Wednesday, June 19, 2019

खुद के हारे हार है, खुद के जीते जीत (रोहित रैना- i-Saksham फेलो जमुई)

दोस्तों आज मैं अपलोगो केे बिच कुछ ऐसे बातें साझा करने जा रहा हूँ , जो हमारी कमजोरी और साहस के बीच के अंतर और उसके प्रभाव को  दर्शाती है




          *हम जब भी हम अपने आपको हारा हुआ महसूस  करते हैं , तो  हम कुछ देर motivational Video देख लेते हैं , या किताब पढ़ लेते हैं l कुछ पल के लिए ऐसा लगता है , जैसे हमारी जिंदगी बदल गई हो अब से जो भी करेंगे बेहतर होगा. अक्सर motivate हम तब होते हैं , जब किसी और को हम आगे बढ़ते देखते हैं ,या जब कुछ गलती कर बैठते हैं , उसके बाद या हमे जब कोई वैसा person जिन्हे हम बहुत respect करते हैं वे हमे motivate करते हो  जैसे हमारे teacher , parents , या जिनके जैसा हम बनना चाहते हैं l उनके बातो का असर तुरंत हमारे  उपर होता है , और हम  मेहनत करने को तैयार हो जाते हैं l लेकिन  आधिकतर लोग ऐसे हैं जो सिर्फ सुनके motivate तो हो जाते है ,लेकिन अपने आपको बदल ( आदत ) नही पाते हैं.  कुछ देर केे बाद हम फिर पहले जैसे हो जाते हैं , अगर करते भी हैं तो एक से दो दिन फिर  फिर वही स्थिति हो जाता है l हमलोगो को लगता है सब काम तुरंत ही हो जाये तो अच्छा जो चाहते हैं वो तुरंत मिल जाये l लेकिन ऐसा जब तक नहीं होगा , तब तब हम कोई काम लगातर नही करते हैं l
        * हम ऐसे ही कुछ और बाते करते हैं , जो आपको शायद लगता होगा हम क्या सही  या गलत कर रहे हैं:- कई लोगों को Self awarness केे बारे में पता नहीं होता  जो खुद केे कमजोरी और  खासियत नहीं पहचान पाते l इससे हम खुद केे बारे में जानने का कोशिश करते हैं l  हमे क्या करना हैं l हममे कमजोरी क्या है l हमारा Short/long goal क्या है l हम अपने अच्छी और बुरी आदते को पहचनाने की कोशिश करते हैं l और  हम  अपने  आदतों में
  धीरे - धीरे बदलाव लाना करना शुरू कर देते हैं ll
2:- कुछ आदते जो हमे आगे बढ़ने नहीं देते ll
हम सभी लोग  मनोरंजन करते हैं लेकिन हद से ज्यादा वो भी काम का  बाधा और नुकसानदायक होता है l
जैसे :-  दिनभर whatsap का बिना कोई कारण का use करना ,  लगातार गेम खेलना l Negative बातें सोचते रहना l बहुत ज्यादा TV देखना या मोबाइल में कई सारे application     का use करना  l  दोस्तों केे साथ ज्यादा से ज्यादा गप - शप करना l  ( सीमित तक हो तो अच्छा है लेकिन इससे ज्यादा आपका समय का बर्बादी और नुकसान  हो सकता है )
3:- हमारा Negetive  thinking भी हमे पीछे करता है , इसे हम common भी कह सकते हैं l
जैसे :-* हम गरीब हैं , हमारे पास पैसे नहीं हैं  हम इसे कैसे  प्राप्त करें ? family में कोई बीमार हो तो लम्बे समय तक उसी केे बारे में सोचना l * कोई खास  व्यक्ति जिससे हमें ज्यादा लगाव हो उसके बारे में   ज्यादा देर तक सोचते रहना l कोई चीज खोने का डर से परेशान होना l * ऐसे thinking से हमारा दिमाग थक जाता है l और नींद आने लगता है , हमारा mind भी word maping की तरह है l एक बात से कई बात निकलता है l अगर possetive करे तो active होंगे और negetive सोचे तो कोई काम ही नही कर पायेंगे l
4:- आखिर क्यों नहीं  छूटता आदत ? क्या करे l
*इसका  मुख्य कारन यह है की हम खुद में Awareness नही है l या हमे कोई guard नही कर रहा  जिस कारन ये सोच लेना की कोई नही है बोलने वाला l ऐसा सोचना हमारी  मूर्खता है l क्योंकि समय तो हमारा  बर्बाद हो रहा है l मनोरंजन चीजें में हमारी आदत लग जाती है जो हमें छोड़ना मुश्किल लगता है l लेकिन अगर आगे बढ़ना है , तो इसे कम करना होगा ही l  हम अपने लाइफ से से जुड़ी कई जानकारियां मोबाइल में सर्च करते हैं कैसे खुश रहे हैं कैसे जीवन व्यतीत करें कैसे टाइम का मैनेजमेंट करें l लेकिन जब तक हम इन बातों को अपने लाइफ में नहीं उतारते तब तक वह हमारे लिए बेकार ही है l हम कई motivate  book पढ़ते हर किताब में एक बात जरूर  लिखी होती है की मेहनत से  ही  अपना की लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं l
जो भी लेखक motivataion book लिखते है , वे अपनो दुखो केे पल को जरुर लिखते है l और वे हमे यह messege जरुर देते हैं की मुसीबत तो आयेगा ही अगर इसका सामना करने को तैयार है , तो succsess जरूर हो सकते हैं l अगर नही तो आप भी उस हजारो को भीड़ में शामिल है , जो खुले आँखों में  पट्टी बांध के घूम रहे हैl


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*अगर हम एक साथ कइ काम सोचे तो मुश्किल है l
क्योंकि  अगर बेहतर करना हो तो पहले एक काम को complete करना पड़ेगा l
* Daily Plan बनाना जरुरी है , और पहले उन कामों को पूरा करेंगे जो हमारे लिए ज्यादा महत्वपूर्ण है l और सोते time एक बार जरूर देख लेंगे की कौन सा work छूट गया और क्यों ? lllकोई भी आदत एक दिन में नहीं लगता लेकिन लगातार कोशिश  करने से संभव है l
*दूसरे का compare न करे आपमें जितना है उससे ही आगे बढ़ते रहे l क्योंकि बेहतर आपको बनना है l
* अगर आप सुबह जल्दी नहीं जगते हैं , तो आप दिनभर आलस महसूस कर सकते है l इसलिए सुबह जल्दी जगने का कोशिश करेl
* खुद केे लिए time निकाले खुले जगह में खुद को महसूस कीजिये आप उस time ये मत सोचिये की आप कुछ गलत कर रहे हैं , आप ये सोच सकते हैं ,की आपही एक वो व्यक्ति है जो देश और  समाज के लिए कुछ अच्छा कर सकते हैं l  आप ही सर्वश्रेष्ठ हैं l खुद पे  गर्व कीजिए घमंड नहीं ll
*हमेशा मुस्कुराते रहिये क्योंकि मुस्कुराने से आपमें possetive हमेशा बनी रहेगी और और आप खुश रहेंगे लोग आपसे attractive होंगे l
* अगर आपको डर लगता है तो आप महाभारत का कुछ श्लोक पढे जिससे आपका डर भय सब खत्म हो जाएगा

 सिर्फ एक बात हमे हमेशा याद रखना चाहिए की निरंतर प्रयास ही कोई काम सफल हो सकता है l
आप क्या चाहते है , भीड़ बनना या भीड़ की वजह बनना ?
 मन तो करता है लिखते रहूँ l लेकिन क्योंकि एक इंसान पीछे सारे दुनिया घूम रही है , आप हैं तो सब हैं, नही तो कुछ नहीं  आपका हर पल किमती है ! समझे तो बहुत कुछ नही तो कुछ भी नही l आपका  कठोर परिश्रम से आपके साथ-साथ और भी कई   लोगों  की  जिंदगी संवर सकती है. 

Friday, May 10, 2019

एक नई पहल- खैरा (ममता कुमारी- i-Saksham फेलो)








पहुँचते ही नजरें ढूंढ रही थीं उन बच्चियों को, जिनसे मैंने कहा था कि “मैं खैरा भी आऊँगी”।किसी पर भी नज़रें नही पड़ने पर मेरे मन मे कई विचार आ रहे थे| विचलित मन से मैं वहाँ की शिक्षाका से पूछ पड़ी कि जो बच्चिया जमुई से नवि कक्षा में एडमिशन ली हैं, वो दिखाई नही दे रही हैं| उन्होंने बताया कि वो यहाँ नही बल्कि सामने वाली नयी बिल्डिंग जो की नवि से बारहवीं कक्षा के लिए बनी है, उसमे हैं| गहरी सांसों के साथ थोड़ी राहत मिली।

24-04-19 आज निकिता ,स्मृति और मैं मिनाक्षी दी कि के साथ खैरा जा रही थी| कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालय जमुई के साथ अब हम लोग खैरा के कस्तूरबा विद्यालय में भी शिक्षण देना शुरू कर रहे थे, तो वहाँ की वार्डन से बात करना और उनकी सहमति भी जरूरी थी।निकिता 2015 में यहाँ आ चुकी थीं तो उससे भी कुछ बातें पूछते जा रहे थे।

विद्यालय पहुँच जाने के बाद मीनाक्षी दी ने वहाँ की शिक्षिका से बात की|उसके बाद हम लोगों ने उन्हें आई-सक्षम के बारे में बताया तथा जमुई के कस्तूरबा में अपने काम के बारे में चर्चा की|आज वहाँ की वार्डेन अनुपस्थित थी तो शिक्षिका महोदया ने उनसे फोन पर बात कराई| वे तुरंत राज़ी हो गई और बोली हम जमुई में आपके काम के बारे में जानते हैं, आप जिस दिन आना चाहे आ सकते हैं। यह पल बहुत खुशी का था की लोग हमारे काम को जान रहे हैं ।

अब आ पड़ा आज का सबसे अमुल्य लम्हा: विद्यालय की बच्चियों से मिलना ।मीनाक्षी दी ने उन्हें बताया कि ये दीदी लोग तुम लोगों को पढ़ाने आएँगी।फिर हमने सबसे बात की, खुद के बारे में बताया, बच्चियों से पूछा की उन्हें क्या -क्या करना पसंद हैं,कौन से विषय अच्छे लगते है| बच्चियों ने भी हम से खुल कर बात की।फिर सभी को एक साथ बुला कर हमने खेल पर- पकटु करवाया जो की आपस मे घुलने मिलने की प्रक्रिया में सहायक माध्यम साबित हुआ ।किसी भी खेल या गतिविधि को नियत समय में पूरा करवाना खासा मुश्किल होता हैं, परंतु आज ऐसा कुछ नही था।आज केवल मिलना ही था। हमने बच्चियों को भी मौका दिया कि आपके मन मे कुछ सवाल है तो पूछे।एक बच्ची ने पूछा भी दी आप क्या - क्या पढ़ाती हैं? हमने उन्हें बताया और वे सब ध्यान से सुन रही थीं। वहाँ पर संथाल बोलने बाली बच्चियां भी थी जिनसे बात कर बेहद खुशी हुई| सभी बच्चियां हिंदी जानती थी, यह जान कर थोड़ी राहत मिली क्योंकि मेरे मन में बार बार यही सवाल उठ रहा था कि अगर उन्हें केवल संथाल आती होगी तो कैसे पढ़ाउंगी ? हमने जाना कि अब तक वहाँ केवल हिंदी के ही शिक्षिका थी, जिस वजह से उन्हें हिंदी आती थी ।

बच्चियां इस बाद से बेहद प्रफुल्लित हुई की अब हम हर सप्ताह में दो दिन उनसे मिलेंगे| इस तरह आज हमारा दिन काफी अच्छा रहा| गर्व हो रहा था आज हमारे पास बताने के लिए कितना कुछ था। कुछ बातें गर्व करने के साथ गौर करने की भी थी ।वहाँ की व्यवस्था, आँगन की गंदगी; आज पहला दिन था तो उनसे कुछ कहने के बजाय हमने बस डस्टबीन के होने के बारे में पुछा| शिक्षिका खुद बोली कि इसका ढक्कन टूट गया हैं इसलिए डालने में गंदगी फैल जाती हैं।

उसके बाद हम नवि से बारहवी वाले कस्तूरबा में गए । देखते ही सारी बच्ची दौड़ कर हमारे पास आ गईं| उनकी खुशी हम सभी के दिलों को छू गई| शायद हमारी नज़रों की तलाश के साथ उनका इंतजार भी था। वहाँ की शिक्षिका से भी हमने बात-चीत की और उसके बाद हम वापस आ गए।

आज हमारे लिए बहुत ही गर्व का दिन था| हम 200 बच्चियों से मिले थे| वहाँ की वार्डेन तथा शिक्षिका के सहमति के साथ अनुमति काफी प्रशंसनीय थी।

Sunday, May 5, 2019

तानिया परवीन- बीते दो साल और मैं|



मैं आज आप लोगों के साथ i-Saksham के साथ 2 साल के अनुभव को साझा करने जा रही हूँ| वैसे तो अगर सही में बोला जाए तो, इतने लंबे समय के अनुभव को साझा करना थोड़ा कठिन है| इसलिए मैं अपने कम लफ़्ज़ों में ही बताना चाहूँगी । 

सबसे पहले मैं ये बताना चाहूँगी कि मैं i-saksham से मिलने से पहले कैसी थी । मैं बच्चों को उस समय भी पढ़ाती थी लेकिन उस समय मैं उसी तरीके से पढ़ाती थी जैसे मैं पढ़ी हूँ या फिर जैसे मेरे आस पास के कुछ शिक्षक पढ़ाते थे । मुझे गुस्सा बहुत आता था| जब बच्चे कुछ समझते नही थे, मैं उन को पीटती भी थी । मैं बाहर के लोगो से बहुत कम मिलती थी,मुझे बहुत डर लगता था और उन से बात करने में बहुत झिझकती थी कि कही मैं कुछ गलत न बोल दूँ । मुझे singing and teaching हमेशा से पसंद था और मैं पहले से ही एक अच्छी शिक्षक बनना चाहती थी लेकिन इस के लिए मैं क्या करूँ मुझे पता नही था 

i-Saksham के मिलने के बाद मुझ मे बहुत बदलाव आए मेरी बहुत सी आदतें बदली जैसे - मैं अब बच्चों को सही तरीके से पढ़ाती हूँ, उनको पिटती नही हूँ और मुझे अब भी कई चीज़ों पर गुस्सा आता है लेकिन अब मैं उस गुस्से पर नियंत्रण रखना जानती हूँ और मैं ये समझने की कोशिश करती हूं कि मेरे लिए क्या महत्वपूर्ण है । मेरा पहले सिर्फ एक लक्ष्य निश्चित था लेकिन रास्ता नही, अब मैं ये कही न कही जानती हूं कि मुझे अपने लक्ष्य को पाने के लिए किस किस मार्ग से गुजरना है और कैसे क्या करना है और मैं ये जान पाई हूँ कि मुझे अगर शिक्षा के मार्ग से ही जुड़े रहना है तो मैं शिक्षक बनने के अलावा ओर भी अलग अलग चीज़ें कर सकती हूं । 
अपनी कक्षा में बच्चों से सवाल-जवाब करती तानिया|


2 साल गुज़र गए है इसके बाद मैं ये चाहती हूं कि मैं एक अच्छे कॉलेज या यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करूँ और जिस तरह मैं i-Saksham से सीखी हूँ या मेरा जो अनुभव रहा है जिस जिस तरह से मेरी मदद की गई थी या की जा रही है मैं भी सब की मदद करूँ जैसे - बच्चों को पढ़ाने में और उनके खुद के पढ़ने को लेकर समस्याओं में इत्यादि ।

i-Saksham के साथ मेरा 2 साल गुज़र चुका है| मेरे लिए सबसे यादगार पल या मजेदार पल, इस साल का और पिछले साल का i-Saksham का foundation day रहा है| ये पल मेरे लिए वो पल है जिसमे मैं अपने जीवन मे सबसे ज्यादा खुश हुई थी| मुझे या हम लोगों के साथ जितने भी साथी थे उनको इतनी इज़्ज़त दी जा रही थी कि जितना बयाँ करूँ उतना कम है| इतने बड़े बड़े लोग, जो इतने पढ़े लिखे है वो मुझे इतने सम्मान दे रहे थे की मुझे यकीन नहीं हो रहा था| दूसरा यादगार पल तब का है जब फ़ेलोशिप लॉन्च हुआ था|उसमें मैंने स्टेज पर गीत गाया था और भाषण भी दी थी| उस समय मुझे बहुत अच्छा लग रहा था कि मैं इतने सारे लोगो के सामने कुछ बोल रही हूं और लोग मेरी बात सुन रहे थे और उन्हें अच्छा भी लग रहा था । तीसरी यादगार पल मेरी सारी ट्रेनिंग है जो मैंने i -Saksham से लिया कोई भी ट्रेनिंग में मुझे ऐसा नही लगा कि जिसमे मैं बोर हुई या फिर मुझे अच्छा नही लगा सभी में मुझे बहुत अच्छा लगा था बहुत enjoy भी मैंने किया l 

मैं आज i-Saksham के उन सभी लोगो को तहे दिल से धन्यवाद कहना चाहूँगी जिन्होंने मुझे इतने सारी चीज़ों को सिखाया मुझे इतनी खुशी दी और मेरी हमेशा मदद की और जो आज भी कर रहे है और शायद आगे करेंगे भी । 😊

Sunday, April 28, 2019

अनुभव: शिक्षक अभिवावक बैठक (रोहित रैना- i-Saksham फेलो जमुई)


आज मैंने और अमन सर ने मिल कर मेरे सेंटर पर शिक्षक अभिभावक बैठक(PTM ) करायी l

हमने PTM कराने से पहले इसका प्लान बना लिया था कि PTMकैसे करना है और उसमें क्या-क्या चीजें करवाना है l  हमने PTM कराने का समय 10:30 से रखा l सभी बच्चे इस समय स्कूल जा चुके थे इसीलिए मैंने कुछ बच्चों के साथ ही इसका शुरुआत किया l सबसे पहले हमने खुद को अभिभावकों से  परिचित कराया l फिर हमने उनसे कुछ सवाल पूछे-PTM क्या है ? हम PTM क्यों करवाते हैं l PTM क्यों जरूरी है और इससे हमें क्या फायदा है ? कुछ पेरेंट्स जो पिछले मीटिंग में आए थे उन्होंने कुछ बताया और बाकी सब नहीं बता पाए ,  फिर हमने उन्हें विस्तार रूप से समझाया कि PTM का मतलब Parents teacher meeting होता है|.हम शिक्षक और अभिभावक आपस में बच्चों केे बारे में बात करते हैं , की बच्चे कैसे पढ़ रहे हैं और क्या सीख पा रहे हैं ? इससे हमें यह पता चलता हैं , की बच्चो केे लिए हम और आप क्या - क्या   कर सकते हैं ? इसे हर महीना करना चाहिए l
अभिभावक इन बातों को ध्यान से सुन रहे थे , और समझ रहे थे l फिर हमने पिछले PTM केे बारे में पूछा की जो आज से तीन महीने पहले हुआ था , तब से लेकर अब तक आपके बच्चे में क्या बदलाव आया ? आप  अपने बच्चों पर कितना ध्यान दे पा रहे है ? सभी अभिभावक अपने- अपने बच्चों केे बारे में बता रहे थे , कि वो पहले से बेहतर हैं और अपना काम भी करते हैं , कुछ अभिभावक ये भी बोल रहे थे कि उनके बच्चे बदमाशी भी करते हैं l
हमने अभिभावकों को पिछले तीन महीने में शिक्षा केंद्र में क्या-क्या कराया गया उसके बारे में जानकारी दी| हमने उन्हें असर test , Midline test और बाल उत्सव के बारे में बताया| बाल उत्सव का पोस्टर भी हमारे दीवार पे लगा हुआ था जो न्यूज़ में आया था , उसको भी दिखाये l
फिर हमने अभिभावकों को TLM (Teaching and Learning Materials) के बारे में बताया| हमने उन्हें बताया की किस तरह इन सामग्री का इस्तेमाल कर के हम बच्चों की विषय पर पकड़ मजबूत बनाते हैं| हर TLM का इस्तेमाल अभिभावकों से खुद करवाया l अमन सर और हमने इस तरह से बारी- बारी TLM का यूज किया-
1: मोतियो का माला-हमने अभिभावकों को दो - दो के group में बाटा और सभी को एक - एक मोती का माला दिया| फिर हमने उन्हें अंक बोले और वे तुरंत उस अंक के बराबर मोती गिन कर बता रहे थे l उन्हें बहुत ही अच्छा लग रहा था ,ये सब करने में l हम उन्हें यह अवगत करा रहे थे कि बच्चे इसी तरह से गिनती सिखते हैं l
2. UTH BLOCK का इस्तेमाल - हमने इसका भी इस्तेमाल अभिभावकों के बीच किया| हमने बताया कि जो digit single हो वो Unit होगा यानि की ईकाइ ex:- 1,2,3 आदि| इसी तरह से हमने block के साथ TENS समझाया:-जैसे ही 9 + 1 होगा वो 10 TEN हो जायेगा l फिर मैंने इसी तरह Hundred को भी समझाया l
3. ASER Test: फिर हमने Aser बारे में बताया कि हम ASER test के माध्यम से बच्चों के शिक्षा के स्तर को जांचते हैं|हम कक्षा में बच्चों को स्तर के अनुसार ही पढातें हैं|
4. Fantastic phonics: हमने अभिभावकों को fantastic phonics का कार्ड देकर उन्हें खुद उस पर लिखने बोला l उन्हें हम बता रहे थे कि बच्चे को हम यह सब लिखने देते हैं l
5: Tablet Use: हम parents को tab📱 केे बारे में बताये की इससे हम क्या - क्या करते हैं , उन्हें Rhyms का video दिखाए , कुछ apps केे बारे में बताया l हमने BOLO app केे बारे में बताया की इससे- हम खुद कैसे पढ़ सकते हैं , और बच्चे भी इसको कैसे इस्तेमाल करते है l
6. Library: Library केे बारे में बताए की इसमें बच्चे अपने मनपसंद कहानी को पढ़ते हैं , और किताब घर भी ले जाते हैं l
7:- Print Rich classes: हमने अभिभावकों को  पूरा दीवार मे लगे हुए चित्रों को दिखाया l वे बहुत खुश  थे , यह सब देखकर क्योंकि वे हमारे center में पहली बार इतना सब कुछ देख रहे थे l

फिर हमने उन्हें चैलेंज के बारे में बताया ex:- H.W ,Attendance, late, साफ़ - सफाई इत्यlदी| हमने बताया कि बच्चों का इन सभी चीज़ों का पालन करना अधिक प्रशंशनीय होगा| वे बोल रहे थे कि वे अपने बच्चों पर ध्यान देंगे| हमने अपने लक्ष्य केे बारे में भी उन्हें बताया कि हम बच्चे  को कब तक इतना सिखा देंगे l
हमने अभिभावकों से फीस के बारे में भी बात की और उन्हें बताया की समय पर फीस देना कितना महत्वपूर्ण है| इसके साथ ही अभिभावकों ने अपनी दिक्कतें और आशाएं भी व्यक्त की|

इस बैठक में माताओं की ही उपस्तिथि थी जो प्र्शंशनिय तो थी परन्तु यह सवाल भी सामने लायी कि "आखिर बच्चों के पिता की अनुपस्तिथि का क्या कारण हो सकता है?"


अंत में सभी अभिभावकों ने हस्ताक्षर कियेऔर हम सब लोगों ने मिल कर तस्वीर खिचाई और फिर सभी लोग अपने - अपने घर चले गये l इस बार का PTM पहले से ज्यादा बेहतर रहा|

Friday, March 1, 2019

Sonam, i-Saksham fellow writes about her classroom experience for the day.




आज हमारा गणित और EVS का session था। इस session मे हुए खुद का बच्चो के experience को आप लोगो के साथ साझा करने जा रही हूँ।

सबसे पहले पाँच मिनट सफाई पर बात किए।  मैंने सभी बच्चे से पूछा कि कौन - कौन ऐसे है जो स्नान कर के आए है। 95℅ बच्चो ने हाथ उठाया। मुझे ऐसा लग रहा कि दिन प्रतिदिन बच्चे पहले कि अपेक्षा मे अब साफ रहने लगे हैं। [ यह संभव इस तरह हो पाया है कि मैने बच्चो को बोली कि यदि आप स्नान करके साफ सफाई मे नहीं आयेंगे तो मैं बैग लेकर पुनः आप को घर वापस भेज दूंगी।]

इसके बाद प्रार्थना (तू ही राम...) और राष्ट्रगान हुआ। बच्चे मुंगेर जिला का News paper पढ़े और मैंने सभी बच्चों  से इस से संबंधित कुछ प्रश्न पूछे। जैसे - आपके पंचायत का नाम क्या है?, आप कौन से जिला मे रहते है?...... 85℅ बच्चे अच्छे से बता पाए। सभी बच्चे कक्षा मे आए और उन्होंने Meditation के साथ गायत्री मंत्र और महामृत्युं जय मंत्र का उच्चारण किया।

गणित कक्षा की शुरुआत दिए गए होमर्वक पर बातचीत से हुई। बच्चे  बोर्ड पर चित्रो के माध्यम से यह सीख पाए कि कौन- कौन सी वस्तु ऐसी है जो एक दूसरे पर जम(टिक) पाती है और कौन - कौन सी वस्तु ऐसी है जो नहीं जम पाती। मैंने अभी दो से तीन उदाहरण बताया कि प्रारंभिक के एक बच्चे (नाम - सिध्दांत) बोले कि दीदीजी कुर्सी पर कुर्सी भी टिक सकता है। जो कि मुझे सुनकर काफी अच्छा लगा। फिर सभी बच्चो ने बताया। इसके बाद 2 - डिजिट और जोड़ के बच्चो को शंकु के आकार का क्या - क्या होता है उसे सोचकर लिखने बोले। जब मै कॉपी चेक की तो बच्चो ने काफी हद तक सोचकर लिख पाए। उस समय मुझे अच्छा feel हुआ। फिर मैंने प्रारंभिक के बच्चो को मोती और माचिस की तिल्लिया से बच्चो को 10 - 15 तक की पहचान करायी।


   
           EVS की शुरूहात भी पिछली कक्षा पर बातचीत से हुई। EVS मे शिर्षक "हमारा शरीर" मे आज बच्चो ने हाथ के कार्य के महत्व को चित्रो के माध्यम से जाना। इसके बाद हाथो से संबंधित एक गतिविधि किए। गतिविधि का नाम था, "हमारा साफ दिखने वाला हाथ भी गंदा है।" एक ग्लास पानी और एक प्लेट लाए। सभी बच्चो ने पूछने लगे कि क्या कीजिएगा। फिर मैने सभी बच्चे से पूछे कि किसका - किसका हाथ साफ है लगभग बच्चो ने अपना हाथ उठाया। फिर मैंने उन्हीं उन्हीं बच्चो को बुलाकर प्लेट मे हाथ धुलाया। सभी ने ध्यानपूर्वक देखने लगे।

बच्चे EVS मे हाथ से संबंधित Activity (साफ दिखने वाला हमारा हाथ भी गंदा है) करते हुए।



जब पानी गंदा हुआ तब बच्चों की समझ मे आया और बोल पड़े कि इस लिए खाने से पहले हाथ धो के खाना चाहिए। तब मै बोली हाँ! बच्चे इस  गतिविधि को करके खुश थे। आज मुझे यह देखने को मिला कि बच्चो मे किसी प्रकार की भेदभाव की भावना नहीं है जब मै गंदे पानी को बाहर फेकने बोली तो बच्चो ने बहुत ही उत्साह से फेके और धोकर रख दिए। जो मुझे और भी अच्छा लगा।

धन्यवाद.........