"सत्र में टी-शर्ट पहनकर आइए।"
काजल दीदी ने सीधे मना नहीं किया। बस इतना बोलीं - "देखते हैं।"
अगले हफ्ते सलवार-कमीज़ में आईं। उसके अगले हफ्ते भी।
मेरा नाम शिवानी है। मैं मुंगेर के धरहरा ब्लॉक के घटवारी गाँव की रहने वाली हूँ। काजल दीदी उम्र में 29 साल की हैं, दो बच्चे हैं। घर, बच्चे, खाना - बस यही दुनिया है उनकी। जब मैंने एक दिन पूछा कि रुकती क्यों हैं, तो थोड़ी देर चुप रहीं। फिर बोलीं - "ससुर और सास हैं घर में। पहले से ही कहती हैं कि बाहर जाने का क्या फायदा। अगर ऊपर से ये सब दिखा, तो बस बहाना मिल जाएगा।"यह डर काल्पनिक नहीं था। यह असली था।
उनकी साथी चमनलता दीदी की बात अलग थी।
चमनलता दीदी 34 साल की हैं। बारह साल का बेटा है, एक बेटी नायरा है। उन्हें लगता था कि बेटा इतना बड़ा हो गया है, अब माँ का टी-शर्ट पहनना अच्छा लगेगा क्या। मन था पहनने का, लेकिन घर में टी-शर्ट थी ही नहीं। खरीदने जाना मतलब पैसे खर्च करना, मतलब घर में बताना, मतलब सवाल।
एक दिन उन्होंने बस इतना कहा - "मेरे पास अपने पैसे नहीं हैं कि जो चाहूँ वो लूँ।"
इस एक लाइन में कितनी बड़ी बात थी।
उस दिन सत्र में एक सवाल पूछा गया - "आपको क्या पसंद है, सिर्फ घर को नहीं, आपको खुद को?" और "आखिरी बार कब कुछ आपने अपने लिए चुना था?"
ये सवाल छोटे लगते हैं। लेकिन जिस महिला ने सालों से सिर्फ दूसरों की पसंद के हिसाब से जिया हो, उसके लिए ये सवाल बहुत गहरे होते हैं।
काजल दीदी घर गईं। अपनी बहन की एक पुरानी जींस थी - साइज़ में फिट थी। रात को निकाली, देखती रहीं।
अगले दिन पहनकर आईं।चेहरे पर हँसी थी, थोड़ी झिझक भी थी। बोलीं - "दीदी, सब देख रहे थे, अच्छा नहीं लग रहा था।"
इतने में चमनलता दीदी आईं और पूछा - "दीदी, मैं कैसी लग रही हूँ आज?"
सबने दोनों को देखा। सराहना हुई। चमनलता दीदी अपने बारह साल के बेटे की जींस पहनकर आई थीं - एकदम फिट। बार-बार खुद को देखकर मुस्कुरा रही थीं।
और जिनका डर था कि घरवाले क्या कहेंगे - किसी ने ज़्यादा कुछ नहीं कहा।
वो जो बड़ा तूफान आने का डर था, वो आया ही नहीं।
उस दिन जब सत्र खत्म हुआ, काजल दीदी जाते-जाते मुड़कर बोलीं - "अगले हफ्ते फिर पहनकर आऊँगी।"
वही काजल दीदी, जिन्होंने पहले दिन कहा था - "देखते हैं।"
लेखिका परिचय
नाम: शिवानी कुमारी
परिचय: घटवारी गाँव, धरहरा ब्लॉक, मुंगेर की रहने वाली हैं। i-Saksham बैच-7 की एडू-लीडर रह चुकी हैं।
i-Saksham से जुड़ाव: 2021
लक्ष्य: समाज में सकारात्मक बदलाव लाना।
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