मुंगेर ।
Wednesday, July 16, 2025
"ख़ुशी की जिद और वर्षा की जीत"
मुंगेर ।
Tuesday, March 18, 2025
हलीमपुर गाँव की पहली झलक
जैसे ही हम उस गाँव में पहुँचे, वहाँ की कई चीज़ों ने मेरा मन मोह लिया—मिट्टी के घरों पर बनी सुंदर पेंटिंग, पुराने जमाने में उपयोग होने वाली चीज़ें, खेतों के बीच से गुजरती कच्ची-पक्की सड़कें, और हर ओर फैली हरियाली। गाँव का यह सरल, पर मनमोहक दृश्य मुझे बहुत आकर्षित कर रहा था।
एडु लीडर, शिवम की माँ से उनकी पढ़ाई को लेकर बात कर रही थीं। उसी दौरान, उनकी दादी, कमला देवी जी, मुझसे बहुत आत्मीयता से बातचीत करने लगीं। उन्होंने मुझसे पूछा—
"बेटी, तुम कहाँ से आई हो?" "तुम्हारा नाम क्या है?" "तुम क्या करती हो, क्या पढ़ाई कर रही हो?"
उनका बात करने का आत्मीय अंदाज मुझे बहुत अच्छा लगा। बातचीत के दौरान, उन्होंने अपने पोते की पढ़ाई को लेकर अपनी इच्छाएँ और विचार साझा किए, जिससे उनकी शिक्षा के प्रति जागरूकता स्पष्ट झलक रही थी।
उन्होंने आगे बताया कि उनका सरकारी शिक्षिका के पद पर चयन भी हो गया था, लेकिन उनके पति ने उन्हें नौकरी करने की अनुमति नहीं दी, क्योंकि उस समय घर की बहूओं का बाहर जाकर काम करना समाज में स्वीकार्य नहीं था। हालाँकि, उन्होंने अपने बच्चों और बहू की पढ़ाई को हमेशा प्राथमिकता दी।
उनकी बहू ने शादी के बाद स्नातक पूरा किया और बिहार पुलिस तथा एसएससी की परीक्षाओं के लिए आवेदन भी किया, लेकिन सफल नहीं हो सकीं। इसके बाद, पारिवारिक जिम्मेदारियों में व्यस्त होने के कारण उनकी पढ़ाई छूट गई।
शिक्षा के प्रति जागरूकता और आत्मनिर्भरता
उनकी सोच, शिक्षा के प्रति जागरूकता, आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास ने मुझे बहुत प्रभावित किया। बातचीत के अंत में, उन्होंने मुझसे कहा—
जो सुनकर मेरे मन में उनके प्रति और भी सम्मान बढ़ गया।
जब हम वहाँ से जाने लगे, तो उन्होंने प्यार भरे शब्दों में कहा—
"बेटी, फिर जरूर आइएगा,"
स्मृति कुमारी
बड़ी इंटर्न, मुंगेर
Monday, April 17, 2023
एडुलीडर स्मृति के प्रयासों से अन्य लड़कियों को मिलती है आसमान में उड़ने की ताकत
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| फोटो क्रेडिट- आई सक्षम |
मैं स्मृति कुमारी बैच-9 की एडुलीडर हूं। मैं आज आप लोगों के साथ आज की कक्षा का अनुभव साझा करने जा रहीं हूं।
आज मेरे स्कूल में कक्षा अवलोकन के लिए रागिनी दी, अनुप्रिया दी और दीपा दी आई हुई थी। कक्षा अवलोकन के लिए जब दीदी ने बच्चों से पूछा कि उनकी फिलिंग क्या है? तब बच्चों ने उन्हें बताया कि वे उत्साहित हैं लेकिन कुछ बच्चे उदास थे। उनकी उदासी का कारण था कि रास्ते में आते वक्त उनकी साइकिल खराब हो गई थी।
इसके बाद जब मैंने एक दूसरे से उनकी पसंद की सब्जी का नाम पूछा, तब उन्होंने कुछ सब्जियों के नाम बताए फिर इसी को मोड़ते हुए मैंने बच्चों से सब्जियों के नाम पूछे और उन्हें पढ़ाया। आज मैंने अंग्रेजी में बच्चों को सब्जी का नाम पढ़ाया। कलात्मक तरह से बच्चों को समझाने के कारण बच्चे काफी बेहतर तरीके से समझ पा रहे थे। साथ ही हम दोनों के बीच संवाद भी बेहतर हो पा रहा था।
अनेक पहलूओं पर होता है विकास
एडुलीडर स्मृति जब बच्चों को शिक्षित करने के लिए निकलती हैं, तब केवल बच्चों के जीवन में नहीं बल्कि स्मृति के जीवन में भी कई बदलावों की शुरुआत होती है। जैसे- जब वे कक्षा की कमियों को देखते हुए, अपने तरीकों पर काम करती है, इससे उनके अंदर किसी समस्या को समाप्त करने एवं समस्या से जूझने की प्रवृत्ति विकसित होती है, जो उनके आने वाले जीवन के लिए एक सबक की तरह हो सकती है।
साथ ही उनका अपने घरों से निकलना अन्य लड़कियों के लिए प्रेरणा का काम करता है, जो स्वयं की पहचान बनाना चाहती हैं। बतौर एडुलीडर लोगों से मुलाकात करना, उनकी समस्याओं पर बात करना, अभिभावकों को सही-गलत की पहचान कराना एक अच्छे नेतृत्वकर्ता का विकास करता है, जो लोगों की बातों को सलीके से सुनकर उसके निदान की ओर अग्रसर होता है। वे जहां एक ओर अपनी पहचान बुलंद कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर वे आत्मविश्वास से निर्णय ले रही हैं। स्वच्छंद होकर निर्णय लेने की क्षमता उनके आने वाले जीवन में उन्हें सही गलत की परख करना सिखाएगा ताकि वे सही निर्णय ले सकें।
विद्यालयों में जाकर बच्चों को शिक्षित करना एवं शिक्षा के प्रति अभिभावकों समेत बच्चों को जागरुक करना, साफ-सफाई, नामांकन, लड़कियों की शिक्षा के महत्व को जन-जन तक पहुंचाना मात्र एक जरिया है, जो उन्हें कल के नेतृत्वकर्ता की तरह खड़ा करेगा।
