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Tuesday, July 23, 2024

पर्यावरण का सन्देश- कविता

पर्यावरण का संदेश

हरी-भरी ये धरती प्यारी,

इसकी रक्षा है हमारी जिम्मेदारी।


नदियों का कल-कल बहना,

स्वच्छ हवा का महकना।


पेड़-पौधों की हरियाली,

जीवन में लाए खुशहाली।


जीव-जंतुओं का बसेरा,

सुरक्षित हो उनका घेरा।


प्रकृति हमें देती है,

सभी कुछ जो जीने के लिए है।


संभालें हम इसे मिलकर,

तभी बच पाएगा ये सुंदर।


प्रदूषण को दूर भगाएं,

स्वच्छता का दीप जलाएं।


संवेदनशील बनें पर्यावरण के लिए,

साथ चलें एक बेहतर भविष्य के लिए।


आओ मिलकर संकल्प लें,

धरती को स्वर्ग सा बनाए रखें।


पर्यावरण दिवस है याद दिलाता,

प्रकृति का सम्मान हमसे जोड़ता।


रश्मि 

बैच-9, मुंगेर 


समुदाय में महिलाओं की दिनचर्या को जाना

नमस्ते साथियों, 

मैं आप सभी के साथ अपने समुदाय (फरदा) में किए काम का अनुभव साझा कर रही हूँ। इस माह समुदाय को लेकर मेरा ये लक्ष्य था कि “समाज की महिलाओं से अलग जुड़ाव बना पाना”। 


हम सभी बच्चों के अभिभावकों से मिलते ही रहते हैं, मगर एक बात जो मैंने अनुभव की कि बच्चे और परिवार से हटकर भी महिलाओं की ‘अपनी जिंदगी’ भी होती है।

  

उनकी जिन्दगी को जानने के लिए मैं अपने गाँव की महिलाओं से मिलने गई थी। इसकी एक खास वजह यह भी थी कि सभी क्षेत्रों में से, एक क्षेत्र के लोग PTM में बहुत कम शामिल होते है। जिसका मुख्य कारण अभिभावक का खेतों में काम करना है। क्योंकि उनका यही रोजगार है, अगर अभिभावक यह नहीं करेंगे तो खायेंगे क्या? वे सुबह निकलते हैं और रात को लौटते हैं। जिसकी वजह से मैं भी उनसे कभी भी अच्छे से नहीं मिल पाती थी। 

पहले मुझे लगता था कि मैं तो रोज जा रही हूँ मिलने, उन्हीं की गलती है जो नहीं मिलते है!

फिर मैंने खुद को थोड़ा ध्यान देकर सोचने के लिए कहा कि हर बार ऐसा क्यों हो रहा है? 

 

यह सोचते समय, इस बार मैंने खुद के अंदर एक नया बदलाव देखा कि मैंने उनकी गलती न देखकर, उनकी मजबूरी को जाना। समझा और पाया कि यह उनकी दिनचर्या है जिसकी वजह से मैं उनसे नहीं मिल पाती थी। 

मैंने यहाँ खुद को ठीक किया और मैं कल कुल नौ महिलाओं से मिली। मैं अपनी खुशी की बताऊं तो सबसे अलग बात ये रही कि कल मैंने उनके बच्चे को लेकर कोई बात नहीं की। 


मैंने बस उनकी दिनचर्या को जाना। वो कब सबसे ज्यादा खुश थी, कब दुखी थी। मैंने जब उनसे ये सब बात उनके परिवार की सदस्य की तरह पूछा तो उनके चेहरे पर एक अलग ही खुशी थी। जिससे मुझे उनसे जुड़कर बहुत अच्छा महसूस हुआ। इस कार्य के दौरान एक नया पर्सपेक्टिव (perspective) भी मुझे चीजों को देखने समझने का मिला ।

                         

रश्मि  

बैच- 9, मुंगेर


Monday, May 13, 2024

घरवालों के साथ Voice and choice पर चर्चा और अमल

मैं अपने अन्दर हुए Voice & Choice के कारण आये बदलाव का एक अनुभव साझा कर रही हूँ। मुझे फ़ेलोशिप करते हुए डेढ़ वर्ष हो गया है और इस फ़ेलोशिप में मुझे मेरे अन्दर बहुत सारे बदलाव आते दिखें हैं। मेरे अन्दर बदलाव आ रहें हैं और मैं इन्हें पहचान पा रही हूँ यह भी एक बदलाव है। 

मैं कुछ दिन पहले मेरे और परिवार के बीच हुई बात का एक संक्षेप वर्णन आपके साथ साझा कर रही हूँ। पहले तो मैंने अपनी माँ से Voice & Choice पर बात की। और कुछ दिन लगातार इस पर बात करने से वो इस कांसेप्ट को भी समझ गयी। मेरे परिवार को किसी कारणवश बाहर जाना था और मेरी परीक्षा और सेशन भी उन्ही दिनों में प्रस्तावित था। मेरी माँ एक महीने से मुझसे बोल रही थी कि तुम भी चलना साथ। तुम्हें यहाँ अकेले नहीं छोड़ कर जा सकते।

मैंने भी लगभग एक महीने तक अपनी माँ और 3-Cs की सहायता से ये बताने की पूरी कोशिश की कि मेरे लिए परीक्षा और सेशन ज्यादा महत्वपूर्ण है। 

पढ़ने में यह बात सरल लग रही हो सकती है परन्तु एक महीने तक लगातार एक ही टॉपिक पर अपने अभिभावकों को समझाना मेरे लिए बहुत कठिन था। हर रोज़ कोई नया बहाना या कोई नयी बात बीच में लाकर मेरी आवाज़ को अनदेखा किया जा रहा था। मैं फिर भी हार नहीं मान रही थी। 

A group of women sitting on the ground

Description automatically generated 

मैं खुद को भी समझा रही थी कि पहले तो चलो मेरे पास शब्द नहीं होते थे। मुझे अपनी बात व्यक्त करना नहीं आता था। परन्तु आज मैं वो लड़की हूँ जिसके पास बहुत शब्द है अब अपनी आवाज को रखने के लिए। अब मैं पीछे नहीं रह सकती।  

आज मेरा पूरा परिवार मेरी आवाज की महत्ता समझकर मुझे मेरे कार्य के लिए छोड़ कर अपने उद्देश्यपूर्ति के लिए निकले। यह तब मुमकिन हो पाया जब मैं पहले खुद से लड़ी और फिर 3Cs की मदद से अपने परिवार को समझाया।

मेरे लिए यह चुनौती आसान नहीं थी। परन्तु इसके कारण मेरा हौसला दुगुना हो चुका है। आज मैं, ना सिर्फ अपने, बल्कि अपने परिवारजन के लिए भी voice & choice के प्रति सोचने का माध्यम बन रही हूँ।

रश्मि 

बैच-9, मुंगेर