"हस्ताक्षर नहीं आता तो लोन नहीं मिलेगा।"
CRO के मुँह से यह सुनते ही रानी देवी के पाँव जहाँ थे, वहीं रुक गए। सिर पर बेटी की शादी की ज़िम्मेदारी थी। हाथ में पैसे नहीं थे। और अब यह।
मेरा नाम गुड़िया है। मैं मुजफ्फरपुर के राजवाड़ा गाँव की रहने वाली हूँ और बैच-12 की एडू-लीडर हूँ। उस दिन मैं उसी महिला समूह की बैठक में थी जब रानी देवी लोन लेने आई थीं। CRO सर ने आगे कहा - "अगर आपको हस्ताक्षर करना नहीं आता, तो हम लोन नहीं दे सकते। बैंक भी पैसे नहीं देगा।"
रानी देवी 38 साल की हैं। बेटी की शादी तय हो चुकी थी। पैसों की तंगी और समाज का दबाव - इन दोनों के बीच उन्होंने लोन का रास्ता चुना था। और अब यह रास्ता भी बंद लग रहा था।
मुझसे रहा नहीं गया।
मैंने CRO सर से पूछा - "सर, क्या अगले हफ्ते इनका लोन पास हो सकता है?"
उन्होंने कहा - "हाँ, जब तैयार हों तब हो सकता है।"
मैं रानी देवी के पास गई और बोली - "चाची, मैं आपको हस्ताक्षर करना सिखाऊँगी।"
उन्होंने झट से कहा - "बेटा, अगर तुम सिखा दोगी तो जितना कहोगी उतने पैसे दूँगी।"
मैंने कहा - "मुझे पैसे नहीं चाहिए। बस आप सीख जाइए।"
अगले दिन से शुरुआत हुई।
पहले एक-एक अक्षर। फिर धीरे-धीरे पूरा नाम। रानी देवी रोज़ अभ्यास करतीं। हाथ काँपता था, अक्षर टेढ़े-मेढ़े बनते थे। लेकिन वो रुकती नहीं थीं।
चार-पाँच दिनों की मेहनत के बाद वो अपना नाम लिख पाईं।
जिस दिन उन्होंने पहली बार खुद अपने दम पर कागज़ पर नाम लिखा, उनके चेहरे पर जो था उसे मैं शब्दों में नहीं रख सकती। उन्होंने बस इतना कहा - "अब मुझे लोन मिल जाएगा। मेरी बेटी की शादी अच्छे से होगी।"
अगली बैठक में लोन पास हो गया।
लेखिका परिचय
नाम: गुड़िया कुमारी
परिचय: रजवाड़ा गाँव, मशहरी, मुजफ्फरपुर की रहने वाली हैं। i-Saksham बैच-12 की एडू-लीडर हैं।
लक्ष्य: शिक्षा के ज़रिये समुदाय में बदलाव लाना।
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