर्य से मेरी ओर देखा | मैंने कोई जवाब नहीं दिया और बोर्ड पर walk लिख दिया जिसे काजल और रानी ने सही-सही पढ़ लिया | फिर मैंने talk लिखा | जिसे लगभग सभी ने पढ़ लिया | दो शब्द और भी बाकि थे इस लिए मैंने ज्यादा उदाहरण नहीं दिया और बोला इन शब्दों में हम बोलते समय L का उच्चारण नहीं करते, पर लिखते जरुर हैं | अंग्रेजी भाषा में कुछ शब्दों की संरचना इसी प्रकार की गयी है | अगला शब्द था teacher | इसमें 15 लड़कियों ने हाथ उठाया | मैंने इस बार उनमे से किसी को बोलने के लिए नहीं कहा | इस बार मैंने बुधनी को बोलने को कहा जिसने अपना हाथ नहीं उठाया था | बुधनी ने कहा “दीदी हम अपना हाथ नहीं उठाए थे |” फिर मैंने कहा मुझे मालूम है की तुमने अपना हाथ नहीं उठाया था पर मुझे यकीन है की तुम इसको पढ़ सकती हो | उसने अक्षरों को पढ़ना शुरू किया और मन में जोड़ते-जोड़ते उसने टीचर बोला | इससे उसे भी बड़ी ख़ुशी महसूस हुई | उस समय उसकी ख़ुशी में आत्मविश्वास झलक रहा था जिसे उसने वहीँ और बाकी लोगो ने अगली कक्षा में महसूस किया | अंततः ये शब्द सभी के हाथों तक गये और अभी ने इसको दिखाकर इसका उच्चारण किया |
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समूह कार्य: सभी लड्कियों को 5-6 के समूह में बाँटा गया| इस समूह में सभी लड़कियां बारी-बारी से सभी अंग्रेजी के शब्द दोहरा रही थी जिसे उन्होंने आज सीखा था | इन शब्दों से समूह के सभी सदस्यों ने अपने-अपने समूह के लिए 2-2 वाक्य बनायें और पूरी कक्षा में सुनाएँ | इस अभ्यास को करने का मुख्य उद्देश्य यह था कि सभी लड़कियां इन शब्दों को अधिक से अधिक सुन सके और उनको सुनते-सुनते याद हो जाये |  
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उस दिन मैंने बस इन शब्दों को बार-बार बच्चों को दिखाया, बुलवाया, शब्द के साथ चित्र बनाया और बच्चों से भी बनवाया |
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कक्षा के अंत में सभी समूहों से अपने समूह की ही लड्कियों के साथ इस कार्य को दोहराने के लिए कहा गया और बताया गया कि अगले दिन यही लोग आपके समूह के सदस्य होंगे | अतः सभी लोग अपने समूह के सभी लोग पर ध्यान देंगे |
अगले दिन कक्षा के प्रारंभ में ही मैंने सभी लड़कियों को पांच-पांच के समूह में बाँट दिया, जिसमे उन सभी को अपनी यादास्त से पिछली कक्षा में सीखे गए हुए अंग्रेजी शब्द को अपनी-अपनी कॉपी में लिखना था, जिसमे कोई किसी की मदद नहीं कर सकते | यह वही समूह था जो पिछली कक्षा में बनाया गया था | 5 मिनट के बाद सभी समूह से आवाज आने लगा दीदी हमारा हो गया | इस अभ्यास में एक समूह को दुसरे समूह के हर लड़की की कॉपी आपस में बाँट कर जाँच करनी थी और उन्हें नंबर देना था| इस अभ्यास में सभी लड़कियां एक-दुसरे की कॉपी जाँच कर रही थी | जिस लड़की को जाँच करने में समस्या हो रही थी वह अपने समूह के दूसरी लड़की की मदद ले रही थी |
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परिणाम: अंत में सभी को उनकी कॉपी वापस की गयी और जिसमे 2 लड़कियों ने बोला “दीदी मैंने सही लिखा था उसने गलत कर दिया |” जब मैंने कॉपी देखा तो पाया एक ने साफ-साफ नहीं लिखा था इसलिए जांचकर्ता ने उसके नंबर काट लिए और दूसरी कॉपी में दो सही शब्दों को वाकई गलत कर दिया गया था | इस जांचकर्ता ने मान लिया की दीदी मैंने कल अभ्यास नहीं किया था | मुझे शब्द लिखना नहीं आता | इसके साथ-साथ ये भी पता चला की कल लगातार हाथ न उठाने वाली 5 बच्चियों में से 2 ने अपना काम पूरा कर लिया है, उन्हें इन 11 शब्दों को लिखने में कोई परेशानी नहीं है | और बांकी के 3 लोगों ने भी अपना पन्ना खाली नहीं छोड़ा बल्कि 1-2 शब्द तो लिख ही दिया था |
दूसरे अभ्यास में मैंने प्रत्येक समूह से ऐसी दो लड़कियों का चुनाव किया जिन्होंने पिछली सभी क्रियाकलाप में बहुत कम हिस्सा लिया | बारी-बारी से प्रत्येक समूह से दो लड़कियां उठ रही थीं और सामने आ रहीं थी | इसमें एक ऐसी लड़की जो लिख सकती थी उसे मैंने बोर्ड पर लिखने के लिए आमंत्रित किया और दूसरी जो गलत ही सही पर शब्दों को देखकर पढ़ सकती थी उन्हें बोर्ड से थोड़ी दूर कार्ड उठाकर बोलने के लिए बुलाया | इस अभ्यास में दूसरी लड़की को बारी-बारी से कार्ड उठाकर शब्द बोलना था और उसके साथी को लिखना था |
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परिणाम: इस अभ्यास के दौरान जब पहले समूह से पूछा गया की लिखने के लिए कौन आना चाहता है तो बुधनी ने झट से हाथ खड़ा किया और बोला “ दीदी मैं लिखना चाहती हूँ ”| बुधनी ने पहली बार किसी चीज में इतनी उत्सुकता दिखाई थी जिसे देखकर हम सभी दंग रह गए और मुझे बहुत ख़ुशी महसूस हुई | बुधनी बोर्ड पर लिखने आयी | जैसे उसकी साथी शब्द बोलती वो बिना रुके लिख देती | उसकी साथी को window पढने में दिक्कत हो रही थी पर उसने सुना और समझ बनाया की यह window बोलना चाह रही है |
दूसरे समूह से पढने वाली बच्ची को 1-2 शब्दों को पढने में दिक्कत महसूस हो रही थी पर उसने अपनी साथी का पूर्ण सहयोग किया | लिखने वाली बच्ची अगर लिखने में रुक जाती तो वो उसे अपनी ओर देखने के लिए बोलती |
तीसरे समूह में पढने वाले को भी थोड़ी दिक्कत महसूस हो रही थी और लिखने वाले को भी |शायद वो बोर्ड पर आकर घबरा गयी थी | उसके सहयोगी के द्वारा शब्द दिखाये जाने के बावजूद वो शब्दों को  गलत लिख रही थी पर उसके साथी ने उसका खूब साथ दिया और अधिकांश शब्द सही लिखवायें|
चौथे समूह में लिखने और पढने वाली दोनों ही लड़कियों ने अपना काम जल्दी-जल्दी कर लिया | एक शब्द को देखकर बोलती चली गई और दूसरी बिना पीछे देखे लिखते चली गई |
मैंने कक्षा को फिर से समूह अभ्यास में बाँट दिया जिसमे सभी को अपने सामने वाले को उस वस्तु की ओर इशारा करके उसका अंग्रेजी में नाम पूछना था | 2 लड़कियों को छोड़कर सभी ने इस अभ्यास का  पूरा आनंद लिया | जैसे मानो वो आपस में खेल रही हों |
मैंने कक्षा को यहीं रोका और अगले दिन के लिए सभी को अपनी-अपनी तैयारी खुद से करने को कहा |
अगले दिन जब मैं गयी तो मैंने बारी-बारी से 6-8 लड्कियों को बुलाया और बोर्ड पर उन्ही शब्दों को लिखने को कहा | जब एक लड़की लिख लेती थी तो 3-4 लड़कियां इसको चेक करने आती थी की इसने सही लिखा है या गलत | इस प्रक्रिया में सभी लड़कियां बारी-बारी से बोर्ड पर आयी |
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परिणाम: यह अभ्यास मेरे लिए बहुत उपयोगी सिद्ध हुआ | मैंने कम समय में सभी लड़कियों को जान लिया कि किसे कहाँ दिक्कत हो रही है, कैसी दिक्कत हो रही है, किसने अच्छा प्रयास किया और किसने प्रयास करने में कमी की | उन दो लड़कियां जिन्होंने अपना हाथ शुरू से नहीं उठाया अंततः उन्होंने भी 6-7 शब्द बोलना सीख ही लिया चाहे वे न लिख पायें |