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Tuesday, June 6, 2017

सीखें: Teaching poem reading at KGBV Jamui

कविता पाठ
सीखें
-Nalini and Nikita
कविता का उदेश्य :  यह कविता कक्षा 3 से ली गयी है| इस कविता को चुनने के पीछे हमारा उद्देश्य था कि बच्चियां कविता के माध्यम से खेल-खेल में सजीव और निर्जीव के बारे में सीख सके और दूसरा सबसे अहम् कारण यह था कि इस कविता में छोटे-छोटे शब्दों का तथा आसपास में आसानी से देखे जाने वाली वस्तुओं का चुनाव किया गया जिसे बच्चियां आसानी से समझ सकती थी और सीख सकती थी| इस कविता के माध्यम से नैतिकता का भी बोध करवाने का प्रयास किया गया है| इस कविता में जिन शब्दों का प्रयोग किया गया वे सारे शब्द सजीव है, और इसके द्वारा हम उन्हें सजीव और निर्जीव वस्तुओं से अवगत करने में सफल हो सकते हैं| ये हमारा विश्वास था|
हम कक्षा में गए और छत्राओं से जानने का प्रयास किया कि उन्हें कविता पढ़ना कैसा लगता है| सभी कविता के नाम पर खुश हो गयीं| फिर हमने उन्हें बताया आज हम “सीखो” कविता पढेंगे| इस कविता की भूली-बिछड़ी दो पंक्तियाँ सुषमा और गीता को पहले से आती थी| इन दोनों के अलावा ये कविता सभी बच्चियों के लिए नई थी, जबकि सभी बच्चियां कक्षा 6 की छात्रा हैं|
               
हमने उन्हें कविता का उदेश्य और कविता के अर्थ को गाकर और उसके साथ थोड़ा अभिनय करके दिखाया| हमने बच्चियों से भी ऐसा करने को कहा| सभी ने हँसना शुरू कर दिया| सभी को अकेले-अकेले करने में शर्म आ रही थी तो हमने उन्हें 5-5 के समूह में बाँट दिया और 10 मिनट का समय दिया और बोला आप लोग अपने समूह में इस कविता का अभ्यास करें, हमलोग साथ-साथ इस कविता को गायेंगे और अभिनय करेंगे| सभी अपने-अपने समूह के साथ आतीं 2 लड़कियां कविता पाठ करती और 3 लड़कियां गुनगुनाते हुए अभिनय करती| सभी लड़कियों ने बारी-बारी से अपने समूह में कविता का पाठ किया और अपने-अपने तरीके अभिनय किया|
इसके बाद हमने उन्हें कक्षा से बाहर खुले मैदान में जाने को कहा और अपने आस-पास की चीजों को अपनी-अपनी कॉपी में लिखने को कहा| जब बच्चियां कक्षा में वापस आई तो उनमे से एक ने बड़ी उत्सुकतापूर्वक पूछा, “दीदी! हमने इसे क्यों किया?”| फिर हमें सभी बच्चियों से ही पूछा “अच्छा बताओ की हमलोग ने अपने आस-पास की कौन-कौन-सी वस्तुओं को देखा? इन वस्तुओं से हमें क्या-क्या सीखने को मिल सकता है? जैसा की हमने कविता में थोड़ी देर पहले सिखा|”  सभी बच्चियां एकदम शान्त थी पर उनके चेहरे पर ये जानने की इच्छा हो रही थी, हमने इसे क्यों किया| साथ ही साथ वे हमारे सवाल का जवाब ढूंढने का भी प्रयत्न कर रहीं थीं |
             
किसी से जवाब न मिलने के बाद हमने उनसे कहा आपलोगों ने जो-जो लिखा है उसे बारी-बारी से बताइए | ध्यान रहे जो शब्द बोल दिए जा चुके है उनको छोड़कर दूसरा शब्द बोलना है| सभी बच्चियों की कोपी से हमे 37 शब्द मिले | फिर हमने उनसे पूछा इसमें से कौन-सी ऐसी वस्तु है जिसे भगवान ने बनाया है और कौन-सी ऐसी वस्तुएं है जिसे आदमी ने बनाया है? लगभग सभी ने सही-सही चुनाव किया| इसके बाद हमने उन्हें बताया जिसे भगवान ने बनाया उसे सजीव और जिसे आदमी ने बनाया उसे निर्जीव वस्तु कहते है | इससे हमें सजीव और निर्जीव के बारे में बताने में सुविधा हुई और वे भी आसानी से दोनों के बीच के अंतर को समझ पाई| फिर हमने कहा हमलोग इसलिए बहार गए थे, इससे हमें सजीव व निर्जीव वस्तु के बारे में जानकारी प्राप्त हुई | इसके बाद हमने सजीव और निर्जीव के गुणों के बारे में बात करना प्रारंभ कर दिया जिससे उनकी समझ और विकसित हुई |
इसके बाद आश्चर्य की बात यह हुई की कि जब जब हमने सजीव और निर्जीव वस्तु बोला तो अभी भी 7-8 बच्चियां ऐसी थी जिनको दोनों में अन्तर करने में थोड़ी दिक्कत महसूस हो रही थी | बात करने के बाद पता चला की उन्होंने ये शब्द पहली बार सुनी है इसलिए याद रखने में समय लग रहा है |
इसके बाद हमने 37 वस्तुओं के नाम को फिर से बोर्ड पर लिखा और लड़कियों से कहा इन वस्तुओं को सजीव और निर्जीव में बाँटिये | कुल 35 लड़कियों में सजीव और निर्जीव वस्तुओं तक पहुँचने का आंकड़ा कुछ इस प्रकार से है:-
0 सही 0 से 10 तक सही 10 से 20 तक सही 20 से 37 तक सही

7
11

9
8

             
अगले दिन हमने उन्हें अगले दिन के अभ्यास से लिए गृहकार्य दिया | हमने उनसे कहा इस कविता में प्रयुक्त होने वाले शब्दों की सहायता से आप सभी को अपनी-अपनी एक कविता बनानी है | अगले दिन जब हम गए तो सभी ने कुछ-कुछ कहानी सुनाई | इसमें से एक बच्ची पूनम की कहानी इस प्रकार है : - “मुझे ठण्ड लग रही थी और मैंने सोच लिया था की मै अब कुछ नही कर पाउगी परन्तु थोड़ी ही दूर पे आग जल रही थी , मै आग के पास जाकर खड़ी हुई और मैंने देखा की आग से निकलता धुआं उंचाई तक जा रहा है, तो मेरी समझ में आया की मै भी धुएं की तरह उंचाई तक जा सकती हूँ|

निष्कर्ष – इस कविता के द्वारा हमने पाया की 50% से भी ज्यादा बच्चियां सजीव और निर्जीव वस्तुओं का सही-सही  पहचान नहीं कर पायीं  !

जिन बच्चियों को पिछले दो दिनों सही-सही सजीव और निर्जीव वस्तुओं के बारे में समझ नहीं थी उनके लिए हमने तीसरी सेशन में इन्हे एक-एक करके समझाया, सजीव और निर्जीव वस्तु को चित्र के द्वारा बताया | फिर इनसे पूछा सजीव और निर्जीव वस्तु कौन-कौन से वस्तुएं आ सकती है ? उसके गुण बताइए | उनके द्वारा बताने पर हमें यह पुष्टि हो गयी कि वे सजीव तथा निर्जीव के बारे में समझ गयी है| उनका जवाब सही था | वो उदाहरण देने में भी समर्थ थीं | हमारे प्रयास तीन दिन के अभ्यास के बाद रंग लाया |





                                                                                                                      By,
                                                                           

Friday, May 19, 2017

समय : Session on time at KGBV Jamui

       समय 

by Ekta


समय से लड़कर अपना नसीब बदल दे,
इंसान वही जो अपनी तकदीर बदल दे |
कल क्या होगा उसकी कभी ना सोचो,
क्या पता कल समय खुद अपनी लकीर बदल दे|



समय! समय तो हर किसी के जीवन में महत्व रखता है किन्तु विधार्थी जीवन में समय का बड़ा ही महत्व होता है | समय के इसी पावन महत्व को समझाने के लिए मैंने उन्हीं की कक्षा 7 की कविता समय का चुनाव किया, जिसमे बहुत ही सुंदर ढंग से सुरों में तथा सरल शब्दों में समय के महत्व के बारे में बताया गया है|
इस कविता का चुनाव मैंने इसलिए किया क्योंकि इसके अधिकांश शब्दों से छात्राएं परिचित थीं| इस कविता में एक जैसे उच्चारण वाले शब्द बार-बार आ रहे थे, जिससे मुझे इन शब्दों का उच्चारण करवाने के साथ-साथ इन्हें दोहराने और लिखवाने में भी आसानी हो रही थी और छात्राएं भी आसानी से समझ पा रही थीं|

मैंने कक्षा को रोमांचक बनाने के लिए सबसे पहले बोर्ड पर एक घड़ी बनाई और उनसे पूछा कि क्या किसी को पता है आज हम क्या पढ़ने वाले है?

एक बच्ची ने बहुत उल्लास के साथ बताया की हम आज घड़ी के बारे में पढ़ने वाले है और सभी बच्चियों का दिमाग इसी पर केन्द्रित हो गया| किसी ने भी समय का जिक्र नहीं किया तो मैंने सवाल पूछ कर थोड़ी-सी उनकी सहायता की| मेरा सवाल था- हम घड़ी का इस्तेमाल क्यों करते हैं? जवाब आया, समय देखते हैं| फिर मैंने सवाल किया कस्तूरबा में समय पर क्या-क्या करते है? इसका उत्तर हमें हर विद्यार्थी ने कुछ न कुछ कहा| जैसे- किसी ने कहा "समय पर उठते हैं", "समय पर योग करते हैं", "समय पर स्कूल जाते हैं", "खाना खाते हैं", "पढाई करते हैं", "खेलते हैं" और फिर "सोते भी हैं समय पर"| एक ने कहा दीदी समय पर हम परीक्षा भी देते हैं| इसके बाद सभी बच्चियों ने अंदाजा लगा लिया की आज “हम समय के महत्व” के बारे में पढ़ने जा रहे हैं|
               
कविता को मनोरंजक बनाने के लिए मैंने इसे लय में गाना शुरू किया| मेरे गाने के बाद दुबारा हमलोग साथ-साथ किताब में लिखे शब्दों पर अंगुली फेरते हुए गाने लगे| इस प्रक्रिया को 3 से 4 बार दोहराने के बाद सभी बच्चियां कुछ लाइने खुद से बिना किताब देखे गुनगुनाने लगीं|

इनसे जुडी कुछ अन्य एक्टिविटी:
मौखिक सवाल: इस कविता में मैंने अलग-अलग तरह के क्रियाकलाप को सामिल करने का प्रयास किया| मैंने उन्हें समूह में बाँट दिया और सभी के लिए एक सवाल था- आपलोगों को इस कविता से क्या समझ में आया? सामूहिक उत्तर से सभी ग्रुप से मिल गया पर जब सब से एक-एक करके पूछा तो केवल काजल, प्रिया और कविता ने उत्तर दिया| मेरे फिर से समझाने के बाद भी मुझे तीन बच्चियों से कोई उत्तर नहीं मिला|
             
स्मरणशक्ति से लिखना: फिर मैंने कहा अपनी स्मरणशक्ति से कविता में आये शब्दों को लिखें | इस क्रिया में 17 बच्चियों में से 3 ने सही-सही लिखा, 10 बच्चियों ने लिखने में थोड़ी गलती की और 4 बच्चियां नहीं लिख पाई क्योंकि उन्हें लिखने में कठिनाई होती है|
                 
देखकर एक जैसा उच्चारण वाले शब्दों का चुनाव: इस अभ्यास में सभी ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया पर 4 बच्चियां ऐसे करने में असमर्थ महसूस कर रही थी| पर अच्छी बात यह रही की वो इससे मिलती-जुलते शब्द बोल पा रहीं थी|
               
शब्दों से वाक्य बनाना: इस अभ्यास में मैंने कविता में प्रयुक्त होने वाले शब्दों पर वाक्य बनाने के लिए बोला| परिणाम कुछ कारगर नजर नहीं आया, बस वही 3 लड़कियां पहले अभ्यास की तरह बेहतर कर पाई| फिर मैंने सभी को रोजाने प्रयोग होने वाली क्रियाओं को लिखने अथवा बोलने के लिए बोला जैसे;- खाना, पीना, पढ़ना, खेलना आदि| 3 बच्चियां इसमें भी 2-4 से ज्यादा नहीं बता पाई|
 
कहानी लेखन: कक्षा के अंत में मैंने बच्चियों से कहा आपलोग अपने जीवन से जुड़ी कोई सच्ची घटना लिखिए जिसमे आपको समय का महत्व समझ में आया हो| जैसे:- कभी अपने स्कूल जाने में देर कर दी हो और आपको कक्षा में जाने की अनुमति न मिली हो| हमलोग अपनी-अपनी कहानी कल कक्षा में सब से साझा करेंगे|
अगले दिन परिणाम यह निकला कि सभी ने मेरे दिए गए उदहरण को ही 2-2 पक्तियों में खत्म कर दिया| जैसे: मै समय पर नहीं उठ सकी इसलिए मै एक दिन विद्यालय नहीं जा पायी, मैं विद्यालय देर से पहुंची तो मेरे शिक्षक मुझपर बहुत गुस्सा हुए आदि |

निष्कर्ष:- यह पाठ मेरे लिए भी बहुत कारगर साबित हुआ| मुझे बच्चियों की कुछ कमियों और ढेरों खूबियों के बारे में पता चला जो मेरे आगे के अभ्यास में मददगार साबित होंगी| लगभग 75% लड़कियां इस कविता के उद्देश्य को समझने के साथ-साथ इसपर दो शब्द बोल पाई| एक जैसे शब्दों को उनके आवाज से पकड़ना काफी हद तक सभी बच्चियों को आ गया| सबसे अच्छी बात यह हुई कि मै सारी लड्कियों के बारे में जान पाई कि किस छात्रा को किस प्रकार के शब्दों में, किस प्रकार की समस्या है|                                                                          

Thursday, December 1, 2016

Observations at a training session, by Ekta

i-Saksham  follows the practice of one trainer being observed by another while imparting training. This is followed by a fact based feedback, which helps to improve training and mutual learning. The writeup below is from Ekta.

                           प्रशिक्षण अवलोकन का दूसरा दिन- 

Ekta


मेरे लिए ये दूसरा मौका था जब मैं अवलोकन के लिए गयी | परन्तु ये मेरे लिए कुछ विशिष्ट था, क्योंकि मैं उनके अवलोकन के लिए जा रही थी जो फील्ड में काफी प्रतिभा और जानकारी लिये जा रहे थे | मेरी अपेक्षा से अधिक दूरी तय करने के बाद हम उस गाँव तक पहुँच ही गए जहाँ के लिए सफ़र शुरू किया था |
वो स्थान जहाँ मैं और हमारे प्रशिक्षक(trainer) पहुंचे, उस स्थान का नाम कहरडीह है | प्रशिक्षण का केंद्र वहीँ स्थित एक सरकारी स्कूल था, जिसमें माध्यमिक और उच्च दोनों ही स्तरों के लिए शिक्षा की व्यवस्था थी | स्कूल के बाहर तीन लड़कियां हमारा इंतजार कर रही थीं और दो लड़के उस कक्षा के बाहर जहाँ प्रशिक्षण(training) दिया जाना था | हमलोग 20 मिनट विलंब से पहुंचे | हमारे पहुँचते ही सभी उस कक्षा तक पहुँच गए | एक लड़का भागा-भागा बैठने के लिए चटाई लाता दिखाई दिया और एक बच्चें ने शायद इन्ही में से किसी के घर से लिखने के लिए बोर्ड और मार्कर लाया | कक्षा में कुल मिलकर 7 प्रशिक्षु(trainee) आयें |
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जब मैं कक्षा के अंदर गयी तो मेरा ध्यान सबसे पहले जिसपर गया वो था कक्षा के तीनों कोनों में कुछ समेटी तो कुछ बिखरी हई धूल की परत | चौथा कोना दरबाजे के पीछे छुप गया था इसलिए उसका हाल नहीं पता | यह बात मेरे लिए इतना महत्वपूर्ण नहीं होता, पर ये वही केंद्र था जिसपर सभी ने अपने आदर्श केंद्र के लिए स्वछता को चुना था | फिर मेरे मन ने दूसरे ही पल सोचा “ अरे ये सरकारी भवन है, इन भवनों को भी पता है |”
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कक्षा प्रारंभ की गयी | प्रशिक्षक ने सभी प्रशिक्षुओं से पिछले प्रशिक्षण से जुड़ा हुआ सवाल पूछना प्रारंभ किया | पहला सवाल हमलोगों ने पिछली कक्षा में क्या-क्या सीखा? इसका जवाब आने में लगभग 2 मिनट लग गए फिर एक(7) ने जवाब दिया phonics | इसपर प्रशिक्षक ने प्रोत्साहित करते हुए पूछा अच्छा phonics क्या है? इसका जवाब कुछ अस्पष्ट शब्दों में उसी ने दिया जिसने इस शब्द को बोला | कुछ याद आने पर उसके साथी(2) ने उसका सहयोग करते हुए  फिर प्रशिक्षक ने कहा बताइए इसके अलावा हमने क्या पढ़ा तो दूसरे लड़के ने जवाब दिया चित्र पठन | प्रशिक्षक के पूछे जाने पर की चित्र पठन क्या है इसका जवाब एक लड़की (3) ने दिया | प्रशिक्षक को सवालों ने जवाब निकलवाने के लिए हर बार पिछली कक्षा से जुड़े एक से अधिक उदाहरण देने पर रहे थे |
इस अभ्यास की सबसे खास बात यही रही कि प्रशिक्षक ने पिछले कक्षा में दिए गए प्रशिक्षण का सभी से हाल पूछा | सभी से जानने की कोशिश की कि उन्होंने इसे अपनी कक्षा में बच्चों के साथ करना प्रारंभ किया की नहीं |
और दूसरी बात यह दिखी की कोई भी प्रशिक्षु दिए गए प्रशिक्षण को दूहरा नहीं रहे थे | पिछले प्रशिक्षण को लेकर उनकी यादास्त धुंधली थी | इस अभ्यास को कराने के लिए 10 मिनट का समय निर्धारित था जबकि 25 मिनट लग गए |
पढ़ना क्यूँ जरुरी है?    
प्रशिक्षक का अगला सवाल था पढ़ना क्यों जरुरी है? इसका जवाब प्रशिक्षक ने सभी से उनका नाम बोल-बोलकर लेना चाहा | इसके लिए प्रशिक्षक ने बोर्ड का इस्तेमाल किया | दो लड़को (7 और 2) ने इसका जवाब उत्सुकता पूर्वक तुरंत में दो बार दिया | फिर प्रशिक्षक ने सभी से कम से कम एक point बोलने को बोला | एक लड़की (3) को छोड़कर बाकी सभी ने एक-एक तर्क दिया | जब न बोलने वाले (3) से पूछा दुबारा पूछा गया तो उसने बोला मेरे पास कोई point नहीं है तब प्रशिक्षक ने मजाकिया अंदाज में बोला points आने के लिए भी पढ़ना जरुरी है | सभी लोग मुस्कुराने लगे | (7 मिनट)
आप कहानी कैसे पढ़ाते हैं?    
इस अभ्यास को कराने के लिए सभी को 2 समूहों में बाँटा गया | प्रत्येक समूह को शब्दों की डालियाँ सजाने को दिया गया |
इस अभ्यास में पहले समूह से मुख्यतः केवल 2 लोग क्रियाशील थे, जबकि समूह में कुल चार लोग थे | इनके बीच बातचीत बहुत कम हुई, पर कार्ड में क्या लिखा है सभी ने देखा | दूसरे समूह में तीन लोग थे जिसमे धीमे-धीमे स्वर में कुछ बूद-बुदाने की आवाज आ रही थी |
कार्ड सजाने के बाद प्रशिक्षक ने दोनों समूहों को एक-दूसरे की सजी डालियों को देखने को कहा | सभी ने एक-दूसरे की डालियाँ देखी पर कोई संवाद नहीं हुआ | प्रशिक्षक ने सभी के कार्ड को देखा और उसे पढ़कर सुनाया | कुछ देर बाद प्रशिक्षक ने समूह 1 से पूछा अपने ऐसा क्यों सजाया तो उसमें से केवल एक लड़का (2) लगातार बोले जा रहा था |  समूह 2 से पूछे जाने पर एक लड़की (4) बहुत धीरे पढ़ रही             थी तब प्रशिक्षक ने पढने में उसकी मदद की |
C:\Users\I-SAKSHAM\Desktop\IMG_20161116_141750.jpg C:\Users\I-SAKSHAM\Desktop\Xender\image\IMG_20161112_135411.jpg                                     
यह अभ्यास सामूहिक अभ्यास था पर इसमें समूह की भागीदारी बहुत कम नजर आ रही थी | प्रशिक्षक भी शुरू से अभी तक लगातार ओरों से अधिक केवल तीन लोगों (2,3 और 7) से सवाल कर रहे थे | (15 मिनट)
आपके केंद्र पर कहानी पाठ
इसके लिए प्रशिक्षक ने सभी को एक कागज दिया जिसमे कुछ प्रश्न थे | इन प्रश्नों का उत्तर उन्हें हां या नहीं में देना था | दिए गये पेज में क्या करना है प्रशिक्षक ने सभी को समझाया | भरने ने दौरान दो लड़के (1,2) आपस में बात कर रहे थे | इस पेज को भरने में एक लड़के (7) ने लगभग 10 मिनट का समय लिया | उसके होने पर प्रशिक्षक ने उसका नाम लिया और बोला इनका हो गया है | इसी बीच दूसरे लड़के (1) ने भी लिख लिया | प्रशिक्षक ने अब इन दोनों का नाम लिया | लिख लेने वालों में से एक (7) ने अपना मोबाइल देखना शुरू कर दिया | 15 मिनट बीत जाने के बाद भी 3 लोग लिख ही रहे थे | इसपर प्रशिक्षक ने उन्हे 2 मिनट का अतिरिक्त समय दिया |
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अभी तक के अभ्यास में पहली बार प्रशिक्षक ने समय शब्द का इस्तेमाल किया |
इस पेज के कुल मिलाकर 19 शब्द ऐसे थे जिसपर उन्हें हाँ और न में जवाब देना था और एक प्रश्न में अपने विचारों को लिखना था |
प्रशिक्षक ने 3,5,7,10,15,16,18,19,12 और 9 नंबर के प्रश्नों पर क्रमशः बातचीत की | सभी अपना जवाब ईमानदारी से दे रहे थे | प्रशिक्षुओं द्वारा लिखे गए आखरी प्रश्न पर कोई बातचीत नहीं की गयी |
  • आपके केंद्र पर बच्चे कैसे कहानी पढ़ते हैं?
    (Decoding का प्रचलन) - इस अभ्यास पर प्रशिक्षक ने कोई वार्तालाप नहीं किया |
  • कहानी/कविता से कक्षा की शुरुवात- इस बिंदु पर भी कोई बातचीत नहीं की गयी |
पढ़ना कैसे सुलभ हो  
इस भाग में प्रशिक्षक ने सभी के हाथ में लगभग चार पन्ने का लेख दिया | सभी प्रशिक्षु इसे ध्यान से पढ़ रहे थे | सभी पढने में इतने व्यस्त थे की मुझे बस बाहर मैदान में खेल रहे बच्चों की आवाज सुनाई दे रही थी | सभी के साथ के साथ-साथ हमारे प्रशिक्षक भी उतनी ही गहराई से नजर बिना इधर-उधर किये पढ़ रहे थे मनो सभी की तरह उन्होंने भी इन शब्दों को यहीं देखना शुरू किया हो |
प्रशिक्षक ने पढ़ने के बाद सभी प्रशिक्षुओं से कहा “जिनका-जिनका हो जायेगा वो चुटकी बजा दें |”
मिनट बाद सभी ने चुटकी बजा कर पढ़ लेने का संकेत दिया |
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इसके बाद प्रशिक्षक ने सब से सवाल पूछा :–
क) यह document किया है?
ख) कौन-सा point पढ़कर अच्छा लगा?
पहले प्रश्न का उत्तर मिला-जुला मिला परन्तु दूसरे प्रश्न पर सभी ने अपनी-अपनी राय रखी | 7 में से 3 को fluency का समर्थन किया, दो ने चित्र पठन और एक ने phonic की बात कही | एक लड़का (2) बोलते-बोलते चुप हो गया क्योंकि एक लड़की (3) उसपर हंसने लगी | प्रशिक्षक ने इस बात पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दिया और अभ्यास को आगे ले गए |
इस अभ्यास के शुरुआत के तीन बिन्दुओं पर प्रशिक्षक केवल पढ़ते और समझाते गए पर चौथे बिन्दुओं से उन्होंने उनसे इससे सम्बंधित कुछ सवाल और उदाहरण लेना शुरू किया | इस अभ्यास में board का इस्तेमाल किया गया | (30 मिनट)  
इस अभ्यास के लिए कुल मिलाकर 20 मिनट का समय निर्धारित किया गया था पर इसमें लगभग 45 मिनट लग गया |
कक्षा के अंत होने पर पूरी प्रशिक्षण का अवलोकन करने के लिए प्रशिक्षक ने गाना बजाया और सभी को घूमने के लिए बोला | गाना बंद होने पर सभी को अपना एक पार्टनर चुनना था और बात करनी थी की अपने आज क्या सिखा | इस अभ्यास में 2-2 की संख्या में 4 समूह बने जिसमे हमारे प्रशिक्षक भ सामिल थे | समूह का चुनाव सभी ने अपने मन से किया, जिसमे पाया गया की सभी ने अपने दोस्तों को ही अपना पार्टनर बनाया | पहले समूह की दो लड़कियां(5 और 6) ने आपस में समूह बनाया | इन्होने बहुत कम बातचीत की | ये लड़कियां प्रशिक्षण के दौरान भी साथ में बैठी थी | इन दोनों ने  प्रशिक्षण के दौरान भी बहुत कम बोला | इनके अतिरिक्त समूह-2 दो लड़कियों(3 और 4) आपस में बात कर रही थी पर उनका वार्तालाप 1 मिनट के अन्दर समाप्त हो गया | तीसरे समूह में दो लड़के (2 और 7) थें | इन दोनों ने आपस में बातचीत की | चौथे समूह में एक लड़का(1) और प्रशिक्षक मौजूद थे | इस समूह में भी बातचीत हुई | (लगभग 5 मिनट)
इस अभ्यास के बाद प्रशिक्षक ने सभी प्रशिक्षुओं से कहा “ अभी 3:35 का समय हुआ है | क्या आपलोग 20 मिनट का अतिरिक्त समय और दे सकते है? इसपर एक प्रशिक्षु(3) ने कहा अब तो 3:30 बाज गया है अब हमारे पास समय ही समय है | आज नहीं पढ़ा पाएंगे |
इसके बाद प्रशिक्षक ने उन्हें एक नन्ही लड़की की कहानी पढने दी | सभी ने कहानी पढ़ी | प्रशिक्षक ने ने उनसे कहा “ अगर आपको इस कहानी को आपकी कक्षा में पढ़ते तो कैसे-कैसे सवाल पूछते?”
सभी ने अलग-अलग तरीके का सवाल किया | इसके बाद प्रशिक्षक ने ने सभी से कहा “ आप सभी इसमें आने वाले शब्द बताइए|“ इस अभ्यास के लिए प्रशिक्षक ने  2 मिनट का समय दिया | सभी ने एक या दो शब्द निकल कर दिया | (20 मिनट)
                   C:\Users\I-SAKSHAM\Desktop\Xender\image\IMG_20161112_145346.jpg
प्रशिक्षक ने चलते-चलते सभी को एक गृहकार्य दिया- “आप सभी एक-एक कहानी बना कर लाइयेगा |”
समय की कमी होने के कारण बाकी के अभ्यासों को अगली कक्षा को सूपुर्द कर दिया गया |