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Tuesday, March 24, 2020

अभी उड़ान बाकी है!


ललिता बताती है की ‘’मैं खुद को बहुत भाग्यवान समझती हूँ की भगवान् ने मुझे एक ऐसा जीवन दिया जिसमें मुझे कई मौके मिले आगे बढ़ने के लिए और मैंने जीवन में कई रुकावटों के बाद भी इन मौकों का बहुत अच्छे से प्रयोग किया और पीछे मुड़ कर नहीं देखा|”

वैसे कहा जाए तो हर किसी के जीवन में आगे बढ़ने के लिए कई मौके आते है लेकिन यह आप पर निर्भर करता है कि है कि आप अपने जीवन को कैसे जीना चाहते हैं? आप चाहे तो, दुःख के समुन्द्र में दुःख का रोना रोकर उसमें डूबते चले जाते हैं , या ख़ुशी की नाव पर सवार होकर उसे पारकर सकते हैं।


ललिता- जीविका आई-सक्षम एडू-लीडर 
ललिता बेगुसराय जिलेके जगदीशपुर गाँव  में पैदा हुईं। वे अपने माता- पिता, नौ बहनो और एक भाई के साथ रहती थी ।पिता रामोतार राय, परिवार के पालने के लिए अपने घर पर ही एक छोटी सी दुकान चलाते थे | ज़ाहिर  सी बात है, लम्बे परिवार होने के कारण आर्थिक तंगी रहती थी,पर ललिताके अंदर पढ़ने  का अलग ही ज़ज्बा था| यह उन दिव्यांग महिलाओं में से हैं जिन्होंने कभी खुद को किसी से कम नही समझा और हमेशा अपने दिल की सुनते हुए आगे बढ़ी| अपने हौसले और जज्बे को बनाये रख उन्होंने खुद को शिक्षित करने का ज़िम्मा उठाया और कम उम्र में ही घर पर बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया | इस तरह वह  अपनी पढाई का खर्च भी निकाल लेती थी और अपने पिताजी की मदद भी किया करती थीं |वह बताती हैं की यह उनके लिए बड़े ही गौरव की बात थी जब उन्होंने अपनी स्नातक की डिग्री हासिल की|

जून 2014 में ललिता का विवाह  मुंगेर जिले के  विजयनगर निवासी श्री जितेन्द्र मंडल से  हुआ। लेकिन उनके आगे बढ़ने और सीखने की चाहत अब  भी बरक़रार थी |कुछ समय पश्चात उन्होंने अपने ससुराल में एक बार फिर से बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया।
ललिता के जीवन में कई  संघर्ष भी आए लेकिन, ललिता ककी दृढ इच्छाशक्ति के सामने  हर समस्या बौनी नजर आती। इसी दौरान वो  जीविका की CM(community mobilizer) सेमिली जिनसे उन्हें आई-सक्षम और जीविका के सहयोग से चलने वाले एडू-लीडर फ़ेलोशिप  कार्यक्रम के बारे में पता चला। उनकी दृढता, कार्य और लगन के कारण उनका इस फ़ेलोशिप में चयन भी हो गया | फ़ेलोशिप के तहत उन्हें शिक्षण पद्धति, सामूहिक नेतृत्व एवं अन्य विषयों पर साप्ताहिक प्रशिक्षण के साथ-साथ अपने गाँव के किसी विद्यालय या सामुदायिक  भवन में पढ़ाना था | जिस गावं में उन्हें पढ़ाना था, उस विद्यालय में पर्याप्त  शिक्षक थे, और कोई भी सामुदायिक भवन नहीं  मिल  रहा था |  प्रारंभ में उन्हें  कई  समस्याओं का सामना  भी करना पड़ा लेकिन वो इनसे पीछे नही हटीं जैसे –पढ़ाने के लिए कमरों की सुविधा  ना होना, बच्चों के बैठने के लिए दरी का न होना , स्कूल के अन्य बच्चों का अनुशासनहीन व्यवहार। इन सभी समस्याओं के कारण शुरुआत में  वह काफी विचलित थीं लेकिन उन्हें पूरा यक़ीन था कि वह अपने परिश्रम , लगन और संस्था की सहायता से इसे जरुर आसान बना देंगी| वह खुद से अपने गाँव के सरकारी विद्यालय में प्रधानाध्यापक से मिली और उन्हें इस एडू-लीडर कार्यक्रम के बारे में बताया| प्रधानाध्यापक द्वारा ललिता को विद्यालय में पढ़ाने के लिए कुछ समय दिया गया| चंद दिनों में ही ललिता द्वारा गतिविधि के साथ पढ़ाने के तरीके से वहाँ के प्रधानाध्यापक और शिक्षक काफी प्रभावित हुए , और उन्हें अलग पढ़ाने के लिए कमरा मुहैया  कराया | आज ललिता उसी विद्यालय में ढाई घंटा बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने का काम कर रही हैं|

कहते हैं कि आप के हुनर व् जज्बे से अगर अन्य लोग प्रभावित होते हैं, तो आप वाकई में एक प्रतिभाशाली व् असरदार इंसान हैं| कुछ ऐसा ही हुआ ललिता के विद्यालय में| ललिता ने कक्षा को रोमांचक बनाने के लिए बच्चों द्वारा बनाये गए चित्र, क्राफ्ट, पोस्टर, शिक्षण अधिगम सामग्री आदि कक्षा की दीवारों पर लगाए| कक्षा एक ऐसा बदला स्वरुप देख कर उनके विद्यालय के प्रधानाध्यापक इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने विद्यालय के अन्य कमरों में कारीगर बुलवा कर बच्चों के सीखने के लिए रंग बिरंगी आकृतियां और अन्य प्रकार की कला दीवारों पर बनवा दी|

विद्यालय में बनवाई आकृतियों के साथ ललिता के विद्यालय के प्रधानाध्यापक
“इनकेपढ़ाने का तरीका मुझे काफी अच्छा  लगता है, सबसे अच्छी बात ये है की बच्चे काफी खुश रहते है “
        - लड्डू पासवान (स्कूल प्रिंसिपल मध्य विद्यालय बिजय नगर जमालपुर )


अगर आप अच्छा कार्य करते हैं तो समय समय पर आपकी परीक्षा भी होती है| कुछ ऐसा ही ललिता के साथ हुआ जब एक दिन उनके विद्यालय पर उनके द्वारा लगायी गयी बच्चों की सभी कला बच्चों ने स्वयं ही फाड़ दी| इस समस्या का हल ढूँढ़ते हुए ललिता व् आई-सक्षम से उनके सहयोगी ने शिक्षक अभिभावक बैठक के दौरान यह बात अभिभावकों के सामने रखने की सोची| पर किसे मालूम था कि शिक्षक अभिभावक बैठक से जहाँ एक ओर इस समस्या का सुधार होगा वहीँ दूसरी और ललिता खुद को समाज में एक महत्ववपूर्ण बिंदु की तरह देख पाएंगी| जब उनके विद्यालय में शिक्षक अभिभावक बैठक हुई तो उन्होंने सभी अभिभावकों में उनके बच्चों की शैक्षणिक स्तिथि की समझ बनायी| साथ ही उन्होंने सभी अभिभावकों को अपने द्वारा ट्रेनिंग के अनुसार किये जा रहे नए प्रयोग के बारे में भी बताया| अभिभावकों के लिए किसी का बच्चों को इस तरह से पढ़ाना और विद्यालय में खुद इस तरह बच्चों की सिक्षा को लेकर एकत्रित होना बिलकुल नया था| मानो उनका एक विशवास सा बन उठा कि उनके बच्चे अब एक बेहतर शिक्षा हासिल कर पायेंगे| ललिता बताती हैं की शिक्षक अभिभावक बैठक के बाद उनकी समाज में काफी इज्ज़त की जाती है और लोग उन्हें स्नेह भरी निगाहों से देखते हैं|

अभिभावक शिक्षक बैठक में शिक्षण अधिगम सामग्री की समझ बनाते हुए ललिता|
आज भी ललिता की प्रेरणा बिलकुल वैसे ही बरकरार है| वह हर सप्ताह होने वालेअपने प्रशिक्षण में हमेशा आधा घंटा पहले उपस्तिथ होती हैं और आज तक कभी अनुपस्थित नहीं हुई हैं| वह अपने फ़ेलोशिप के समूह में कई लोगों की प्रेरणा का स्रोत हैं| इस कार्य में एक मुख्य भूमिका ललिता के जीवन साथी भी निभा रहे हैं जो कि ललिता को ट्रेन से प्रशिक्षण केंद्र आने में कोई समस्या न हो, इसके लिए हर प्रशिक्षण में उनके साथ आते हैं|

ललिता कहती है – एडू-लीडर प्रोग्राम का हिस्सा होने के कारण मेरा सम्मान समाज में बढ़ा है , समाज के लोग मुझे हर काम में सहयोग करते हैं और मैं अपने समय को सही से प्रबंध कर पाती हूँ | वह अपने अन्दर अब अधिक उत्साह भी पाती हैं और उनके हौसलों को बनाए रखने के लिए आई-सक्षम परिवार सदैव उनके साथ खड़ा है| अब वह बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ सरकारी नौकरी की तैयारी भी कर रही हैं।

ललिता कहती हैं – “ यह  तो बस शुरुआत है अभी  तो  बहुत कुछ करना है।अभी तो पंख लगे हैं, अभी उड़ान बाकी है| ”




Thursday, July 12, 2018

Experience on Fellowship Session 11: Kaifee


Fellowship session-11 

इस सेशन में मुझे बेसलाइन क्लास 3 के अंग्रेजी बिषय के बारे में समझाना था , की इस में किस तरह के सवाल है ? और किस सवाल से हम बच्चों का कौन सा स्किल जांच रहे है ?जैसे सुनना ,बोलना ,बढ़ना , लिखना और हमारे फेलो अपने सेण्टर पर जाके टेस्ट अच्छे से ले पाए, और ये भी समझ बनना था की ये टेस्ट पेपर बच्चों और शिक्षक के लिए कितना मत्वपूर्ण है, बिहार बोर्ड के पाठ्यकर्म से कैसे जुड़ा है, असर और इनमे क्या अंतर है, असर ले चुके है फिर इनकी आवश्यकता क्यों है ? इन तमाम बिषय पर चर्चा कर उनको एक बेहतर समझ बनानी थी ,

शुरुआत में लोग 10 मिनट्स लेट आने की वजह से ट्रेनिंग अपने निर्धारित समय से 15 मिनट्स विलंब से प्रारंभ हो पाया, कुछ लोग ट्रेन लेट होने की वजह से जैसे शबनम , प्रशांत ,अनामिका ,अमीषा , अंजलि एक घंटा लेट ट्रेनिंग में शामिल हो पाई , दो लड़कियां और थी जो धरहरा के स्कूल में पढ़ाती थी, अनामिका और अमीषा के साथ आई थी उनकी ट्रेनिंग में भागदारी देखर मै प्रभावित हुआऔर वो पूछ रही थी की कैसे हमलोग इस  ट्रेनिंग में कैसे भाग ले सकती हूँ ,

ट्रेनिंग की शुरुआत Chinese whisper गेम से हुआ सभी लोगों ने अच्छा भाग लिया और काफी खुश थे , गेम के बाद लोगों ने चर्चा की की किसी भी शब्द या वाक्य को अच्छे से सुनना कितना  महत्वपूर्ण है



इसके बाद हमलोगों ने 4 मिनट्स  meditation  किये जिसमे गाना प्ले किया गया ऐ मालिक तेरे बन्दे हम ,
अब समय था ग्रुप बनाने का सभी को चार ग्रुप में बांटा गया और सभी ग्रुप में एक ऐसे लोग थे जो पिछले सप्ताह अपने सेण्टर पर बेसलाइन टेस्ट ( क्लास -1) ले चुके हो , इन चर्चा में एक एक कर उन्हें बिषय दिया गया जैसे पिछले सप्ताह आपने क्या सीखा ? बेसलाइन क्लास -1 का टेस्ट लेने का अनुभव कैसा रहा कहाँ ? कहाँ दिक्कतें आ रही थी , सभी समूह को आपस में चर्चा कर सभी को बताना था , इससे सभी लोग पिछले सप्ताह के सेशन को और अच्छे से और समझ पाए,


 पिछले सप्ताह का अनुभव बताते फेलो

फिर इसी समूह को क्लास -3 का अंग्रेजी बिषय का टेस्ट पेपर दिया गया और  सभी को  प्रतेक सवाल पर चर्चा करने कहा गया  चर्चा के बाद सभी को दुसरे समूह को बताना है की हम बच्चों से टेस्ट कैसे लेंगे, और कौन सा सवाल से हम किस तरह का स्किल जांच रहे है , जैसे सुनना बोलना पढना लिखना , एक टेस्ट पेपर सवाल को चार भाग में बाँट दिया गया थाl सभी समूह बारी –बारी से आकर डेमो कर रहे थे lऔर उनसे दुसरे समूह वाले जाहं उसे समझ में नही आ रहा था वो सवाल कर रहे थे l

                        
दुसरे समूह से सवाल पूछते प्रतिभागी

Reflection -  इस डेमो में मुझे ये देखने को मिला की बहुत सरे लोग टेस्ट कैसे लेंगे उनमे उसे संकोच थाl जैसे वकील जी के टीम के लोग कह रहे थे, की अगर बच्चा नही बना पायेगा तो, बता देंगे और अंग्रेजी का हिंदी बता देंगे , कविता एक्शन के साथ नही करेगा फिर भी पूरा नंबर देंगे, कक्षा में क्या –क्या दीखता है उसपर गोल निशान लगाव इस सवाल पर  धर्मबीर के समूह के लोग पूछ रहे थे, अगर क्लास में ट्रेन की तस्वीर लगी हो तो, क्या बच्चा ट्रेन के चित्र पर गोल घेरा लगा सकता है ?,
इनके बाद ट्रेनर द्वारा (मेरे द्वारा ) डेमो दिया गया और एक एक सवाल का पर चर्चा कर उनको टेस्ट कैसे लेना है कौन से सवाल को समझा सकते है कौन से सवाल का हिंदी मतलब बता सकते किसका नही , किस सवाल पर कितना नबर दे सकते है , इन सभी चीजों को विस्तार से चर्चा कर बताया गया l



Team member’ s observation
Wakil sir –सेशन की शुरुआत बहुत अच्छे से हुआ , baseline  टेस्ट पेपर का revision  बहुत अच्छे से हुआ l
          लोग खुल कर बात कर रहे थे, जिस तरह से ग्रुप बनाया गया बहुत ही अच्छा था l
          मुझे लगा आज सबसे ज्यदा लोग बिना डरे हुए अपनी बात रख रहे थे , आज सभी लोग उत्सुक थे l
          जिस तरह से एक इंग्लिश पेपर के सवाल को चार हिस्सों में बांटा गया, वो बहुत ही बढ़िया लगा l
Pritam-इस ट्रेनिंग से लोग ये समझ पाए होंगे की टेस्ट कैसे लेना है ? और सवाल कैसा है ? किस सवाल से कौन सा स्किल जांचेंगे  l
Sanjay sir –बेसलाइन बेसलाइन टेस्ट पेपर क्या है ? ये टेस्ट कैसे लेंगे कितना नंबर कब देंगे ? ये सभी लोग जान पाए l
           जो लोग नही बोल रहे थे उन्हें भी बोलने के लिए प्रेरित किया जा रहा था  l
          आज का सेशन मुझे बहुत ही अच्छा लगा  l
Dharmveer –आज के सेशन का गतिबिधि बहुत ही मजेदार था l सभी भाग लिए और ये भी समझ में आया की सुनना कितना महत्वपूर्ण है ?

            मैडिटेशन में आज हम दुसरे दुनिया में खो गये थे मैडिटेशन ऐसे ही चार मिनट का होना चाहिएlबेसलाइन टेस्ट पेपर में आज लोग बहुत ही अच्छे से समझ पाए सर का जो
 सर का जो आईडिया था एक पेपर के प्रश्न को चार हिस्सों में बाँटना वो बहुत ही अच्छा लगा l

Monday, May 7, 2018

Aman writes about fellowship session 5th May 2018, with 2nd Batch of Fellows



Experience of 3rd Fellowship session with 2nd batch of i-Saksham Fellows

Date - 05h May2018
Time – 10:30 to 2 pm
Place – Jamui

1. Activity: Tiger-Wall-Gun

शुरुवात :- आज भी सेशन की शुरुआत एक गतिविधि से शुरू हुई जिसमें सभी प्रतिभागियों को दो समूह में बाँट दिया गया और उन्हें अलग-अलग स्थान पर इस गतिविधि को करनी थी जिसमें एक समूह को तनुज और दुसरे को बबलू नेतृत्व कर रहे थे | इस गतिविधि में सभी प्रतिभागी ने अच्छी तरह भाग लिया, बबलू के समूह में जहाँ एक तरफ लड़कियां थी वहीँ दूसरी तरफ लड़कों का समूह बना था | जिसमें लड़कों का समूह सामने आकर अपने आप की व्यक्त (Express) कर प् रहा था वहीँ लड़कियों के समूह को सामने आकर व्यक्त (Express) करने में हिचकिचाहट हो रही थी, तभी दीनानाथ सर (प्रथम संस्था) ने सभी को अच्छे से आगे कर अपने चिन्ह को व्यक्त (Express) करने को कहा उसके बाद सभी अच्छे से भाग ले पा रहे थे | वहीँ दूसरी समूह भी पुरे उत्साह के साथ गतिविधि में भाग ले पा रहे थे |



बबलू प्रतिभागियों को Tiger-Wall-Gun गतिविधि समझाते हुए

इस गतिविधि से जो निकल कर आया वो इस प्रकार है :-
  • सभी प्रतिभागी अपने आप को अच्छे से व्यक्त (Express) कर पा रहे थे
  • प्रतिभागियों में उत्साह बन पाया
2. Silence & Debrief:
साइलेंट गतिविधि करने के लिए सभी प्रतिभागियों को एक वृताकार आकृति में बिठाया गया, इस गतिविधि का नेतृत्व श्वेता द्वारा किया जा रहा था | जिसमें उन्होंने सभी को आंखे बंद करने को कहा और एक गाना बजाया, २ मिनट बाद सभी ने अपनी आंखे खोली |
3. पिछली सप्ताह हमने क्या सीखा:
इस गतिविधि का नेतृत्व अमर द्वारा किया जा रहा था, जिसमें उन्होंने सभी प्रतिभागियों को पिछले सेशन के मुख्य गतिविधि के नाम को अलग-अलग चिट में लिख कर अलग-अलग प्रतिभागियों को दिए | जिन प्रतिभागियों को जिस भी गतिविधि का चिट मिला हो उन्हें उस गतिविधि में क्या समझ आया पुरे समूह को बताना था | इस गतिविधि में प्रतिभागियों को उनकी समझ व्यक्त करने में थोड़ी समस्या हो रही थी वहीँ उस गतिविधि में क्या हुआ को बताने की कोशिश कर रहे थे | जिसमें सिम्पी ने इस बार के साइलेंस को पिछली बार से बेहतर बताया, वहीँ रोहित ने ‘A day in life of fellow’ की गतिविधि को पुरे तरीके से समझाया, शबाना के पास प्रशिक्षण के नियम तय करने की चिट थी जिसमें उन्होंने उस दिन तय किये गए नियमों को समझाया | सभी चिट पर बातचीत पूरी होने के बाद अमर ने पिछले सप्ताह हुए सभी गतिविधियों को एक बार फिर से दुहराया |

4. A day in life of our students:
इस गतिविधि का नेतृत्व प्रज्ञा, अमन और तनुज द्वारा किया जा रहा था, जिसमें सभी प्रतिभागियों को 1, 2 और 3 की संख्या में वर्गीकृत किया और उन्हें क्या करना है समझाया गया | इस गतिविधि में उन्हें अपने केंद्र के किसी विद्यार्थी के बारे में उनकी एक दिन की दिनचर्या लिखनी थी | जिसमें 1 नंबर वाले प्रतिभागी को एक तेज विद्यार्थी, 2 नंबर वाले प्रतिभागी को एक कमजोर विद्यार्थी तथा 3 नंबर वाले प्रतिभागी को अपने केंद्र के किसी छात्रा (लड़की) की दिनचर्या लिखनी थी | जिसमें उन्हें इन पांच तरह की बातों (गतिविधि, लोग, स्थान, खली समय, उनकी चिंताएं) पर वह दिन भर में क्या करते होंगे सोच कर लिखनी थी |
जैसे ही इस गतिविधि को बताया गया, अमित ने तुरंत एक सवाल पूछा “सर, बच्चे दिनभर क्या करते हैं हमें कैसे पता होगा” उन्हें इस पर थोडा सोचने, कोशिश करने को कहा गया |
सभी प्रतिभागियों को तिन अलग-अलग रंग के चार्ट पेपर के टुकड़े उनके नंबर के अनुसार (लाल-तेज़ बच्चे के लिए, पिला-कमजोर बच्चे और सफेद छात्रा (लड़की) के लिए) दिए गए | उसके बाद और सभी को अलग-अलग स्थान पर बैठ कर इसपर सोचने को कहा गया |
सभी प्रतिभागी अलग-अलग स्थान पर बैठ कर अपने छात्र के एक दिन की दिनचर्या को अपनी समझ के अनुसार कागज पर उतारने लगे |  20 मिनट की गतिविधि के बाद लगभग सभी ने अपने-अपने चार्ट पेपर पर अपनी समझ को प्रदर्शित किया |
                  
विकास और प्रवीन अपने बच्चों के       प्रतिभागियों को गतिविधि समझती ममता
बारे में लिखते     

इसके बाद सभी के चार्ट पेपर को केंद्र में लगे धागे की मदद से पिन किया गया और अब सभी प्रतिभागियों को दुसरे प्रतिभागियों द्वारा बनाये गए चार्ट को देखने का अवसर दिया गया, जिसमें सभी बड़ी उत्सुकता के साथ एक-दुसरे के चार्ट को देख रहे थे |
      
                                                 
रोहित, शशि और विकास दुसरे              प्रतिभागी अपनी बरी का इंतजार करते
के चार्ट   देखते    हुए                            
          
 अब वक्त था इसपर चर्चा करने की, लगभग 10 मिनट इस देखने के क्रम के बाद सभी प्रतिभागियों को अपने स्थान पर बैठने को कहा गया और एक-एक कर उनकी इस गतिविधि के बाद की समझ को व्यक्त करने के लिए कहा गया |
चर्चा में मुख्यतः जो बातें सामने आईं उसमें से-
  • ·         बच्चों के बारे में जानकारी नहीं, सिर्फ बच्चों को पढ़ा दिए उतना से ही काम रखते थे, हमें बच्चों पर और समझ बनाने की जरुरत है |
  • ·         तेज बच्चे और कमजोर बच्चों की गतिविधि में अंतर दीखता है |
  • ·         बच्चे अधिकतर मोबाइल छेड़ते रहते है और ज्यादा टीवी देखते हैं |
  • ·         तेज़ बच्चे अपना काम सही समय पर पूरा करते हैं |
  • ·         कमजोर बच्चे ज्यादातर खेलने पे ध्यान देते हैं |
  • ·         कमजोर बच्चे रेगुलर कक्षा नहीं आते हैं |
  • ·         लड़कियों और लड़कों के गतिविधि में बहुत ज्यादा अंतर देखने को मिलता है
  • ·         लड़कियां अधिकतर अपने घर के कामों में उलझी रहती है
  • ·         तेज़ बच्चा थोडा शरारती भी होता है और सब कामों में तेज़ी दिखता है
  • ·         बच्चे घर की परिस्थितियों के कारन स्कूल या केंद्र पर पढने नहीं आपाते हैं |
  • ·         कमजोर बच्चों में ज्यादा घर के कामों का भी बोझ होता है जिससे वह पढाई पे ध्यान नहीं दे पाते हैं |
  •  ·         जो बच्चे कमजोर होजाते हैं, उनमें कमजोर होने की भावना भी बच्चे की सबसे बड़ी चिंता हो जाती है |
  • ·         कमजोर बच्चे में स्कूल नहीं जाने की इक्षा होती है,वे स्कूल या केंद्र पर जाना ही नहीं चाहता है |
  • ·         लड़कियों की चिंताओं में घर से आगे नहीं पढ़ने की बातें जल्द ही उसकी शादी कराने की बातें

इसके बाद हमने 3 सवालों के साथ इसे चर्चा को रोका, जिसमें-
  •           हमें अपने बच्चों के बारे में और अधिक जानने की आवश्यकता है?
  •       अगर हमें बच्चों के बारे में जानना है तो यही गतिविधि अपने बच्चों के साथ करनी होगी, जिससे हमारी समझ और मजबूत हो सके |
  • .      जिस बच्चे के बारे में हमने अपनी सोच-समझ से लिखा है, उनसे जा कर बात करेंगे और उनके बारे में जानने की कोशिश करेंगे |  

5. ASER मूल्यांकन का अनुभव:
पिछले सेशन में हमने ASER मूल्यांकन विधि पर चर्चा किया और प्रतिभागियों को अपने केंद्र के किन्ही 2 बच्चों का मूल्यांकन क्र के आने को कहा |
इस गतिविधि के माध्यम से हम प्रतिभागियों के ASER मूल्यांकन के उनके अनुभव तथा मूल्यांकन कराने में आई समस्या को जानने की कोशिश  कर रहे थे | जिसमें, सभी प्रतिभ्गियों को 4 अलग-अलग समूहों में उनके बड्डी (Buddy) के साथ बाँटा गया-
समूह 1: नलिनी, निकिता, प्रिया, सिम्पी, निखत और अन्नू  
समूह 2: तनुज, स्वेता, विकाश, प्रवीन, प्रीति और आरती
समूह 3: अमर, बबलू, रोहित, विकाश, धर्मराज और बाल्मीकि
समूह 4: ममता, श्रवण सर, शबाना, शशि, मालती, अमित    

सभी समूह के बातचीत के बाद जो बातें सामने आईं-
  • कुछ फेलो ने 10-15 बच्चों का भी मूल्यांकन करवाया था |
  • ज्यादातर फेलो ने बच्चों का मूल्यांकन नहीं कराया था (जिसके कारण उनके अनुभव सामने नहीं आप रहे थे)
  • फेलो को ASER मूल्यांकन को और समझने की आवश्यकता है |
इसके बाद, दीनानाथ सर (प्रथम) ने प्रतिभागियों को ASER मूल्यांकन की और बेहतर समझ के लिए सभी का एक सेशन लिया | जिसमें उन्होंने एक बेहतरीन प्रस्तुतीकरण द्वारा इसे प्रतिभागियों के बिच रखा, और एक-एक कर सभी बातों पर चर्चा की उसके बाद उन्होंने एक और प्रस्तुतीकरण (जो बहुत ही रोचक रूप से बने थे) से सभी का मूल्यांकन किया |
  दीनानाथ सर, प्रतिभागियों को ASER की जानकारी देते हुए 



6. ASER test demo (fellow’s के द्वारा):

अब सभी प्रतिभागियों को उनके बड्डी (Buddy) के साथ (2 प्रतिभागी 1 बड्डी (Buddy)) बैठाया गया जिसमें हर एक प्रतिभागी को ASER मूल्यांकन का Demo कर के दिखाना था | सभी प्रतिभागियों ने इसे अच्छे से पूरा किया और बच्चे की भूमिका भी निभा पाए |
Buddy अपने फेलो के साथ:  

Buddy
Tanuj
Sweta
Mamta
Aman
Bablu
Nalini
Amar
Nikita
Fellows
Vikash (New), Pravin
Prity, Arti,
Malti, Shabana
Shashi, Amit
Balmiki, Dharamraj
Priya, Nikhat
Vikash (Old), Rohit
Annu, Simpi

सेशन समाप्त होने के बाद सभी प्रतिभागियों को सेशन पर फीडबैक के लिए एक चिट दिया गया जिसमें सेशन के मुख्य थीम (theme) लिखे थे और उन्हें 1-5 में अंक देना था | उसके बाद उन्हें इस सप्ताह किये जाने वाले मुख्य कार्य जैसे- सभी बच्चों का ASER मूल्यांकन, बच्चों से उनके 1 दिन को समझना, बच्चों का प्रोफाइल शीट पूरा करना |
  • प्रीति (धरमपुर): जिस वक्त समूह ‘A day in life of student’ के गतिविधि पर चर्चा कर रही थी उस वक्त एक सवाल निकल कर सामने आरहा था जिसमें बच्चों के कमजोर होने का जुम्मेदार कौन? उसमें बाल्मीकि जी ने बातों-बातों में कहा इसका कारन अभिवावक का बच्चों पे ध्यान नहीं देना भी है | उसपर तुरंत प्रीति ने पुरे आत्मविश्वास के साथ पुरे समूह के सामने यह बात रखी की नहीं सिर्फ अभिवावक ही नहीं शिक्षक ज्यादा जिम्मेदार है | अपनी बातों को आत्मविश्वाश के साथ सब के सामने रखना उस वक्त ये बहुत ही प्रभावी था |
  • शबाना: पिछले सेशन कि तुलना में इस बार ज्यादा खुल कर सम्मलित हुई, “A day in life of student” के बाद तुरंत ही उसे अपने बच्चों के साथ करवाने की बात कही |
  • धर्मराज: सेशन समाप्त होने को बाद जाते समय उनसे बात करने के बाद वे ‘बहुत ही उत्साहित दिख रहे थे’ उन्होंने कहा “सम्मलित हो कर बहुत ही अच्छा लगा, बहुत मजा आया” |
Trainer Name:- Aman/Pragya/Amar/Tanuj      Place:- Jamui             Time:-10-01:30
Name of Trainee/Participant :- Rohit kumar, Annu kumari , Simpi kumari, Shashi kumar, Vikash Tanti, Amit kumar , Shabana parween , Vikash kumar, Nikhat khatoon , Parveen kumar, Balmiki kumar Yadav, Arti Kumari, Priya Kumari, Malti Kumari, Prity Kumari, Dharamraj Kumar, Nikita, Mamta, Nalini, Sweta, Bablu, Bipin, Dinanath Sir (Pratham).