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Tuesday, January 16, 2024

नाटक के माध्यम से Language Teaching- मुस्कान

आज मैं जब कक्षा में कहानी सुना रही थी, तो बच्चे बड़े ही चाव से सुन रहे थे। लेकिन वो बार-बार ये अनुरोध भी कर रहे थे कि दीदी दिखाइये न, कैसा दिख रहा है, किताब में।

लेकिन हर एक वाक्य का मेरे पास चित्र उपलब्ध नही था। फिर मैंने बोर्ड पर कुछ चित्र बनाये जिससे कि बच्चे कहानी को और अच्छे से समझ सकें, लेकिन बच्चे फिर भी संतुष्ट नहीं थे। उन्हें कहानी का जीवंत उदाहरण चाहिए था।

मैंने सोचा कि मेरे पास पूरी कहानी की स्क्रिप्ट (script) है और बच्चे भी हैं। तो क्यों ना एक छोटा सा नाटक किया जाये?

जब मैंने बच्चो को ये बात बतायी तो वो बहुत खुश हुए, नाटक में भाग लेने और देखने के लिए बहुत उत्साहित भी दिखे। दो बच्चियाँ अपने मन से आगे आयी। (वैसे तो चार-पाँच आ गयी थी। लेकिन उन सभी में से सिर्फ दो बच्चियों को मैंने नाटक के लिए चुना।)

ये वो बच्चे थे जो किसी भी कार्य में बहुत कम पहल करते थे और कक्षा में बहुत कम सामने आते थे। मुझे ये देख कर खुशी हुई कि आज ये बच्चे स्वयं ही आगे आये हैं, इसलिए भी मैंने इन्हें नाटक के लिए चुना। 

बच्चों ने इस कहानी को नाटक के रूप मे बखूबी निभाया और पूरी कक्षा को ये कहानी अच्छे से समझ आ गयी, मुझे नहीं लगता कि वो कभी भूलेंगे। क्योंकि जब अंत में मैंने सभी से प्रश्न पूछे तो सभी बच्चो ने सही-सही उत्तर दिए, वो भी एक स्वर में। ये देख मुझे बहुत प्रसन्नता हुई। मुझे लग रहा था कि मैं आज बच्चों को ज्यादा तो नहीं सिखा पायी, लेकिन हाँ, जो भी सिखाया वो उन्हें अच्छे से समझ आ गया। इस बात की संतुष्टि थी।

मैं, बच्चों द्वारा किये गए नाटक का विडियो तो नहीं बना पायी परन्तु अंत में एक तस्वीर जरुर ली है।

वो भी इसलिए क्योंकि बच्चे कह रहे थे कि, देखिये न दीदी, “रौशनी एकदम सोफिया जैसी दिख रही है।" जो की सही ही था, क्योंकि सोफिया के चित्र में और रौशनी में काफी समानता थी। आप भी देखिये।

 


 मेरी कक्षा की सोफिया के पास सिर्फ क्लिप (बालों में लगाने वाली चिमटी) थी, उसमे फूल नही थे। निधि के पास प्लास्टिक (plastic) के फूल थे तो उसने वो रौशनी के क्लिप (clip) मे लगा दिये। तो कुछ इस प्रकार हमारी कक्षा की सोफिया तैयार हुई।

यह देख मुझे निधि पर बहुत गर्व महसूस हुआ कि वो कक्षा के नियमों (values) का पालन करती है और दूसरे बच्चों की मदद करती है।

मुस्कान
30 अक्टूबर, 2023

पेंट से प्रिंट रिच (Print Rich) बनाने के लिए बच्चों ने Voice उठायी

प्रिय दोस्तों,

मैं आपके साथ क्लासरूम प्रिंट रिच (classroom print rich) का अनुभव साझा कर रही हूँ। मेरा इस महीने का लक्ष्य क्लासरूम को प्रिंट रिच करना था। वैसे मैंने पहले भी बहुत बार चार्ट-पेपर (chart-paper) पर TLM (Teaching Learning Material) बनाकर लगाया था। लेकिन दूसरी कक्षा के बच्चों ने कुछ TLM खराब कर दिये, कुछ को फाड़ दिया। फिर भी मैंने दोबारा TLM बनाया। कक्षा की खिड़कियाँ बड़ी और कक्ष हवादार होने के कारण, TLM हवा से गिर-गिर कर खराब हो गया।

तब बच्चों ने ही आईडिया (idea) दिया कि दीदी, पेंट रखा है, क्यों ना उसी से TLM बनाया जाये? उसे तो कोई फाड़ नहीं पायेगा। ना ही हवा से गिरकर खराब होगा। तो बच्चों ने ही कक्षा में पेंट से TLM बनाने के लिए अपनी voice & choice रखी।

दिवाली की छुट्टियों के लिए विद्यालय बंद होने का समय नजदीक था। मेरे पास एक ही दिन बचा था और घर में भी सफाई चल रही थी। मैंने कुछ देर के लिए सोचा और कक्षा समाप्त होने के बाद निर्णय लिया कि कुछ भी हो जाये, मैं इसे पूरा करके ही जाऊँगी

(एडू-लीडर खुशबू द्वारा पेंट से बनाया हुआ TLM)

कक्षा के बाद मैंने कुछ TLM दीवार पर बनाया। बच्चे भी तब तक खाना खाकर वापस आ गये थे। बच्चों ने TLM देखते ही बोला कि दीदी ये तो बहुत सुन्दर लग रहा है। आप हमारी कक्षा की सारी दीवार पर ऐसे ही TLM बना दीजियेगा। शबनम (एक बच्ची) बोली कि ये तो रबर से मिटाने पर भी नहीं मिटेगा और हवा से खराब भी नहीं होगा। मुझे भी ये कार्य दिवाली की छुट्टियों से पहले समाप्त करके बहुत अच्छा लगा और बच्चों को खुश देखकर भी अच्छा लगा।

खुशबू
बैच- 9, जमुई