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Monday, September 11, 2023

voice & choice के लिए कलम भी बन सकता है एक जरिया

मुजफ्फरपुर बैच 9 की लवली ने अपने कक्षा अवलोकन का अनुभव साझा किया है। वे 17 अगस्त 2023 को बड़ी कोठिया, पंचायत मुशहरी, प्रखंड मुशहरी, जिला मुजफ्फरपुर स्थित ‘उत्क्रमिक मध्य विद्यालय कोठिया दाखिला’ में अपने बैच-9 की एडू-लीडर चुनचुन के स्कूल गई थी। वहां उन्होंने देखा कि एडू-लीडर चुनचुन बच्चों को एक्टिविटी के माध्यम से पढ़ा रही थी। कुछ बच्चे स्वयं आगे आकर अपने साथियों के साथ बोर्ड पर लिखकर चुनचुन द्वारा सिखाए गए गणित विषय में कोणों को बता रहे थे।


जब वे कक्षा अवलोकन कर रही थीं, तो उनकी नज़र लगभग 8 साल की एक बच्ची पर पड़ी। उन्होंने देखा कि चुनचुन उस बच्ची को ऊंगली के इशारों से गिनती सीखा रही थी। वहीं बच्ची अपना सिर हिलाकर "हां" और "ना" में जवाब दे रही थी। लवली उस बच्ची के पास गई और चुनचुन से पहले उस बच्ची का नाम पूछा। चुनचुन ने उन्हें बताया कि उस बच्ची का नाम प्रीती है। 


इशारों के पीछे का रहस्य 


लवली ने फिर चुनचुन से पूछा, “आप इसे इशारों में क्यों पढ़ा रही हैं? इस सवाल के जवाब में चुनचुन ने बताया कि प्रीती बोल नहीं सकती है। इतना सुनने के बाद लवली अचंभित हो गई क्योंकि चुनचुन द्वारा किये जा रहे इशारों को प्रीती बहुत अच्छे से समझ रही थी। साथ ही सलीके से और बिल्कुल सही-सही लिख भी रही थी। लवली भी उस बच्ची के पास जाकर बैठी गईं और प्रीती को 1 से 10 तक की गिनती इशारों में बताया। इसके बाद प्रीती ने लवली द्वारा सीखाये गये गणित की गिनती को कॉपी में लिखकर भी दिखाया। 


प्रीती और लवली एक साथ काफी घुल-मिल गये थे। चुनचुन ने लवली को बताया कि प्रीती प्रतिदिन स्कूल आती है और उसे पढ़ने की बहुत इच्छा है। बातों-बातों में चुनचुन थोड़ी भावुक भी हो गई। उनका कहना था कि कोठिया गांव के सभी बच्चे स्कूल आते हैं मगर यहां बच्चों को घर पर पढ़ने की सुविधा नहीं हैं, क्योंकि इस गांव में अधिकतर बच्चों में किसी ना किसी की मम्मी नहीं हैं, तो किसी के पापा नहीं। साथ ही बच्चों के साथ समय बिताते-बिताते उनके साथ जुड़ाव हो जाना लाजिमी है। 


लवली और प्रीती



आवाज़ उठाने के लिए कलम


लवली ने महसूस किया कि चुनचुन के अंदर नेतृत्व करने और हर परिस्थिति का हल निकालने की दक्षता आ गई है। चुनचुन चाहती हैं कि वे हर बच्चे को ना केवल शिक्षित कर सकें बल्कि स्मार्ट गोल कैसे बनाते हैं, अपनी आवाज़ कैसे रखते हैं, ये सारे गुर सीखा सकें। लवली के अनुसार चुनचुन ने प्रीती के अंदर लेखन का बीज बोया है, जिसकी मदद से प्रीती इतना तो जान गई है कि जो लोग बोल नहीं पाते हैं, वे भी अपनी आवाज़ उठा सकते हैं। इसके लिए कलम ही उनका हथियार है, जिसे चुनचुन को प्रीती को बखूबी समझाया है। 


हम उम्मीद करते हैं कि voice & choice का ये सिलसिला अनवरत चलता रहे। कहीं बोल कर तो कहीं लिख कर लेकिन कारवां रुकना नहीं चाहिए। इक कड़ी में दुष्यंत कुमार की पंक्तियां याद आती हैं, हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए।

Monday, April 17, 2023

एडुलीडर स्मृति के प्रयासों से अन्य लड़कियों को मिलती है आसमान में उड़ने की ताकत

फोटो क्रेडिट- आई सक्षम


मैं स्मृति कुमारी बैच-9 की एडुलीडर हूं। मैं आज आप लोगों के साथ आज की कक्षा का अनुभव साझा करने जा रहीं हूं।

आज मेरे स्कूल में कक्षा अवलोकन के लिए रागिनी दी, अनुप्रिया दी और दीपा दी आई हुई थी। कक्षा अवलोकन के लिए जब दीदी ने बच्चों से पूछा कि उनकी फिलिंग क्या है? तब बच्चों ने उन्हें बताया कि वे उत्साहित हैं लेकिन कुछ बच्चे उदास थे। उनकी उदासी का कारण था कि रास्ते में आते वक्त उनकी साइकिल खराब हो गई थी।

इसके बाद जब मैंने एक दूसरे से उनकी पसंद की सब्जी का नाम पूछा, तब उन्होंने कुछ सब्जियों के नाम बताए फिर इसी को मोड़ते हुए मैंने बच्चों से सब्जियों के नाम पूछे और उन्हें पढ़ाया। आज मैंने अंग्रेजी में बच्चों को सब्जी का नाम पढ़ाया। कलात्मक तरह से बच्चों को समझाने के कारण बच्चे काफी बेहतर तरीके से समझ पा रहे थे। साथ ही हम दोनों के बीच संवाद भी बेहतर हो पा रहा था। 

 

अनेक पहलूओं पर होता है विकास


एडुलीडर स्मृति जब बच्चों को शिक्षित करने के लिए निकलती हैं, तब केवल बच्चों के जीवन में नहीं बल्कि स्मृति के जीवन में भी कई बदलावों की शुरुआत होती है। जैसे- जब वे कक्षा की कमियों को देखते हुए, अपने तरीकों पर काम करती है, इससे उनके अंदर किसी समस्या को समाप्त करने एवं समस्या से जूझने की प्रवृत्ति विकसित होती है, जो उनके आने वाले जीवन के लिए एक सबक की तरह हो सकती है। 


लड़कियों को मिलता है खुला आसमान

साथ ही उनका अपने घरों से निकलना अन्य लड़कियों के लिए प्रेरणा का काम करता है, जो स्वयं की पहचान बनाना चाहती हैं। बतौर एडुलीडर लोगों से मुलाकात करना, उनकी समस्याओं पर बात करना, अभिभावकों को सही-गलत की पहचान कराना एक अच्छे नेतृत्वकर्ता का विकास करता है, जो लोगों की बातों को सलीके से सुनकर उसके निदान की ओर अग्रसर होता है। वे जहां एक ओर अपनी पहचान बुलंद कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर वे आत्मविश्वास से निर्णय ले रही हैं। स्वच्छंद होकर निर्णय लेने की क्षमता उनके आने वाले जीवन में उन्हें सही गलत की परख करना सिखाएगा ताकि वे सही निर्णय ले सकें। 


विद्यालयों में जाकर बच्चों को शिक्षित करना एवं शिक्षा के प्रति अभिभावकों समेत बच्चों को जागरुक करना, साफ-सफाई, नामांकन, लड़कियों की शिक्षा के महत्व को जन-जन तक पहुंचाना मात्र एक जरिया है, जो उन्हें कल के नेतृत्वकर्ता की तरह खड़ा करेगा। 





   


Thursday, April 13, 2023

राजमणि ने क्यों दी देवराज को रिपोर्टर की संज्ञा?

 

फोटो क्रेडिट- आई सक्षम


मैं काजल के स्कूल प्रेम टोला फ़रदा गई थी। मैंने वहां देखा कि काजल पढ़ा रही है इसलिए मैं सबसे पीछे जाकर दरी पर बच्चों के साथ बैठ गई। मैं जहां बैठी थी, वहीं मेरे बगल में देवराज बैठा हुआ था। पहले जब उसने मुझे देखा, तो वह थोड़ा डरा हुआ था। बहुत समय तक मुझे देखते ही रहा और कुछ नहीं बोल रहा था इसलिए मुझे थोड़ी शंका हुई कि यह बच्चा इतना शांत क्यों है? मैंने बातचीत शुरु करने के लिए उससे पूछा, “आपका नाम क्या है? आप इतने शांत क्यों हैं?” 


मेरे इतना पूछते ही धीरे-धीरे उसने मुझसे बात करना शुरु किया और महज 15 मिनट में ही मेरे साथ इतना घुल-मिल गया कि इतना बोलने लगा कि मुझे मजा आ गया। वह केवल 7-8 साल का ही लेकिन बोलते वक्त थोड़ा लड़खड़ाता है मगर  उसकी आवाज बहुत प्यारी है इसलिए उसे सुनने में काफी अच्छा लगा। 


मैं केवल दो घंटे ही उस क्लास रूम में बैठी थी मगर देवराज ने मुझे उन दो घंटों में ही क्लास रुम और उसके अनुभवों से जुड़ी लगभग 15 के आसपास  घटनाएं बता दीं। जैसे- अपने दोस्तों के बारे में, अपने आसपास में बैठने वाले बच्चों के बारे में, अपने घर के बारे में, अपने गाँव के बारे में, अपने बारे में। उसके बोलने के तरीके से मुझे ऐसा महसूस हो रहा था, मानों मेरे पास कोई न्यूज रिपोर्टर बैठा है, जो मुझे आसपास की खबरें सुना रहा है। 


जैसे-


  • दीदी, हिमांशु पढ़ता नहीं है। दिन भर खाली खेलते रहता है। हम रोज बुलाने जाते हैं, तब ही वह स्कूल आता है। 

  • दीदी, प्रिया पिछले साल भी दूसरा क्लास में ही थी। एकदम नहीं पढ़ती है, अगर नहीं पढ़ेगी तो आगे की क्लास में कैसे जाएगी? दिन भर खाली घर का काम करती है और खेलते रहती है। 

  • दीदी, आपको पता है, शिवानी ना बहुत गंदी लड़की है। हमेशा अपनी छोटी बहन को मारते रहती है। आप बताइए कि बड़ी बहन कहीं छोटी बहन को मारती है! 

  • यहां के लोग ना दीदी बहुत गंदे हैं। जब होली आया था ना तो मेरा झरना चुरा कर लेकर चले गए थे। अब बताइए कि झरना चुरा लिया तो मेरी गाय किसमें रहेंगी? बताइए, अभी इतना धूप किया है। इस समय गाय धूप में रहेंगी तो उनका तबीयत खराब हो जाएगा। अब आप बताइये कि हम पटिया किससे बनाएंगे? 

  • आप बताइये दीदी कि अगर सब बच्चा स्कूल के बाहर गाना बजाएगा, तो स्कूल के अंदर जो बच्चा बैठकर पढ़ रहा होगा, उसको पढ़ने का मन करेगा? हमेशा स्कूल के बाहर खड़ा होकर गाने बजाते रहता है। कोई नहीं पढ़ता है। 


जानें क्या है कक्षा अवलोकन (क्लासरूम ऑब्जर्वेशन)- 


कक्षा अवलोकन का उद्देश्य- 


  • कक्षा के विज़न को पाने में एक साथी के रूम में एडू-लीडर को सपोर्ट करना। 

  • एडू लीडर के निर्देशात्मक कौशल (पढ़ाने का तरीका), शिक्षात्मक नज़रिया (Educational vision), विषय ज्ञान का निरंतर मूल्यांकन कर उनके उपलब्धियों को सराहना और चुनौतियों पर उन्हें प्रशिक्षित करना।

  • छात्रों के विभिन्न समूहों के बीच निर्देश में संभावित असमानताओं की जांच करना और उनके बीच समानता बनाना। 

  • कक्षा निर्देशन और सीखने का सर्वोत्तम माहौल बनाने में एडू लीडर को प्रशिक्षित करना।



वहीं दूसरी ओर इस अनुभव से एक बात प्रतीत हो रही है कि बड्डी के साथ बच्चों का रिश्ता। राजमणि ने जिस प्रकार संवाद शुरु किया और देवराज परत-दर-परत मुखर होते गया, यह बताता है कि बच्चों के अंदर अनेक कहानियां होती हैं, जरुरत बस किसी सुनने वाले की होती है।