Friday, September 4, 2026

"पढ़ाई करके क्या करेगी?"

 "पढ़ाई करके क्या करेगी?"

"दीदी, मम्मी बोलती हैं कि पढ़ाई करके क्या करेगी? आखिर में तो घर का काम, चूल्हा-बर्तन ही करना है।"

किरण ने यह बात बहुत सामान्य तरीके से कही थी। लेकिन उसके चेहरे की उदासी बता रही थी कि वह खुद ऐसा नहीं सोचती।

मेरा नाम सोनम है। मैं जमुई जिले के कश्मीर गाँव की रहने वाली हूँ और i-Saksham में Buddy की भूमिका में कार्यरत हूँ। किरण से मेरी पहली मुलाकात सेशन में हुई थी। वो कम बोलती थी, लेकिन हर गतिविधि में ध्यान से हिस्सा लेती थी। जब दूसरे बच्चे अपने स्कूल के किस्से सुनाते, तो वो चुपचाप सुनती रहती।

आठवीं के बाद उसका नौवीं में नामांकन नहीं हुआ था। करीब एक साल से वो घर पर थी। माँ के साथ खेत जाती, जंगल से लकड़ी लाती, छोटे भाई-बहनों की देखभाल करती। फिर भी हमारे सेशन में नियमित आती थी। जब भी स्कूल की बात होती, वो बस इतना कहती - "मैं तो पढ़ना चाहती हूँ दीदी, लेकिन मम्मी नहीं मानतीं।"

एक दिन बहुत धीरे से उसने कहा - "दीदी, मुझे भी ड्रेस पहनकर स्कूल जाना है। बाकी लड़कियों को देखकर मन करता है।"


होम विज़िट के दौरान जब मैं उसकी माँ से मिली, तो उन्होंने बिना झिझक कहा - "हमारे यहाँ लड़कियाँ ज़्यादा नहीं पढ़तीं। आठवीं तक पढ़ ली, वही बहुत है। उसके बाद तो घर का काम सीखना होता है। आखिर में घर ही संभालना है।"

उस दिन मैंने उन्हें समझाने की कोशिश नहीं की।

बस उनकी बात सुनी।

और जाती रही। हर बार। कभी किरण की पढ़ाई की बात होती, कभी घर-परिवार की। कई बार बातचीत जल्दी खत्म हो जाती। लेकिन धीरे-धीरे हमारे बीच कुछ बनने लगा था।


फिर एक दिन मदर मीटिंग में सबसे हस्ताक्षर करवाए जा रहे थे।

किरण की माँ ने कहा - "हमें तो साइन करना भी नहीं आता।"

मैंने उनसे बस इतना कहा - "आंटी, आज आपको साइन न कर पाने की कमी महसूस हो रही है। अगर किरण की पढ़ाई भी यहीं रुक गई, तो आगे चलकर उसे भी यही महसूस हो।"

उस समय उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

अगले दिन जब मैं सेशन लेने पहुँची, तो उन्होंने खुद मुझे दूर से बुलाया और पूछा - "नौवीं में एडमिशन के लिए क्या-क्या लगेगा?"

मैंने पूरी प्रक्रिया समझाई। उन्होंने बताया कि इन सब चीजों की जानकारी ही नहीं थी।

कुछ दिनों बाद किरण का नौवीं कक्षा में नामांकन हो गया।


आज किरण नियमित स्कूल जाती है। ट्यूशन भी जाती है। जब भी मिलती है, उसके चेहरे पर पहले जैसी झिझक नहीं होती।

और वही माँ, जिन्होंने कहा था - "पढ़ाई करके क्या करेगी?" - उन्होंने खुद आकर नामांकन का रास्ता पूछा था।


लेखिका परिचय

नाम: सोनम कुमारी
परिचय: कश्मीर गाँव, जमुई जिले की रहने वाली हैं। i-Saksham बैच-9 की एडू-लीडर रह चुकी हैं और वर्तमान में Buddy की भूमिका में कार्यरत हैं।
i-Saksham से जुड़ाव: बैच-9
लक्ष्य: शिक्षक बनना। वर्तमान में B.Sc. Geology Honours की पढ़ाई कर रही हैं।