Showing posts with label awareness. Show all posts
Showing posts with label awareness. Show all posts

Wednesday, January 29, 2025

अपनी आवाज़ को अपनाई और पहचान बनाई : रंगीला

एक छोटे से गाँव मुहमदपुर की i-सक्षम में बैच-10 की एडू-लीडर रंगीला हैं। जो खुद में और अपने समुदाय में सकारत्मक प्रभाव छोड़ रही है। उनका आत्मविश्वास बढ़ना, अपने आवाज को अपनाना और दूसरों के साथ स्नेहपूर्ण संबंध बनाना सच में एक बड़ी उपलब्धि है।

महिलाओं को जागरूक करने की पहल


रंगीला ने अपने समुदाय में जाकर महिलाओं को मासिक धर्म में स्वच्छता से जुड़ी जरूरी जानकारी प्रदान की।

उन्होंने लगभग 10 महिलाओं से मिलकर इस विषय पर गहरी बातचीत की। इसके अलावा, वह अपनी स्थानीय समुदाय की दो महिलाओं को हस्ताक्षर सिखाने में भी मदद की। यह उनको दृष्टिकोण को दर्शाता है जिसमें एक सशक्त लीडर केवल ज्ञान बांटने तक समित नहीं रहता, बल्कि अपने जीवन के संघर्ष और व्यक्तिगत गुणों से भी लोगों को प्रेरित करता है।


चुनौतियों का सामना और प्रेरणा 


रंगीला का अपने पहचान बनान और कठिनाइयों का सामना करते हुए आगे बढ़ना यह दिखता है की कैसे धैर्य, शांति और आत्मविश्वास के साथ किसी भी चुनौती को पर किया जा सकता है। उनको यह प्रयास से यह स्पष्ट होता है की शिक्षा और जागरूकता का दायरा सिर्फ व्यक्ति विशेष तक समित नहीं रहता, बल्कि यह समाज में व्यापक बदलाव लाने की क्षमता रखता है। 

समुदाय में लीडरशिप की भूमिका 
एक एडू लीडर का प्रभाव सिर्फ विद्यालय या कार्यक्षेत्र तक समित नहीं होती, बल्कि वह अपने समुदाय और परिवार में भी सकारत्मक परिवर्तन लाता है। रंगीला ने इस बात को पूरी तरह प्रमाणित किया है। उनको यह प्रयास न केवल प्रेरणादायक है बल्कि यह दिखता है की छोटे कदम भी बड़े बदलाव की नींव रख सकते हैं।


  

शिक्षा के प्रति दृढ़ संकल्प
रंगीला अपने गाँव की पहली लड़की हैं जो घर से बाहर जाकर पढाई करने की इच्छा रखती हैं। यह न केवल उनके लिए बल्कि पूरे समुदाय के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने छपरा के अखंड ज्योति आँख अस्पताल के त्योहार में भी भाग ले कर अपनी सहभागिता दिखाई।
अंतर्मन से नेतृत्व की सीख
उनकी कहानी यह सिखाती है कि जब कोई व्यक्ति अपने आत्मविश्वास और जुनून के साथ आगे बढ़ता है, तो वह न केवल अपने जीवन में बदलाव लाता है बल्कि अपने आसपास के समाज को भी प्रेरित करता है। रंगीला जैसे लोग यह सिद्ध करते हैं कि सच्चा नेतृत्व दूसरों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने से परिभाषित होता है।

राधा, बड़ी

मुजफ्फरपुर







Friday, April 7, 2023

विश्व स्वास्थ्य दिवस पर हुई एडुलीडर्स और बच्चों के स्वास्थ्य पर चर्चा

विश्व स्वास्थ्य दिवस, 7 अप्रैल 2023 के मौके पर आई सक्षम में भी स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को लेकर ऑनलाइन आयोजन किए गए। विश्व स्वास्थ्य दिवस 2023 की थीम "सभी के लिए स्वास्थ्य" है। इस विषय के साथ, डब्ल्यूएचओ पिछले सात दशकों में जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद करने वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य सफलताओं को देखने का अवसर प्रदान करता है।

इस मौके पर हमारी बड्डी एक्जीक्यूटिव तानिया ने अपने ऑनलाइन सेशन का अनुभव साझा किया है। वे लिखती हैं 

Edu leaders के साथ चर्चा

दोस्तों, आज विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर हमने edu-leaders के साथ साथ बच्चों के स्वास्थ्य और लड़कियों के स्वास्थ्य के बारे में भी बात की, जिसमें बच्चों के स्वास्थ्य की समस्या सबसे बड़ी समस्या के रूप में निकल कर सामने आई। 

बच्चों में ज्यादातर पेट दर्द, निमोनिया और बुखार की समस्या देखी गई, जिसका कारण edu-leaders ने बताया कि बच्चे काफी ज्यादा जंक फूड खाते हैं और साफ़-सफ़ाई का पालन नहीं करते। यही कारण है कि उन्हें संक्रमण की समस्या रहती है। 


साथ ही 0-5 वर्ष के बच्चों में संक्रमण के कारण निमोनिया होने का खतरा ज्यादा होता है। साथ ही बच्चे की माँ भी अपना ख्याल नहीं रखती इसलिए वे दोनों शारीरिक रूप से कमजोर हो जाते हैं।

इसमें edu-leaders ने कहा, "हम बच्चों और उनके अभिभावक को पौष्टिक आहार के प्रति जागरूक करेंगे। साथ ही साफ सफाई के बारे में भी बताएंगे।"

बीएमआई के बारे में जानकारी 

मैंने कल बीएमआई मतलब बॉडी मास इंडेक्स के डाटा को देखा। वहां मैंने पाया कि 93 लड़कियों व महिलाओं में 48 लडकियां ऐसी है, जिनका वजन उनके उम्र के हिसाब से नहीं है , मतलब वे अंडरवेट है।


मैंने इस आंकड़े को रखते हुए जब सेशन में बात की। मेरा सवाल था, लड़कियों में ज्यादातर कम वजन होने की समस्या क्यों है? बातचीत में उन्होंने बताया कि सबसे बड़ी समस्या गुस्सा होना, खाना समय पर न खाना और तनाव लेना है।

भोजन और गुस्सा अलग 

edu-leaders बता रहीं थीं के जब वो गुस्सा होती है, तो खाना खाना ही छोड़ देती है। अधिकांश लड़कियों का यही मानना था। मैं अपनी बात कहूँ तो कभी-कभी मैं भी ऐसा करती हूँ क्योंकि कभी कभी समय के अभाव में खाना छूट जाता है।

इस विषय पर edu-leaders का सुझाव रहा कि साथ में हमेशा अंकुरित मूंग, चना रखा जाना चाहिए। कुछ मौसमी फलों को भी रखा जा सकता है। हालांकि भोजन और तनाव पर ज्यादा बातचीत नहीं हो पाई।


सबने ली स्वास्थ्य की शपथ

आज सभी edu-leaders ने मिलकर शपथ लिया कि वे समय पर खाना खाएंगे और गुस्सा आने पर जिस वजह से गुस्सा आ रहा है, उस बारे में किसी से बात करेंगे या अपने आपको शांत करने का प्रयास करेंगे।

मैं इस दिवस पर इतना कहना चाहूंगी हम सबको अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि "हम हैं, तो सब कुछ है और हम नहीं तो कुछ भी नहीं है।" "जितना जरुरी इस दुनिया के काम या लोग हैं, उतना ही जरुरी।हमारा शरीर भी है इसलिए खुद को शरीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रखें।"