Friday, April 4, 2025
"मैं बदल गई हूँ!"
Wednesday, January 29, 2025
अपनी आवाज़ को अपनाई और पहचान बनाई : रंगीला
एक छोटे से गाँव मुहमदपुर की i-सक्षम में बैच-10 की एडू-लीडर रंगीला हैं। जो खुद में और अपने समुदाय में सकारत्मक प्रभाव छोड़ रही है। उनका आत्मविश्वास बढ़ना, अपने आवाज को अपनाना और दूसरों के साथ स्नेहपूर्ण संबंध बनाना सच में एक बड़ी उपलब्धि है।
महिलाओं को जागरूक करने की पहल
रंगीला ने अपने समुदाय में जाकर महिलाओं को मासिक धर्म में स्वच्छता से जुड़ी जरूरी जानकारी प्रदान की।
उन्होंने लगभग 10 महिलाओं से मिलकर इस विषय पर गहरी बातचीत की। इसके अलावा, वह अपनी स्थानीय समुदाय की दो महिलाओं को हस्ताक्षर सिखाने में भी मदद की। यह उनको दृष्टिकोण को दर्शाता है जिसमें एक सशक्त लीडर केवल ज्ञान बांटने तक समित नहीं रहता, बल्कि अपने जीवन के संघर्ष और व्यक्तिगत गुणों से भी लोगों को प्रेरित करता है।चुनौतियों का सामना और प्रेरणा
राधा, बड़ी
मुजफ्फरपुरFriday, December 27, 2024
रुकशाना खातून: एक शिक्षक की प्रेरणादायक कहानी
रुकशाना खातून: एक शिक्षक की प्रेरणादायक कहानी
यह कहानी रुकशाना खातून की है, जो बिहार के उत्क्रमित मध्य विद्यालय, बुधनगरा में पढ़ाती हैं। अपने छोटे-छोटे लेकिन प्रभावशाली प्रयासों से रुकशाना ने न केवल अपने समुदाय में बदलाव लाया, बल्कि पढ़ाई के प्रति एक नई सोच भी पैदा की।
गाँव के चाचा-चाची और आई-सक्षम का परिचय
रुकशाना के लिए उनका काम सिर्फ स्कूल तक सीमित नहीं है। वे अपने गाँव के चाचा-चाचियों से जुड़कर उनके जीवन में भी शिक्षा का उजाला फैलाने का प्रयास कर रही हैं। एक दिन जब वे गाँव में गईं, तो एक चाचा ने पूछा, "रुकशाना, क्या तुम्हें सरकारी नौकरी मिल गई?"
रुकशाना मुस्कुराते हुए बोलीं, "नहीं चाचा, मैं आई-सक्षम संस्था से जुड़ी हूँ। यह संस्था हमें बच्चों और समुदाय की बेहतरी के लिए काम करने का मौका देती है।" जब चाचा-चाचियों ने यह सुना, तो वे बहुत खुश हुए।
हस्ताक्षर से शुरू हुआ बदलाव
एक दिन रुकशाना ने अपने गाँव के एक चाचा से पूछा, "क्या आपको हस्ताक्षर करना आता है?" चाचा ने शर्माते हुए कहा, "थोड़ा बहुत आता है।"
रुकशाना ने तुरंत उन्हें हस्ताक्षर करना सिखाया। अगले दिन, वही चाचा उनके घर आए और बोले, "रुकशाना, क्या तुम मुझे रोज एक घंटा पढ़ा सकती हो?"
रुकशाना ने खुशी-खुशी यह प्रस्ताव स्वीकार किया। उन्होंने चाचा को अक्षर, गिनती, और पढ़ाई का पहला
10 दिन में बड़ा बदलाव
सिर्फ 10 दिनों में चाचा ने:
'अ' से 'ज्ञ' तक पढ़ना और लिखना।
'A' से 'Z' तक अंग्रेजी अक्षरों को समझना।
'1' से '100' तक की गिनती सीख ली।
रुकशाना को अब पूरा विश्वास है कि चाचा जल्द ही किताबें भी पढ़ने लगेंगे।