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Wednesday, October 23, 2024

मीडियावाला सेशन का अनुभव और सीख

नमस्ते साथियों, 

मैंने हाल ही में आठ दिनों के मीडियावाला सेशन में भाग लिया, जिसने मेरी जिंदगी को सकारात्मक दिशा में बदला। इस सेशन में, मैंने कई नए कौशल सीखे, जैसे फोटोज़ को गोल्डन रेशियो (Golden ration) में लेना, वीडियो में अलग-अलग एंगल(Angle )और फ्रेम(Frame) का उपयोग करना, एक उद्यम के लिए लोगो, टेम्पलेट(Templet), कलर पैलेट (Color palette), टैगलाइन (Tagline), विजिटिंग कार्ड(Visiting card) बनाना, और फोटो-वीडियो एडिटिंग(Editing)।

लेकिन यह सेशन सिर्फ नए कौशल सीखने तक सीमित नहीं था। इसने मुझे आत्मविश्वास बढ़ाने और अपनी क्षमताओं को पहचानने का अवसर दिया। जब मैंने अपने ग्रुप के साथ मिलकर "अनमोल गारमेंट्स" के लिए लोगो(Logo) डिज़ाइन किया और उनका वीडियो शूट किया, तब मुझे एहसास हुआ कि मैं किसी भी चुनौती को स्वीकार कर सकती हूँ।


हालांकि, जब दुकान के मालिक कोलकाता जाने के कारण वीडियो शूट में शामिल नहीं हो सके, तो हमने हार नहीं मानी। हमने दूसरा विकल्प चुना और एक अन्य दुकान के लिए लोगो और वीडियो बनाया। इस अनुभव ने मुझे सिखाया कि जीवन में कभी हार नहीं माननी चाहिए और हमेशा विकल्प तलाशने चाहिए।

अंत में, हमने अपने काम को एक्ज़िबिशन (Exhibition) में प्रदर्शित किया और सभी ऑफिस सदस्यों को अपने प्रोजेक्ट के बारे में बताया। इस सेशन से मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला और सबसे बड़ी बात यह कि मैंने अपनी क्षमताओं पर विश्वास करना सीखा। यह अनुभव मेरे जीवन में हमेशा खास रहेगा, और मैं इसे कभी नहीं भूल सकती हूँ।

आस्था 

बडी इन्टर्न


(आस्था सोनपय गाँव की रहने वाली हैं। आस्था ने मुंगेर यूनिवर्सिटी से प्राणिविज्ञान ( zoology ) मे स्नातक की पढ़ाई की है और वर्तमान मे APU यूनिवर्सिटी मे मास्टर्स करने के लिए तैयारी कर रही हैं। वह 2022 मे i- सक्षम के बैच नौ के फेलो के रूप मे जुड़ी थी। दो साल की फेलोशिप के बाद ,आस्था का कहना है कि वो आगे अपने समाज के लिए कुछ करना चाहती हैं और professor बनना चाहती हैं |)

Thursday, April 13, 2023

राजमणि ने क्यों दी देवराज को रिपोर्टर की संज्ञा?

 

फोटो क्रेडिट- आई सक्षम


मैं काजल के स्कूल प्रेम टोला फ़रदा गई थी। मैंने वहां देखा कि काजल पढ़ा रही है इसलिए मैं सबसे पीछे जाकर दरी पर बच्चों के साथ बैठ गई। मैं जहां बैठी थी, वहीं मेरे बगल में देवराज बैठा हुआ था। पहले जब उसने मुझे देखा, तो वह थोड़ा डरा हुआ था। बहुत समय तक मुझे देखते ही रहा और कुछ नहीं बोल रहा था इसलिए मुझे थोड़ी शंका हुई कि यह बच्चा इतना शांत क्यों है? मैंने बातचीत शुरु करने के लिए उससे पूछा, “आपका नाम क्या है? आप इतने शांत क्यों हैं?” 


मेरे इतना पूछते ही धीरे-धीरे उसने मुझसे बात करना शुरु किया और महज 15 मिनट में ही मेरे साथ इतना घुल-मिल गया कि इतना बोलने लगा कि मुझे मजा आ गया। वह केवल 7-8 साल का ही लेकिन बोलते वक्त थोड़ा लड़खड़ाता है मगर  उसकी आवाज बहुत प्यारी है इसलिए उसे सुनने में काफी अच्छा लगा। 


मैं केवल दो घंटे ही उस क्लास रूम में बैठी थी मगर देवराज ने मुझे उन दो घंटों में ही क्लास रुम और उसके अनुभवों से जुड़ी लगभग 15 के आसपास  घटनाएं बता दीं। जैसे- अपने दोस्तों के बारे में, अपने आसपास में बैठने वाले बच्चों के बारे में, अपने घर के बारे में, अपने गाँव के बारे में, अपने बारे में। उसके बोलने के तरीके से मुझे ऐसा महसूस हो रहा था, मानों मेरे पास कोई न्यूज रिपोर्टर बैठा है, जो मुझे आसपास की खबरें सुना रहा है। 


जैसे-


  • दीदी, हिमांशु पढ़ता नहीं है। दिन भर खाली खेलते रहता है। हम रोज बुलाने जाते हैं, तब ही वह स्कूल आता है। 

  • दीदी, प्रिया पिछले साल भी दूसरा क्लास में ही थी। एकदम नहीं पढ़ती है, अगर नहीं पढ़ेगी तो आगे की क्लास में कैसे जाएगी? दिन भर खाली घर का काम करती है और खेलते रहती है। 

  • दीदी, आपको पता है, शिवानी ना बहुत गंदी लड़की है। हमेशा अपनी छोटी बहन को मारते रहती है। आप बताइए कि बड़ी बहन कहीं छोटी बहन को मारती है! 

  • यहां के लोग ना दीदी बहुत गंदे हैं। जब होली आया था ना तो मेरा झरना चुरा कर लेकर चले गए थे। अब बताइए कि झरना चुरा लिया तो मेरी गाय किसमें रहेंगी? बताइए, अभी इतना धूप किया है। इस समय गाय धूप में रहेंगी तो उनका तबीयत खराब हो जाएगा। अब आप बताइये कि हम पटिया किससे बनाएंगे? 

  • आप बताइये दीदी कि अगर सब बच्चा स्कूल के बाहर गाना बजाएगा, तो स्कूल के अंदर जो बच्चा बैठकर पढ़ रहा होगा, उसको पढ़ने का मन करेगा? हमेशा स्कूल के बाहर खड़ा होकर गाने बजाते रहता है। कोई नहीं पढ़ता है। 


जानें क्या है कक्षा अवलोकन (क्लासरूम ऑब्जर्वेशन)- 


कक्षा अवलोकन का उद्देश्य- 


  • कक्षा के विज़न को पाने में एक साथी के रूम में एडू-लीडर को सपोर्ट करना। 

  • एडू लीडर के निर्देशात्मक कौशल (पढ़ाने का तरीका), शिक्षात्मक नज़रिया (Educational vision), विषय ज्ञान का निरंतर मूल्यांकन कर उनके उपलब्धियों को सराहना और चुनौतियों पर उन्हें प्रशिक्षित करना।

  • छात्रों के विभिन्न समूहों के बीच निर्देश में संभावित असमानताओं की जांच करना और उनके बीच समानता बनाना। 

  • कक्षा निर्देशन और सीखने का सर्वोत्तम माहौल बनाने में एडू लीडर को प्रशिक्षित करना।



वहीं दूसरी ओर इस अनुभव से एक बात प्रतीत हो रही है कि बड्डी के साथ बच्चों का रिश्ता। राजमणि ने जिस प्रकार संवाद शुरु किया और देवराज परत-दर-परत मुखर होते गया, यह बताता है कि बच्चों के अंदर अनेक कहानियां होती हैं, जरुरत बस किसी सुनने वाले की होती है।


Thursday, April 6, 2023

विद्यालय में प्रार्थना के जरिए एडुलीडर्स की उभर रहा नेतृत्वकर्ता का कौशल

एडुलीडर्स हर रोज जब विभिन्न कक्षाओं में जाते हैं, तब अपने-अपने अनुसार अनेक कार्यों को गति देने का प्रयास करते हैं। जैसे- बच्चों की कक्षा में उपस्थिति सुनिश्चित करना, प्रार्थना करवाना, टीएलएम द्वारा पाठ को समझाना इत्यादि। आज हमारी एक एडुलीडर ने भी अपना अनुभव साझा किया है, जिसमें उन्होंने कक्षा का अनुभव एवं बच्चों की सहभागिता को लिखा है- 


मैं वीणा कुमारी बैच 9 की एडुलीडर हूं। आज मैं आप लोगों के साथ अपनी कक्षा 1 का अनुभव साझा करने जा रही हूं। आज जब मैं विद्यालय गई तो मेरे पहुंचने तक प्रार्थना नहीं हुई थी इसलिए मैंने शिक्षकों के साथ मिलकर प्रार्थना करवाई। इसके बाद मैंने बच्चों को कक्षा में जाने के लिए कहा और सारे बच्चे अपनी-अपनी कक्षा में चले गए। उसके बाद जब मैं कक्षा में गई तो सारे बच्चे एक साथ खड़े होकर गुड मॉर्निंग बोले। यह देखकर मुझे काफी अच्छा लगा। इसके बाद मैंने मेडिटेशन करवाया फिर एक बालगीत करवाया, जिसका नाम The little birds था।  


हालांकि बालगीत कराने के पहले मैंने बच्चों से कविता पर बातचीत की एवं उसके बाद बच्चों को बालगीत करने के लिए कहा ताकि बच्चे बालगीत का मतलब समझ सकें और उसके अर्थ से रुबरु हो सकें। इसके साथ ही मुझे यह बात भी अच्छी लगी कि बच्चों ने मेडिटेशन के दौरान काफी शांति बनाई रखी थी एवं अच्छे से अपने-अपने पाठ को पूरा किया था। 

एडुलीडर्स बन रही अन्य के लिए प्रेरणा 

एडुलीडर्स द्वारा विद्यालयों में जाना और गतिविधियां कराना इस बात की ओर इशारा नहीं करता है कि वे केवल बच्चों को शिक्षित करने जाती हैं बल्कि उनका उद्देश्य अन्य लड़कियों के लिए प्रेरणा बनना भी होता है, जो किसी कारणवश अपनी आवाज नहीं उठा पातीं। यह केवल एक जरिया है, जिससे लड़कियों को अपनी उड़ान भरने का मौका मिलता है और वे अपने निर्णय ले पाती हैं, जो आई-सक्षम का सिद्धांत है- voice and choice. 

जब एडुलीडर्स कक्षाओं की परेशानियों का हल निकालती हैं और परिस्थितियों को अपने अनुसार मोड़ती हैं, तब वे एक ओर समस्याओं से लड़ना और जूढना सीख रही होती हैं। विद्यालय में प्रार्थना करवाना ही इस बात का परिचायक है कि वे अपनी कार्य के प्रति समर्पित हैं और एक कुशल नेतृत्वकर्ता की तरह उभरकर सामने आ रही हैं।