Monday, June 15, 2026

जिस वजन को मैं हिला नहीं पाई

मेरा नाम शिवानी है। मैं मुंगेर के धरहरा ब्लॉक के घटवारी गाँव की रहने वाली हूँ।

पेशरा गाँव पहुँचने से पहले ही रास्ता बताने लगा था कि यहाँ ज़िंदगी कैसी है। सड़क कहीं-कहीं थी, कहीं-कहीं नहीं। हम स्कूटी से गए थे — इसलिए पहुँच पाए। लेकिन पूरे रास्ते एक सवाल मन में आता रहा — अगर स्कूटी नहीं होती, तो क्या मैं भी वहाँ तक पहुँच पाती?

गाँव में पहुँचकर पता चला कि वहाँ न ऑटो चलता है, न ई-रिक्शा। लोगों के लिए पैदल चलना ही सबसे बड़ा सहारा है। और यह भी पता चला कि गाँव की कई महिलाएँ हमें देखकर रुक गई थीं — क्योंकि उन्होंने पहली बार किसी लड़की को स्कूटी चलाते देखा था।

यह सुनकर कुछ देर के लिए मैं भी रुक गई।


प्रमिला दीदी के घर पहुँची तो देखा कि खाना आज भी चूल्हे पर बनता है। घर के बाहर लकड़ियों का एक गट्ठर रखा था। मैंने उसे उठाने की कोशिश की — वो मुझसे हिला तक नहीं।

वही गट्ठर प्रमिला दीदी रोज़ पहाड़ों और जंगलों से ढोकर लाती हैं।

उनकी दिनचर्या यह है — सुबह उठकर घर का काम, फिर जंगल जाकर लकड़ी लाना, खाना बनाना, दो बच्चों की देखभाल, बुज़ुर्ग सास की जिम्मेदारी जो काम के बाद भी कहती हैं कि समय पर खाना नहीं मिला, और पति जो बाहर काम करते हैं और खुद भी बीमार रहते हैं। इन सबके बीच प्रमिला दीदी अपने घर से आधे घंटे पैदल पहाड़ी रास्तों पर चलकर गोरैया के सामुदायिक भवन पहुँचती हैं — जहाँ वो किशोरियों के साथ सेशन करती हैं।

कभी-कभी छोटे बच्चे को गोद में लेकर।



प्रमिला दीदी ST समुदाय से आती हैं। उनके समुदाय में लड़कियों का आगे बढ़ना आसान नहीं रहा — कम उम्र में शादी, पढ़ाई का जल्दी छूटना, और यह जुमला जो बार-बार सुनाई देता था — "ज़्यादा पढ़ोगी तो ठीक नहीं होगा।"

i-Saksham से जुड़ने से पहले भी उन्होंने कोशिश की थी — कहीं काम करने की, कुछ करने की। लेकिन धमकियाँ आईं, रुकावटें आईं। धीरे-धीरे उन्होंने अपनी बात कहना ही कम कर दिया था।

फिर i-Saksham से जुड़ीं। जमालपुर में ट्रेनिंग के लिए पहुँचीं।

शुरुआत में लोगों के सामने बोलना मुश्किल था। लेकिन उनकी Buddy शिवानी लगातार साथ रहीं। धीरे-धीरे एक बात समझ आई — कि अगर वो खुद नहीं बोलेंगी, तो उनके समुदाय की लड़कियाँ कैसे बोलना सीखेंगी।


उन्होंने सेशन शुरू किए। शुरुआत में एक लड़की आती थी, कभी दो। कई लड़कियाँ यह नहीं समझती थीं कि इन बैठकों का क्या फायदा।

प्रमिला दीदी फिर भी जाती रहीं।

धीरे-धीरे लड़कियाँ आने लगीं। सवाल पूछने लगीं। अपने भविष्य के बारे में सोचने लगीं। और एक दिन वो भी हुआ जो उस समुदाय में पहले कभी नहीं हुआ था — कुछ किशोरियाँ i-Saksham का इंटरव्यू देने जमालपुर तक पहुँचीं।

आज उनके समुदाय से दस-बारह किशोरियाँ नियमित रूप से सीखने की प्रक्रिया से जुड़ी हैं।


जब मैं वापस लौट रही थी, तो मुझे वो गट्ठर याद आया जो मुझसे हिला नहीं था। प्रमिला दीदी उसे रोज़ उठाती हैं।

और उसके बाद भी — चलती रहती हैं।


लेखिका परिचय

नाम: शिवानी कुमारी परिचय: घटवारी गाँव, धरहरा ब्लॉक, मुंगेर की रहने वाली हैं। i-Saksham बैच-7 की एडू-लीडर रह चुकी हैं। i-Saksham से जुड़ाव: 2021 लक्ष्य: समाज में सकारात्मक बदलाव लाना।

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