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Friday, February 10, 2023

सीमाः साप्ताहिक सेशन के जरिए मैंने पहचानी अपनी ताकत



आशा करती हूं कि आप सभी कुशल होंगे। मुझे दिनांक 9/2/2023 दिन गुरुवार को समय 10 बजे से साप्ताहिक आठवां सेशन करने का मौका मिला। उस सेशन को मैंने बहुत इंज्वाय किया और वहां से बहुत कुछ सीखने का मौका भी मिला, जिसका कुछ अंश मैं आपके साथ साझा करने जा रही हूं।



मैं सामाजिक, भावनात्मक, बुद्धि के बारे में एक छोटा सा अनुभव साझा करने जा रही हूं। इस सेशन की शुरुआत एक माइंडफुल मेडिटेशन के साथ की गई। जिसमें Rainbow walk की पहचान बनीं। जैसे कि जो वस्तु के बारे में बताया जा रहा था, उसका रंग आसानी से पहचान पा रहे थे। उस वस्तु का नाम इस प्रकार से साबित किया गया है। जैसे -  पेड़, केला, अनार, तोता, कबूतर इत्यादि। 


अन्य महिलाओं की आवाज बनना भी जरूरी 


इसके बाद (voice and choice for women ) अर्थात् मैं स्वयं एवं दूसरे महिलाओं के पसंद की आवाज उठाने के लिए कितना इस्तेमाल कर पा रही हूं। साथ ही इमोशन मीटर की भी अच्छी समझ बन पाई। जैसे -पिछले सप्ताह हम किस इमोशन मीटर पर थे इसके बारे में सभी साथियों के साथ शेयर कर मुझे काफी अच्छा लगा।



हमारे अंदर कितनी उर्जा और कितना आनंद था, इसके बारे में मुझे एहसास हुआ कि मैं किस समय कितनी उर्जा और किस समय कितना आनंद महसूस कर सकती हूं। इसके बारे में जानकर मुझे काफी खुशी मिली। इसके बाद एक बहुत मजेदार एक्टिविटी की गई। उस एक्टिविटी को सभी साथियों ने मिलकर काफी एनर्जी के साथ कर सके। इसके बाद कुछ समय खान अकादमी और डुओलिंगो पर भी अभ्यास कराया गया, जिससे बहुत कुछ सीखने का मौका मिला।



इससे स्पष्ट यह होता है कि सभी साथियों ने पूरे सेशन को काफी अच्छे तरीके से अपने एनर्जी लेवल के साथ सीखने के लिए अपने ध्यान केंद्रित कर पाए इसलिए मैं सभी साथियों को समय से सेशन में शामिल होकर अपनी-अपनी भूमिका निभाने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद बोलना चाहूंगी।





जहां अभिभावकों के लिए बच्चियां हैं घरेलू काम करवाने का साधन लेकिन मेरी पहल से हुआ बदलाव


आज मैं (संजू कुमारी) एक छोटा सा अनुभव साझा करने जा रही हूं। आज मैं नामांकन के लिए हरिदासपुर, गया जिला के आमस प्रखंड के कलवन पंचायत गयी थी। जब मैं वहां गयी तो देखा कि वहां के लोग सभी ईंट-भट्टा का काम करते हैं और यही उनकी जीविका का साधन है। संभवत वहां के अधिकांश लोग असंगठित वर्ग से ताल्लुक रखते हैं, जिनकी आय कभी निश्चित नहीं होती। हालांकि मैंने सोचा था कि बच्चे कम से कम पढ़ रहे होंगे लेकिन वहां देखा कि हकीकत बिल्कुल विपरीत थी। मैं जब वहां के बच्चों से मिली, तो मेरी उत्सुकता यह जानना थी कि वे लोग पढ़ाई को लेकर कितने उत्साहित हैं? जब उन बच्चों से बात हुई, तब सामने आया कि वे पढ़ना चाहते हैं। उन्होंने मुझसे कहा, "हां हम सब पढ़ने के लिए तैयार हैं मगर मम्मी पापा से बात किजिगा तब ही।" इसके बाद मैंने कहा, "ठीक है। मैं बात करूंगी।" इसके बाद मैंने पूछा कि आप लोग के मम्मी-पापा कब घर पर रहते हैं? मेरे इस सवाल पर उन बच्चों ने बताया, सोमवार को हफ्ता उठता है और उस दिन सब घर पर रहते हैं। यही कारण था कि अधिकांश लोग अपने घरों पर नहीं थे इसलिए मैंने उस दिन ही इंतजार करने का सोचा कि सबसे मिलकर ही जाउंगी। कोमल कंधों पर घर की जिम्मेदारी शाम को जब वे वापस आए, तो मैंने उनसे उनकी बच्चियों के नामांकन और पढ़ाई संबंधित सवाल किए और बातचीत करने की कोशिश की। जब मैंने उनसे कहा कि आप क्यों अपनी बेटियों का नामांकन नहीं कराते, तो मेरे इस सवाल पर उन्होंने कहा, “अगर ये घर पर नहीं रहेगी, तो घर का काम कौन करेगा और अगर पढ़ने जाएगी, तो घर कौन देखेगा?” इसके बाद मैंने उन्हें सुझाव दिया कि खाना तो सवेरे 8 बजे ही बनता है ना, तो बच्चियों को स्कूल भेजने में क्या दिक्कत है और बात खाना बनाने की है, तो ये बेटियां सुबह खाना बना दिया करेंगी। मेरे इस सुझाव पर उन्होंने कुछ देर विचार-विमर्श किया और अंत में तैयार हो गए फिर मैंने उन बच्चियों का नामांकन पास के स्कूल में कराया। जहां मुझे पता चला कि नामांकन की स्थिति बहुत दयनीय है क्योंकि अभिभावकों जागरुक नहीं हैं और वे बच्चों से घर की रखवाली और घर का काम करवाते हैं। हालांकि मैंने अपना कर्तव्य पूरा करते हुए बच्चियों को नामांकन और पढ़ाई के लिए प्रेरित किया और उम्मीद है कि वे अपनी पढ़ाई जारी रखेंगी। 



Thursday, February 9, 2023

नामांकन कराने जाने पर विद्यालय प्रबंधक ने लगाए हम पर इल्जाम

 

नामांकन कराते बच्चे




आज मैं (संजू कुमारी) आप सभी के साथ एक छोटा-सा अनुभव साझा करने जा रही हूं। आमस प्रखंड के महुआवां गांव में आज मैं कुछ बच्चे का नामांकन करवाने के लिए गई, जिसमें से कुछ बच्चों का नामांकन पहले ही हो गया था। इस कारण बाकी दो बच्चों का नामांकन किया गया। नामांकन को लेकर हमें हर रोज नई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है लेकिन हम अपने कर्तव्य पथ पर अडिग हैं और रुकेंगे नहीं क्योंकि हर बच्ची को शिक्षित कराना हमारा कर्तव्य है।


जब मैं विद्यालय में नामांकन के लिए पहुंचे, तो वहां भी चुनौतियां मेरी राहें देख रही थी। वहां पहुंचे तो बताया गया कि आज शिक्षक के अभाव के कारण एस. आर नंबर नहीं दे पाएंगे। साथ ही हमें कहा गया कि आप सभी ऐसे बीच-बीच में आते रहिएगा तब अब एक भी बच्चे का नामांकन नहीं लेंगे। सिर्फ आज भर ले रहे हैं क्योंकि जब लिखकर दे दिए हैं कि अब हमारे पास एक भी अनामांकित एवं ड्राप आउट बच्चे नहीं हैं, तो आप कहां से ऐसे अनामांकित एवं ड्राप आउट बच्चे ढूंढकर ला रहे हैं? और इसके पैसे कौन देता है? मुझसे जब ऐसे सवाल पूछे गए, तब मुझे बहुत बुरा तो लगा लेकिन मैं अपने निश्चिय को लेकर दृढ़ थी।  


मैंने चुप रहना जरूरी समझा 


मैंने इस विषय पर ज्यादा कुछ बोलने से परहेज किया क्योंकि मुझे ज्यादा उलझनें कि जरूरत ही नहीं है। मुझे तो अपना काम करना है। मुझे पता है कि ऐसी कितने चुनौतियां हमारे साथ आते रहेंगी। इस प्रकार से मुझे तो हर चुनौतियों का पार करते हुए अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए विशेष रूप तैयार रहना है और ध्यान भी रखना है ताकि एक भी बच्चे अनामांकित एवं ड्राप आउट न रह जाएं। 


इसके बाद मैं हमजापुर में जाकर अभिभावकों को नामांकन के लिए प्रेरित की। इस पर अभिभावकों ने कहा, क्या आप सभी नामांकन करवाइएगा तभी मेरे बच्चे का नामांकन होगा? हम खुद से नामांकन कराएंगे?  हमें अभी भी अनेकों प्रकार की परेशानियां का सामना करना पड़ रहा है। अभिभावकों का कहना है कि आप क्यों इतना नामांकन के लिए प्रेरित कर रहे हैं? आपको क्या लगता है कि हम खुद नामांकन नहीं करवा पाएंगे? 

 

मेरा मानना है कि हर किसी को अपनी मेहनत पर ध्यान देना चाहिए और चुनौतियों का सामना करना चाहिए-

क्योंकि चौंक जाएंगे मेरी उड़ान देखकर, 

ऐसे मैं अपना जरिया बदल दूंगी,

जो मुझे नाकारा समझते हैं एक दिन,

मैं उन सब का नजरिया बदल दूंगी।