Friday, January 23, 2026

आइसक्रीम और सजावट: माँ का दुगना संघर्ष

 “मेरी बेटी और बेटे के जो सपने हैं, उन्हें पूरा करने के लिए मैं पूरी कोशिश करूँगी।”

यह संकल्प गुड़िया दीदी की मम्मी का है। मेरा नाम राखी कुमारी है और मैं गुड़िया दीदी (जो बैच 12 की एडू-लीडर हैं) की कहानी बता रही हूँ। उनके पापा के न रहने के कारण, घर की सारी ज़िम्मेदारी उनकी माँ के कंधों पर आ गई थी, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। 

उनके परिवार में लड़के और लड़की, दोनों को पढ़ाई का बराबर अधिकार दिया जाता है। एक समय ऐसा भी आया जब आर्थिक कारणों से गुड़िया के भाई की पढ़ाई 1–2 साल के लिए रुक गई थी। लेकिन माँ ने गुड़िया के साथ मिलकर ज़ोर दिया और भाई को दोबारा पढ़ाई के लिए प्रेरित किया।

गुड़िया घर के काम, पढ़ाई, होम विज़िट और इवेंट—सब कुछ संभालती है। इसकी सबसे बड़ी वजह है उनकी माँ का पूरा सहयोग।

एक बार गुड़िया बीमार थी, और एक ज़रूरी इवेंट होना था। उस समय माँ ने खुद ज़िम्मेदारी ली। उन्होंने किशोरियों के माता-पिता को बुलाया, उनसे बात की और खुद आगे आकर कार्यक्रम को आगे बढ़ाया, ताकि गुड़िया का काम रुके नहीं।

माँ ने घर की आर्थिक स्थिति संभालने के लिए भी असाधारण काम किए। उन्होंने कर्ज़ लेकर शादी के डेकोरेशन का छोटा-सा काम शुरू किया, जिससे गुड़िया का भाई आज उसे एक बिज़नेस के रूप में चला रहा है। इसके अलावा, वह सतघरवा स्कूल में रसोइया (खाना बनाने का काम) भी करती हैं और आइसक्रीम बेचने का छोटा व्यवसाय भी संभालती हैं।

उनकी माँ न सिर्फ़ गुड़िया की सुरक्षा को लेकर जागरूक हैं (अक्सर होम विज़िट के दौरान साथ जाती हैं), बल्कि वह दूसरे अभिभावकों से भी खुलकर बात करती हैं और उन्हें आसान भाषा में समझाती हैं कि यह काम किशोरियों के लिए क्यों ज़रूरी है।

गुड़िया दीदी की मम्मी सिर्फ़ एक माँ नहीं हैं; वह एक एक्टिव, मेहनती और प्रेरणादायक महिला हैं, जिन्होंने अपने बच्चों के सपनों के लिए हर मुश्किल का सामना किया है।


लेखिका परिचय:

  • नाम: राखी कुमारी

  • परिचय: राखी कुमारी गाँव बंगलवा (कठोर), ब्लॉक धरहरा, मुंगेर की रहने वाली हैं।

  • i-Saksham से जुड़ाव: वह वर्ष 2021 में i-Saksham के बैच-7 की एडू-लीडर रह चुकी हैं।

  • लक्ष्य: राखी का लक्ष्य सोशल सेक्टर में काम करना है।

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