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Saturday, October 19, 2024

हमारा स्कूल सबसे प्यारा- कविता

सुपर है, सुपर स्कूल हमारा!

वहां जाओगे जब तुम,
सपनों का संसार मिलेगा,
जीवन का आधार मिलेगा।

सुपर है, सुपर स्कूल हमारा!
खेल का मैदान बड़ा सुहाना,
हर खेल का सामान निराला।
पढ़ने का एक अलग मज़ा,
लिखने की दुनिया भी है सजा।

सुपर है, सुपर स्कूल हमारा!
वहां जाओगे जब तुम,
हर दिन बनेगा खास,
सुपर है, सुपर स्कूल हमारा!

सलोनी

बैच-9, मुजफ्फरपुर


(यह कविता सलोनी कुमारी ने लिखी है। वो छपरा मेघ गांव की रहने वाली हैं। उनकी पढ़ाई गाँव के एजुकेशन इंडिया स्कूल से शुरू हुईं और अभी महंत दर्शन दास महिला कॉलेज मिठनपुरा, मुजफ्फरपुर में पढ़ रही हैं। उन्हें i-सक्षम के बारे में उनकी दोस्त तृप्ति से वर्ष 2022 के अप्रैल माह में पता चला। वो पढ़-लिखकर प्रोफेसर बनना चाहती हैं।)


Monday, April 17, 2023

एडुलीडर स्मृति के प्रयासों से अन्य लड़कियों को मिलती है आसमान में उड़ने की ताकत

फोटो क्रेडिट- आई सक्षम


मैं स्मृति कुमारी बैच-9 की एडुलीडर हूं। मैं आज आप लोगों के साथ आज की कक्षा का अनुभव साझा करने जा रहीं हूं।

आज मेरे स्कूल में कक्षा अवलोकन के लिए रागिनी दी, अनुप्रिया दी और दीपा दी आई हुई थी। कक्षा अवलोकन के लिए जब दीदी ने बच्चों से पूछा कि उनकी फिलिंग क्या है? तब बच्चों ने उन्हें बताया कि वे उत्साहित हैं लेकिन कुछ बच्चे उदास थे। उनकी उदासी का कारण था कि रास्ते में आते वक्त उनकी साइकिल खराब हो गई थी।

इसके बाद जब मैंने एक दूसरे से उनकी पसंद की सब्जी का नाम पूछा, तब उन्होंने कुछ सब्जियों के नाम बताए फिर इसी को मोड़ते हुए मैंने बच्चों से सब्जियों के नाम पूछे और उन्हें पढ़ाया। आज मैंने अंग्रेजी में बच्चों को सब्जी का नाम पढ़ाया। कलात्मक तरह से बच्चों को समझाने के कारण बच्चे काफी बेहतर तरीके से समझ पा रहे थे। साथ ही हम दोनों के बीच संवाद भी बेहतर हो पा रहा था। 

 

अनेक पहलूओं पर होता है विकास


एडुलीडर स्मृति जब बच्चों को शिक्षित करने के लिए निकलती हैं, तब केवल बच्चों के जीवन में नहीं बल्कि स्मृति के जीवन में भी कई बदलावों की शुरुआत होती है। जैसे- जब वे कक्षा की कमियों को देखते हुए, अपने तरीकों पर काम करती है, इससे उनके अंदर किसी समस्या को समाप्त करने एवं समस्या से जूझने की प्रवृत्ति विकसित होती है, जो उनके आने वाले जीवन के लिए एक सबक की तरह हो सकती है। 


लड़कियों को मिलता है खुला आसमान

साथ ही उनका अपने घरों से निकलना अन्य लड़कियों के लिए प्रेरणा का काम करता है, जो स्वयं की पहचान बनाना चाहती हैं। बतौर एडुलीडर लोगों से मुलाकात करना, उनकी समस्याओं पर बात करना, अभिभावकों को सही-गलत की पहचान कराना एक अच्छे नेतृत्वकर्ता का विकास करता है, जो लोगों की बातों को सलीके से सुनकर उसके निदान की ओर अग्रसर होता है। वे जहां एक ओर अपनी पहचान बुलंद कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर वे आत्मविश्वास से निर्णय ले रही हैं। स्वच्छंद होकर निर्णय लेने की क्षमता उनके आने वाले जीवन में उन्हें सही गलत की परख करना सिखाएगा ताकि वे सही निर्णय ले सकें। 


विद्यालयों में जाकर बच्चों को शिक्षित करना एवं शिक्षा के प्रति अभिभावकों समेत बच्चों को जागरुक करना, साफ-सफाई, नामांकन, लड़कियों की शिक्षा के महत्व को जन-जन तक पहुंचाना मात्र एक जरिया है, जो उन्हें कल के नेतृत्वकर्ता की तरह खड़ा करेगा। 





   


Tuesday, April 11, 2023

कक्षा साफ ना होने पर अनन्या ने किया समस्या समाधान कौशल का प्रयोग

फोटो क्रेडिट- आई सक्षम

सामान्यतः जब हमारे जीवन में कोई समस्या आती है या हमारी कोई इच्छा पूरी नहीं होती, तब हम उसे अपनी नियति मान लेते हैं और परिस्थिति से समझौता कर लेते हैं, जो कहीं ना कहीं दृढ़ इच्छाशक्ति की कमी को दर्शाता है जबकि हमारी कोशिश होनी चाहिए कि हम अंत कर प्रयास करें क्योंकि सबकुछ जीत लेने में और अंत तक हार ना मानने में कोई अंतर नहीं है। इस मंतव्य को हमारी एडु लीडर अनन्या ने साबित करके दिखाया है। वे लिखती हैं-  

मेरा नाम अनन्या है और मैं जमुई की रहने वाली हूं। मैं बैच-9 की एडु लीडर हूं। मैं आप लोगों के साथ आज के क्लास रूम का अनुभव साझा करने जा रही हूं। 


इस बार सेशन में मुझे बहुत सारे TLM मिले।  TLM का मतलब Teaching Learning Method है, जिसके जरिए कलात्मक तरीकों से बच्चों को पढ़ाया जाता है इसलिए मुझे TLM बहुत अच्छे लगते हैं। यही कारण था कि TLM मिलने से मुझे बहुत खुशी हुई। मेरी इच्छा था कि मैं रंग-बिरंगे TLM को साफ-सुथरी कक्षा में लगाऊं लेकिन कक्षा अब तक साफ नहीं हुई थी। 



जब नहीं हुई साफ-सफाई


हालांकि मैंने कुछ दिन पहले अपने स्कूल के प्रिंसिपल सर से बात भी किया था कि सर अगर क्लास रूम की साफ-सफाई हो जाती, तो बढ़िया होता। इस पर प्रिंसिपल सर ने कहा था कि हां कक्षा की सफाई भी करवानी थी और पेंट भी करवाना था लेकिन अभी तक काम शुरु भी नहीं हुआ था।  


फोटो क्रेडिट- आई सक्षम

इस पर मैंने सोचा कि बार-बार गुजारिश की लेकिन काम शुरु नहीं हुआ तो क्यों ना मैं खुद ही क्लास रुम की सफाई कर लूं। इसके लिए मैंने एडु लीडर आस्था की अनुमति ली क्योंकि मुझे क्लास को साफ करने में कुछ बड़े बच्चों की आवश्यकता थी, जो मेरी मदद कर सकें। आस्था मेरी बगल की कक्षा में ही क्लास ले रही थीं। आस्था से बात करने के बाद उन्होंने हामी भर दी और क्लास समाप्त होने के बाद बच्चों ने रुक कर क्लास रुम को साफ किया। 


बच्चों के साथ की सफाई 


कुछ बच्चों ने दीवारों पर लगे मकड़ी के जालों को साफ किया, तो कुछ बच्चों ने बेंच-डेस्क आदि को कपड़ों से पोंछा, कुछ बच्चों ने मिल कर फर्श को धोया। यहां सबसे अच्छी बात यह लगी कि जो बच्चे साफ-सफाई नहीं कर पा रहे थे, उन्होंने ऊंचाई पर खड़े बच्चों के बेंच-डेस्क को थामा हुआ था। तकरीबन दो-तीन घंटों की मेहनत के बाद हमारी कक्षा साफ-सुथरी हो गई। अब बारी TLM लगाने की थी। 


एडु लीडर अनन्या ने जिस प्रकार कक्षा की सफाई करने का बीड़ा उठाया, यह उनकी नेतृत्व क्षमता की ओर इंगित करता है। साथ ही परेशानी से भागने या उसे स्वीकार ना करने की इच्छाशक्ति भी क्योंकि TLM लगाने के लिए उन्हें साफ-सफाई की जरुरत थी और साफ-सफाई ना होने की स्थिति में उन्होंने इस परेशानी को स्वयं दूर करने का सोचा, जो उनके समस्या समाधान विधि की ओर इंगित करता है। 


देखा जाए, तो एडुलीडर्स ना केवल शिक्षा के प्रति बल्कि अन्य हिस्सों में भी उभर कर सामने आ रहे हैं क्योंकि कक्षा में पढ़ाने के साथ-साथ जहां एक ओर उनके शिक्षण के कौशल का विकास हो रहा है, वहीं वे नेतृत्व करने और निणर्य लेने में भी आगे आ रही हैं, जिसे ऊपर दिए गए अनुभव द्वारा समझा जा सकता है।  


Friday, April 7, 2023

एडुलीडर के प्रयासों से बच्चियों को मिला हौसला कि वे भी करेंगी हर समस्या का सामना

फोटो क्रेडिट- आई सक्षम


मैं स्मृती कुमारी बैच- 9 मुंगेर जिले की एडुलीडर हूं। आज मैं आप लोगों के साथ अपनी कक्षा का अनुभव साझा करने जा रही हूं।

आज जब मैं कक्षा में गई, तो बच्चे मुझसे मेरा इमोशन मतलब मेरी भावनात्मक स्थिति के बारे में पूछने लगे। उन्होंने मुझसे पूछा, “दीदी, आपको कैसा लग रहा हैं?” उन्होंने मुझसे जिस तरह से मेरे इमोशन के बारे में पूछा, ये देख कर मुझे बहुत खुशी हुई। 

बच्चों ने पूछा मेरा इमोशन 

मैंने उनको बताया कि मैं खुश हूं। साथ ही अपनी खुशी का कारण भी बताया। इसके बाद मैंने बच्चों को मेडिटेशन करवाया फिर बच्चों से उनके इमोशन के बारे में जाना। इस पर बच्चों ने कहा, “वे उत्साहित महसूस कर रहे हैं।” उनके उत्साह को बढ़ाते हुए मैंने उनसे कहा, “आज मैं आप लोगों के लिए कुछ लाई हूं। इतना सुनते ही सभी बच्चे खुश होकर पुछने लगे कि क्या मैं क्या लाई हूं, तो मैंने कहा, “पहले जल्दी से एक मिनट के लिए सभी बच्चे अपनी आंखें बंद किजिए।” 

मेरे इतना कहने के बाद सभी बच्चों ने अपनी आंखें बंद कर ली। इसके बाद मैं कक्षा के लिए जो घड़ी लेकर आई थी, उसे मैंने कक्षा में लगा दिया। इसके बाद सभी बच्चों को आंखें खोलने के लिए कहा। आंख खोलते ही जब बच्चों की नजर घड़ी पर पड़ी, तब उनकी मुस्कुराहट बढ़ गई। बच्चों के चेहरे पर मुस्कान थी और मुझे भी उन्हें खुश देख कर बहुत अच्छा महसूस हो रहा था। 

घड़ी से समय का ज्ञान

आज मैंने बच्चों को गणित का भाग ‘समय’ पढ़ाया कि समय कैसे देखते हैं, घड़ी की बड़ी-छोटी सुई के बारे में बताया फिर मैंने कक्षा के ही एक बच्चे को कहा, “आप घड़ी बना कर दिखाएं और इसे जुड़े सवाल भी करें।” इसके बाद हमने एक खेल खेला और फिर बच्चों में से सोनाक्षी ने बुक रीडिंग करके सबको सुनाया। साथ ही इसके बाद मैंने बच्चों को होमवर्क दिया। 

आज से मेरी कक्षा के जो चौथी के बच्चे थे, वे सभी पाचंवी में चले गये थे। आज से उनकी कक्षा अलग हो गई थी।

आप हमें भूल जाएंगी? 

पांचवी कक्षा की रितिका और प्रियंका मेरे पास आई और बोलने लगी, “दीदी, नई कक्षा में मन नहीं लगता है। अब तो आप हम सबको भूल जाइयेगा। इतना कहते-कहते उनकी आंखों से आंसु आ गए। उन्हें चुप कराते हुए मैंने कहा, “क्यों भूलूंगी? मैं आपकी कक्षा में जरुर आऊंगी।” इतना कहने बाद मैंने उन्हें अपनी बांहों में भर लिया और समझाया मैं तो यही हूं। 

आपको जब मेरे पास आने की इच्छा करें आप आकर बैठ सकते हैं फिर मैंने उन्हें कहा, “आइये बच्चों हम सब एक तस्वीर लेते हैं इसलिए पहले आप रोना बंद किजिए नहीं तो अच्छी तस्वीर नहीं आएगी। बच्चों ने रोना बंद किया और फिर मैंने तस्वीर ली और उनको कहा, “अब मैं इसको रोज देखुंगी, तब तो आपको कभी नहीं भुलूंगी। मेरी ये बात सुनकर वे हंसने लगे। 

मेरे प्रति बच्चों का ऐसा लगाव देखकर मेरा मन भी भावुक हो गया। उस वक्त मुझे एहसास हुआ कि हां, मैंने कक्षा में अपने दोस्त बना लिए हैं। मेरे छोटे और मासूम से प्यारे दोस्त। 

इस अनुभव से कई चीजें सामने आती हैं। जैसे- 

  • एडुलीडर अगर एक महिला हो, तो बच्चे उनसे ज्यादा जुड़ाव महसूस करते हैं। खासकर लड़कियां अपने दिल की बातों को लड़कियों के साथ साझा करने में सहज महसूस करती हैं। 
  • कक्षा में घड़ी का ना होना, एक विषय है लेकिन एडुलीडर के प्रयासों से कक्षा में घड़ी की उपलब्धता होना एक अहम विषय है क्योंकि कई बार हम मुश्किलों के आगे घुटने टेक देते हैं या उसे अपनी नियति मान लेते हैं, मगर एडुलीडर स्मृति ने अपनी पहल द्वारा इस समस्या के समाधान हेतू कदम बढ़ाया और बच्चों को घड़ी से अवगत कराया। 
  • साथ ही वे इस तरह अन्य पीढियों के लिए भी प्रेरणास्त्रोत साबित हो रही हैं, जो भविष्य में बेहतर करना चाहती हैं, या अपनी पहचान बनाना चाहती हैं। जैसे- कक्षा में मौजूद छोटी बच्चियां एडुलीडर को देखकर रोल-मॉडल के रुप में चुन सकती हैं कि हां, मुझे भी समाज में बदलाव लाना है, नेतृत्व करना है और समस्याओं से लड़ना है।


Thursday, April 6, 2023

विद्यालय में प्रार्थना के जरिए एडुलीडर्स की उभर रहा नेतृत्वकर्ता का कौशल

एडुलीडर्स हर रोज जब विभिन्न कक्षाओं में जाते हैं, तब अपने-अपने अनुसार अनेक कार्यों को गति देने का प्रयास करते हैं। जैसे- बच्चों की कक्षा में उपस्थिति सुनिश्चित करना, प्रार्थना करवाना, टीएलएम द्वारा पाठ को समझाना इत्यादि। आज हमारी एक एडुलीडर ने भी अपना अनुभव साझा किया है, जिसमें उन्होंने कक्षा का अनुभव एवं बच्चों की सहभागिता को लिखा है- 


मैं वीणा कुमारी बैच 9 की एडुलीडर हूं। आज मैं आप लोगों के साथ अपनी कक्षा 1 का अनुभव साझा करने जा रही हूं। आज जब मैं विद्यालय गई तो मेरे पहुंचने तक प्रार्थना नहीं हुई थी इसलिए मैंने शिक्षकों के साथ मिलकर प्रार्थना करवाई। इसके बाद मैंने बच्चों को कक्षा में जाने के लिए कहा और सारे बच्चे अपनी-अपनी कक्षा में चले गए। उसके बाद जब मैं कक्षा में गई तो सारे बच्चे एक साथ खड़े होकर गुड मॉर्निंग बोले। यह देखकर मुझे काफी अच्छा लगा। इसके बाद मैंने मेडिटेशन करवाया फिर एक बालगीत करवाया, जिसका नाम The little birds था।  


हालांकि बालगीत कराने के पहले मैंने बच्चों से कविता पर बातचीत की एवं उसके बाद बच्चों को बालगीत करने के लिए कहा ताकि बच्चे बालगीत का मतलब समझ सकें और उसके अर्थ से रुबरु हो सकें। इसके साथ ही मुझे यह बात भी अच्छी लगी कि बच्चों ने मेडिटेशन के दौरान काफी शांति बनाई रखी थी एवं अच्छे से अपने-अपने पाठ को पूरा किया था। 

एडुलीडर्स बन रही अन्य के लिए प्रेरणा 

एडुलीडर्स द्वारा विद्यालयों में जाना और गतिविधियां कराना इस बात की ओर इशारा नहीं करता है कि वे केवल बच्चों को शिक्षित करने जाती हैं बल्कि उनका उद्देश्य अन्य लड़कियों के लिए प्रेरणा बनना भी होता है, जो किसी कारणवश अपनी आवाज नहीं उठा पातीं। यह केवल एक जरिया है, जिससे लड़कियों को अपनी उड़ान भरने का मौका मिलता है और वे अपने निर्णय ले पाती हैं, जो आई-सक्षम का सिद्धांत है- voice and choice. 

जब एडुलीडर्स कक्षाओं की परेशानियों का हल निकालती हैं और परिस्थितियों को अपने अनुसार मोड़ती हैं, तब वे एक ओर समस्याओं से लड़ना और जूढना सीख रही होती हैं। विद्यालय में प्रार्थना करवाना ही इस बात का परिचायक है कि वे अपनी कार्य के प्रति समर्पित हैं और एक कुशल नेतृत्वकर्ता की तरह उभरकर सामने आ रही हैं।