Tuesday, May 28, 2024

क्विक हील टेक्नोलॉजी लिमिटेड

नमस्ते साथियों,

अप्रैल माह के सेशन में हमारे साथ कुछ देर के लिए Quick Heal कंपनी की एक सदस्य जुड़ी थी। वो कुछ समय में ही हमलोगो को काफी कुछ सीखा कर गयीं। तो आइए आज उनके बारे में कुछ जानते है थोड़ा बहुत जो मैंने भी गूगल के माध्यम से जाना है।

 

अनुपमा काटकर एक प्रमुख व्यक्ति हैं जो क्विक हील टेक्नोलॉजीज लिमिटेड में काम करती हैं। उनका कार्यक्षेत्र साइबर सुरक्षा और एंटीवायरस समाधान पर है। 



उन्होंने क्विक हील में मूल भूमिका निभायी है और कंपनी के विकास में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है। उनकी प्रतिभा और योगदान से उन्हें कई सम्मान और पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। 


उन्होंने प्रमुख के रूप में संरक्षण और सुरक्षा के क्षेत्र में काम किया है। उनका व्यापक अनुभव और गहरा ज्ञान उन्हें एक अग्रणी साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ बनाता है। उन्होंने क्विक हील के उत्पाद पोर्टफोलियो के विस्तार और आधुनिकीकरण में बहुमूल्य योगदान दिया है। 


अनुपमा काटकर ने अपने करियर में कई प्रमुख कार्यक्रमों और सम्मेलनों में भाग लिया है, जैसे साइबर सुरक्षा सम्मेलन, कार्यशालाएँ और सेमिनार। उनकी विशेषज्ञता और समर्थन ने क्विक हील को अग्रणी स्थान पर स्थापित किया है। 


रश्मि रानी

बैच- 9, मुंगेर 


पुस्तकालय के लिए कमरों की मरम्मत के लिए तुरंत कार्यवाही हुई

नमस्ते साथियों, 

मैंने अपने क्लस्टर वर्क के रूप में पिछले महीने एक गोल तैयार किया था। गोल था कि पुस्तकालय के लिए एक निश्चित जगह का चयन करना। इस कार्य की पूर्ती के लिए मैंने ITC की एक दीदी से बात की। 

समस्या यह थी कि मेरे विद्यालय में दो कक्ष बहुत खराब स्थिति में होने के कारण खली पड़े थे। उपाय था कि या तो कोई उनकी मरम्मत करवाए या नींव से दोबारा बनवाए। तो मैंने सोचा कि एक-दो जगह मरम्मत करने के सम्बन्ध में याचिका की जाए। इसी कारण मैंने ITC की वर्षा दीदी और आंगनवाडी (केंद्र संख्या 40) की सेविका मनीषा कुमारी जी से संपर्क साधा। 


सेविका दीदी ने तुरंत मेरी बात को सुना और उस पर अपनी ओर से जरुरी कार्यवाही की। मैं इतना जानती थी कि ITC  के लोग नजदीकी विद्यालय और आंगनवाडी की बात जल्दी सुनेगें। 

मैंने शाम में सेविका दीदी के साथ विलकर ITC की वर्षा दीदी से बात की। अगले ही दिन वो हमारे विद्यालय में तस्वीरें लेने आ गयीं। 

मुझे तो वास्तव में विश्वास ही नहीं हो रहा था कि इतना जल्दी कोई कैसे कार्यवाही कर सकता है! 

परन्तु यह हो रहा था और मेरी आँखों के सामने हो रहा था। 


विद्यालय से घर लौटी तो ITC के दो सदस्य मेरे घर के सामने आकर मुझे कॉल करके बुला रहे थे। उनको विद्यालय जाकर मेज़रमेंट लेने के निर्देश दिये गए थे। तो मैंने जल्दी से उन्हें विद्यालय लेकर गयी। उन्होंने दोनों कमरों का मेज़रमेंट लिया। 

     A person looking at another person

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मेरी ख़ुशी का ठिकाना तब नहीं रहा जब उन्होंने मुझसे पूछा कि बाथरूम किधर बनवाना है? उसका गेट किस तरफ होना चाहिए और बेक (back) किस तरफ होगा? 


सेविका दीदी अपने काम में व्यस्त थी तो मैंने ही उन्हें सभी जरुरी प्रश्नों के उत्तर दिए। 


मुझे उम्मीद है कि मेरा प्रयास और इतनी जल्दी की गयी कार्यवाही जरुर रंग लाएगी। मुझे अपने गोल की इस प्रोग्रेस को आपके साथ साझा करते हुए बहुत ख़ुशी हो रही है। 


रश्मि रानी 

बैच- 9, मुंगेर 


अभिभावक, एडु-लीडर के साथ कम्युनिटी वर्क में सपोर्ट करने गए

साथियों, 1 मई (मजदूर दिवस) के दिन पापा ने मुझे सुबह जगाते हुए याद दिलाया कि आज तो विद्यालय की छुट्टी होगी, आज के कम्युनिटी वर्क का क्या प्लान है? 


मैंने आँखें खोली और थोड़ा सोचने लगी। रात को सोने से पहले मैं अपने अगले दिन में विद्यालय जाने का प्लान मन में बनाकर सोयी थी। सुबह पापा की बात सुनकर मुझे फिर से याद आ गया कि “अरे आज तो छुट्टी है! कम्युनिटी वर्क करने जाना है”। 


इतने में ही पापा बोले कि आज मैं भी तुम्हारे साथ चलूँगा। आज मेरी भी छुट्टी है। मैं देखूँगा कि तुम अपने कम्युनिटी वर्क में क्या-क्या करती हो? पापा की ये बात सुनकर मेरी ख़ुशी और बढ़ गयी और मैं बल्ले-बल्ले करते हुए झूमने लगी।


मैंने अपने लर्निंग ग्रुप में इन्फॉर्म किया कि आज स्कूल बंद है तो आप कम्युनिटी वर्क कर लीजिये और जिनके पास प्राइम बुक है वो उसी पर प्रैक्टिस कर लीजिये। हालाँकि बाद में मुझे यह भी लगा कि मुझे अपने बडी से पूछ कर कमांड (command) देना चाहिए था। जब मैंने अपने बडी को इसके बारे में बताया तो उन्होंने मुझे सराहा जिससे मुझे बहुत ख़ुशी हुई।


फिर मैं और पापा कम्युनिटी वर्क के लिए निकल पड़े। मैंने गाँव की तीन लड़कियों का आंकड़ा लिया और तय किया कि आज मैंने इन्हीं तीनों से मिलूंगी। साथ ही नयी एडु-लीडर के चयन के बारे में भी बताउंगी। 

मैंने प्लान बनाया कि मैं 9 बजे प्रातः घर से निकलूंगी और साढ़े दस बजे तक वापस आ जाउंगी। परन्तु प्लान के अनुसार कुछ नहीं हो पाया।


मैंने अपने प्लान के अनुसार तीन लड़कियों से मुलाकात की। उनसे जो भी वार्ता करनी थी वो पूरी की। फिर जब पापा को बताया कि अब घर वापस चलते हैं तो पापा पूछने लगे कि बस इतना ही काम करती हो कम्युनिटी में?

चलो कुछ और ग्रामीणों से मिलकर इसकी जानकारी देते हैं। पापा की बात से मुझे मनोबल तो मिला लेकिन मुझे उनकी थोड़ी फ़िक्र भी हो रही थी क्योंकि उनका स्वास्थ्य इतना भी सही नहीं था कि वो मेरे साथ इतनी तपती तेज धूप में घूमें। 


मैंने पापा की बात मानी और हम चार और नए लोगो से मिले। इतने लोगो से मिलकर मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं था। मुझे यह भी समझ आया कि एक बडी का रोल (role) कितना कठिन है। बबिता दीदी (बडी) हम एडु-लीडर्स को समझाती हैं और कितनी मेहनत करती हैं। कम्युनिटी वर्क को खत्म करने के साथ उनके प्रति एक आदर भाव मन में आ रहा था। 


अनुप्रिया

बैच- 9, मुंगेर


Monday, May 13, 2024

नाज़िया और खुशबू का कम्युनिटी बोंड (bond)

मैं अपने क्लस्टर के काम को करने के लिए सप्ताह में दो दिन अपने समुदाय में जाती हूँ। जिसमें औरतों को हस्ताक्षर करना,लड़कियों को पढ़ाई से जोड़ना, बच्चों को स्कूल से जोड़ना, स्कूल में PTM करवाना और इसके अलावा भी अनेक कार्यों को करती हूँ। 

इन कार्यों को करने के दौरान मैंने कम्युनिटी को नज़दीकी से जाना जैसे लड़कियों के मनोभाव क्या हैं, समाज को किन कौशलों की आवश्यकता है जिससे लोग स्वयं को सक्षम समझे आदि। ये सभी अनुभव मेरे लिए भी नए थे।

A close up of a child

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इस बार मैं आपके साथ ऐसे ही एक अनूठे अनुभव को आपके साथ साझा करना चाहती हूँ। मेरी कम्युनिटी में एक ‘नाज़िया’ नाम की बच्ची रहती है। जब भी मैं फील्ड विजिट पर जाती थी तो नाज़िया मुझे बड़े ध्यान से देखती रहती थी। एक दिन मैंने उसे पास बुलाया और थोड़ी बात की। 

वहाँ के लोग कहने लगे कि ये तो किसी के पास नहीं जाती है। फिर जब-जब मैं फील्ड वर्क के लिए कम्युनिटी में निकलती थी तो उससे दो मिनट बात जरुर करती थी। हम दोनों का एक-दूसरे के प्रति लगाव बढ़ने लगा। आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि नाज़िया मात्र दो वर्ष की ही है। मुझे भी नाज़िया से मिलना अच्छा लगने लगा। 

एक दिन मैं नाज़िया को अपने घर भी लायी थी। शाम तक उसे अपने घर में रखा। वो बिलकुल नहीं रोयी। एक-बार भी उसने अपने मम्मी-पापा को याद नहीं किया। 

सच कहूँ तो मुझे भी नाज़िया से बहुत लगाव हो गया है। मैं जब भी कम्युनिटी जाती हूँ, उससे जरुर मिलती हूँ।

खुशबू

बैच-9, मुंगेर                                                                                                                                                 


नौवीं कक्षा की गुड़िया की शादी होने से रुकवायी

कुछ दिनों पहले मेरे मामा जी की बेटी ‘गुड़िया’ जो नौवीं कक्षा में पढ़ती है, वो हमारे घर आई थी। उसकी उम्र अभी 16 साल ही है तो वो अपनी दादी के साथ यहाँ आई थी।  

मेरे ही गाँव के एक बुजुर्ग को गुड़िया अपने लड़के के लिए पसंद आ गयी। वो लड़का डिवोर्सी था। उन्होंने हमारे घर उसके लिए रिश्ता भिजवा दिया और साथ में बोला कि हम लोग दहेज में कुछ नहीं लेंगें। कोई शगुन तिलक नहीं और ना ही कोई सामान।

यह सुनकर सब लोग उसकी शादी के लिए ऐसे खुश होने लगे, मानो कितना एहसान किया हो। घरवाले बोल रहे थे कि गुड़िया के तो जैसे भाग ही खुल गए। और सब लोग शादी के लिए मान भी गए।



मुझे यह सब कुछ ठीक नहीं लगा तो मैंने अपनी मम्मी से बात करना सही समझा। मम्मी ने मुझे डाँटते हुए कहा कि तुम अभी छोटी हो। 


तुम इन सब बातों में मत पड़ो!

तुम्हें दुनियादारी की समझ कहाँ हैं। ऐसे रिश्ते बार-बार नहीं आते हैं। उनकी एक भी माँग नहीं है। फिर मैंने उन्हें समझाया कि गुड़िया अभी पढ़ ही रही है। उसकी उम्र भी शादी करने की नहीं है।


मम्मी ने यह बात मामा जी को बताई। परन्तु मामा नहीं माने। 


फिर मैंने मामा से बात की। उन्हें सब बताया कि वो लड़का कैसा है? शराब पीकर, गाली-गलोच करता है और अपनी पहली पत्नी के साथ मारपीट भी करता था। इसी कारण तो उनका डिवोर्स हुआ था। उसकी पत्नी तो चली गयी वो अभी भी यही सब करता है। 

क्या आप चाहते हैं कि गुड़िया के साथ ऐसा हो? 

अभी गुड़िया की उम्र भी नहीं है शादी की। उसे पढ़ने दीजिये। पढ़-लिख कर कुछ अच्छा करेगी तो तो रिश्ते अपने आप आयेंगें। 

वो मेरी बात मान गए और उन्होंने कहा कि गुडिया अभी आगे की पढ़ाई पूरी करेगी। यह रिश्ता यहीं पर रुक गया और मैं इसे रुकवा कर बहुत खुश महसूस कर रही थी।


सानिया

बैच-10, मुज़फ्फरपुर