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Tuesday, December 31, 2024

मीडिया की दुनिया में पहला कदम: डर और हिम्मत की जंग

 मीडिया की दुनिया में पहला कदम: डर और हिम्मत की जंग

आज मैं आप लोगों से सोशल मीडिया और कम्युनिकेशन टीम के साथ जुड़े अपने अनुभवों को साझा करना चाहती हूं। यह एक ऐसी कहानी है, जिसमें डर, संघर्ष, लगातार प्रयास और अंततः सफलता का संगम है।

शुरुआत: जब मिली बड़ी चुनौती
लगभग चार महीने पहले की बात है, एक मीटिंग के दौरान मुझे एक जिम्मेदारी सौंपी गई। मुझे अपने जिले की न्यूज़ को स्थानीय अखबारों में प्रकाशित करवाने और i-सक्षम से जुड़ी लाइव न्यूज़ दिखाने का लक्ष्य दिया गया। सुनने में तो यह काम आसान लग सकता था, लेकिन मेरे लिए यह किसी पहाड़ पर चढ़ने जैसा था।
क्योंकि मैं ना किसी मीडिया पर्सन को जानती थी, ना कभी किसी रिपोर्टर से बात की थी। मेरे पास उनका कोई नंबर नहीं था। मुझे बस अखबार के ऑफिसों के नाम और उनके जानकारी मालूम थे—दैनिक जागरण, प्रभात खबर, दैनिक भास्कर और हिंदुस्तान। लेकिन यह सब जानकारी तब तक बेकार थी, जब तक मैं कोई ठोस कदम नहीं उठाती।

डर के आगे जीत है
मैंने तय किया कि डर से भागने के बजाय इसे हराने की कोशिश करूंगी। सबसे पहले मैं दैनिक जागरण और दैनिक भास्कर के ऑफिस गई। वह दिन मैं कभी नहीं भूल सकती, जब मैं पहली बार दैनिक जागरण के संपादक से मिलने गई। दिल तेजी से धड़क रहा था, मन में बहुत सारा सवाल चल रहा था और डर लग रहा था कि क्या मैं अपनी बात सही तरीके से रख पाऊंगी?
लेकिन मैं तैयार थी। मैंने i-सक्षम के बारे में PPT बनाकर ले गई थी और लैपटॉप भी साथ में ले कर गई, ताकि मैं उन्हें अपनी बात बेहतर तरीके से समझा सकूं। यह मेरी पहली जीत थी—मैंने डर पर काबू पाया और खुद को एक नई दिशा में धकेल दिया।

लगातार प्रयास: सुबह 9 से रात 9 की दौड़
अगले दो-ढाई महीने तक मेरा यही रूटीन बन गया। कभी सुबह नौ बजे तो कभी शाम छह बजे, जब भी संपादक या रिपोर्टर से मिलने का समय मिला, मैं तुरंत पहुंच जाती। कई बार पांच-दस मिनट की देरी से मिलने का मौका छूट जाता। लेकिन मैंने हार नहीं मानी।
मैंने धीरे-धीरे उन्हें i-सक्षम से जुड़ी सफलताओं, मैसेज, वीडियो और तस्वीरें भेजनी शुरू कीं। इस दौरान, दैनिक भास्कर के एक रिपोर्टर से मुलाकात हुई। मैंने प्रियंका दी और प्रिंस सर को दिखाया और रूपल दी बात कर के न्यूज़ तैयार की और उसे जमा कर दिया।
पहली सफलता: पहला न्यूज़ प्रकाशित हुआ
जब मेरा पहला न्यूज़ प्रकाशित हुआ, तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था। यह मेरे लिए सिर्फ एक खबर नहीं थी, यह मेरे प्रयासों का पहला ठोस परिणाम था। मैंने महसूस किया कि मेहनत और धैर्य के साथ कुछ भी संभव है।
इसके बाद मैंने दैनिक जागरण के ऑफिस को और विकसित करना शुरू किया। मेरी मेहनत रंग लाई और एक दिन वहां के रिपोर्टर का नंबर मिल गया। मैंने उन्हें कॉल करके i-सक्षम के बारे में बताया। वह बहुत खुश हुए और उन्होंने मेरी खबर को प्रकाशित करने का वादा किया।
यह मेरी दूसरी बड़ी जीत थी। यह एहसास हुआ कि जब आप प्रयास करते हैं, तो चीजें अपने आप आपके पक्ष में आने लगती हैं।
उसके बाद,
अब मेरा अगला लक्ष्य था i-सक्षम का लाइव न्यूज़ दिखाना। मुझे अपनी टीम के साथ मिलकर एक वीडियो तैयार करना था। जब मेरे सभी साथी अपने-अपने क्लस्टर को सेलिब्रेट कर रहे थे, मैंने भी अपनी टीम के साथ इस अवसर का उपयोग किया।
हमने वीडियो बनाया और मुजफ्फरपुर वाव के संस्थापक सर को भेजा। उन्होंने इसे बहुत पसंद किया और मुझे एक रिपोर्टर का नंबर दिया। मैंने उनसे बात की और i-सक्षम का विजुअल न्यूज़ (Visual News) भी प्रकाशित हो गया।
साझा सफलता और धन्यवाद,
यह सबकुछ संभव हो पाया क्योंकि मेरी टीम, एडु लीडर, मेंटर और कम्युनिकेशन टीम ने मुझे हर कदम पर प्रेरित किया। मैंने सीखा कि डर को जीतने का सबसे अच्छा तरीका है, उसे सीधे चुनौती देना।
मैं अपने प्रयासों और सफलता की इस यात्रा को सभी के साथ साझा करके बहुत खुश हूं। आशा है कि मेरी कहानी आपको भी अपने सपनों की ओर बढ़ने की प्रेरणा देगी।
आप सभी का सहयोग और विश्वास के लिए दिल से धन्यवाद।

राधा 

बडी 

मुजफ्फरपुर



Wednesday, October 23, 2024

2030 तक 10,000 महिला लीडर्स का सशक्तिकरण: i-सक्षम का मिशन

2030 तक 10,000 महिला लीडर्स का सशक्तिकरण: i-सक्षम का मिशन

27 सितंबर 2024 को i-सक्षम एजुकेशन एंड लर्निंग फाउंडेशन ने PTEC (प्राइमरी टीचर एजुकेशन कॉलेज) के मैदान में क्लस्टर सेलिब्रेशन का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में गाँव से आई कई महिलाओं, अभिभावकों, PRI (पंचायत राज्य संस्था) सदस्यों और शिक्षकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। इसका उद्देश्य पिछले डेढ़ साल में क्लस्टर द्वारा किए गए कार्यों की उपलब्धियों को साझा करना और उनका जश्न मनाना था।


कार्यक्रम की शुरुआत एक स्वागत गीत के साथ हुई, जिसे हमारे एडु-लीडर्स ने प्रस्तुत कियाइसके बाद संस्था के उद्देश्य और विजन पर चर्चा की गई, जिसमें "Voice & Choice for Every Woman" के प्रति हमारा संकल्प साझा किया गया। i-सक्षम का मिशन 2030 तक 10,000 महिला लीडरों को सशक्त करना है, जो शैक्षिक, सामुदायिक और व्यक्तिगत नेतृत्व के क्षेत्रों में काम करेंगी।


एडु-लीडर्स अंजली, सारिका, चंचला, काजल, पम्मी, चांदनी, काजल, बबिता, निशा और शालू ने अपनी कहानियां और अनुभव साझा किए। सामुदायिक नेतृत्व के अंतर्गत महिलाओं को हस्ताक्षर करना सिखाने, सरकारी सेवाओं के बारे में जागरूकता फैलाने, गांवों में सफाई और वृक्षारोपण अभियान चलाने, और सरकारी स्कूलों में ड्रॉपआउट बच्चों के पुनः नामांकन पर कार्य किया गया। महिलाओं को आयुष्मान कार्ड, आधार कार्ड जैसे लाभ समझाने और मासिक धर्म जागरूकता पर विशेष जोर दिया गया।


खेल और गतिविधियों में म्यूजिकल चेयर और गुत्तम-गुत्था जैसी पारंपरिक खेल शामिल थीं, जिन्होंने कार्यक्रम में जोश भरा और सभी प्रतिभागियों को एक साथ लाने का कार्य किया।



सहयोग की अपील PRI सदस्यों से उनके समर्थन की अपील की गई, और सभी ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए भविष्य में भी जुड़ने की इच्छा जताई।


अंत में, सभी प्रतिभागियों को धन्यवाद दिया गया और सुझाव मांगे गए कि हम अगली बार कार्यक्रम को और बेहतर कैसे बना सकते हैं। उनके विचारों ने हमें आगे के लिए प्रेरित किया।


इस कार्यक्रम की सफलता में i-सक्षम टीम के सदस्य अंकिता और अदीबा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। 


i-सक्षम का उद्देश्य स्थानीय महिलाओं को लीडर के रूप में विकसित करना है, ताकि वे अपने गांवों में बदलाव ला सकें और अन्य महिलाओं को भी सशक्त कर सकें। यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि जब महिलाएं एकजुट होती हैं, तो वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती हैं।


आदिबा 

बडी,गया


(आमना हुसैन, गया जिला, आमस प्रखंड के हमजापुर गॉव से सम्बन्ध रखते हैं। आपने आपनी स्नातक की डिग्री इतिहास ओनर्स में उतर प्रदेश कॉलेज (अलिग्रह मुस्लिम विश्वविधायल  से मान्यता प्राप्त कॉलेज) से ली है। आपके घर के एक भाई, तीन बहन और माता-पिता हैं। 

आप i-सक्षम में जुड़ने से पहले घर पे रह कर पढाई करते थे। आपको i-सक्षम के बारे में whatsapp स्टेटस से जानकारी मिली, और वर्ष 2023 में संस्था के साथ जुड़े हैं। i-सक्षम में बड्डी के नाम से आपको समाज और संस्था में नयी पहचान मिली है। आप अपने जीवन में पुलिस बनाना चाहते है। )


Tuesday, July 24, 2018

Prince writes about fellowship session 01th July 2018, with 2nd Batch of Fellows


Experience of 10th Fellowship session with 2nd batch of i-Saksham Fellows


इस सप्ताह सत्र -१० की प्रशिक्षण हुई  | इस सत्र में बच्चों के  Baseline  कक्षा १ जांच के प्रश्न पुस्तिका पर चर्चा हुई  कि किन –किन तरह के सवाल बच्चों को हल करनी है एवं शिक्षक अपने बच्चों को किन –किन तरह के प्रश्नों को अभ्यास करवा सकते है | पिछली सत्र में, मैंने साथियों (Fellows) के साथ MG( Multigrade) एवं  ML(Multilevel) कक्षा  पर बातचीत की थी एवं साथ ही साथ इस कक्षा में समूह में कैसे पढ़ाएंगे| इस कक्षा में उन्हें समझनी है कि अलग –अलग स्तर के बच्चों को समूह में किन –किन ट्रक के सवाल का अभ्यास करवाया जा सकता है |

सभी साथी (Fellow ) समय पर प्रशिक्षण केंद्र पर उपस्तिथ हो गए थे | कुछ साथी देरी से पहुचें क्यूंकि उन्हें ट्रेन से आना पड़ता है | हमेशा की तरह , मैंने प्रशिक्षण का आरम्भ गतिविधि से किया | गतिविधि _”कुम्हार और मिटटी” से साथियों को अवगत किया | इस गतिविधि को जोड़े में खेलनी थी, जिसमे से एक साथी को  मूर्ति बननी थी एवं दुसरे को कुम्हार | अब सभी साथी को एक दुसरे के मूर्ति को देखकर अनुमान लगानी  है कि मूर्तिकार ने क्या बनाया है ?



हम सब ने साथ में २ मिनट का ध्यान किया | प्रतिभागियों के कहने पर, मैंने इस सत्र में एक गाना  Play  किया था | गाने के बोल थे- एक तू ही भरोसा है | हर सत्र में गाने के धून को बजाया जाता था| इस बार कुछ विचार आया कि क्यों ना कुछ नया किया जाए एवं साथियों की प्रतिक्रिया समझा जाए | प्रतिभागियों को भी अच्छा लगा | मैंने साथियों से कहा कि अब आने वाले सप्ताह से आप में से ही किसी को करना है |मैंने साथियों से पुछा कि कौन Volunteer करना चाहेंगे | एक साथी(शहर  बानो) ने हामी भरी और कहा कि अगले सप्ताह वो इसे  अपने साथियों के साथ करेंगी|      

मै अब साथियों के साथ सत्र को आगे बढाया – अब समय था कि पिछले सप्ताह के अनुभव पर चर्चा हो| मैंने सभी साथियों का तीन  अलग –अलग समूह बनाया और सभी समूह  के लिए एक प्रश्न दिया| अब सभी साथियों को समूह में सोचना है एवं आपस में चर्चा कर presentation देना है |

इन सभी  सवाल पर चर्चा हो रहे  थे :-
·         अभी तक,जो भी सत्र हुए है , उनका क्रम क्या था ? पहले सत्र से अभी तक क्या –क्या हुआ ?
·         अभी तक के सत्र में कौन –कौन ऐसी ५ विषय है जिसे आप बेहतर रूप से सीखे है एवं कौन ऐसी ५ चीज़ें है जिसे आप समझ नहीं पाए है और उसे फिर से समझना चाहते है ?
·         ट्रेनिंग में सीखी हुई ऐसी कौन सी ऐसी ५ चीज़ें है, जिसे आप बच्चों के साथ  लागू कर दिए है ? कौन-कौन  सी ऐसी चीज़े है जिसे आप अपने केंद्र के बच्चों के साथ करना चाहते है ?

        सभी साथियों ने अपने समूह में चर्चा कर Present किया |
मैंने सभी साथियों को उनके केंद्र के बच्चों का असर टेस्ट का जांच कॉपी दिया |अब उन्हें अपने केंद्र के बच्चों का उनके स्तर के हिसाब से समूह बनाना है एवं सभी के सामने पेश करना है | सभी प्रतिभागी अपने –अपने समूह में चर्चा कर विषयवार समूह बनाए और उसे सभी लोगो के सामने पेश किया |


 अब सत्र का आधा से समय बीत गए थे | मैंने महसूस किया कि साथी अब break लेना चाह  रहे है | मैंने सभी साथियों से पुछा कि अब क्या break लेना चाहिए | अचानक एक साथी ने कहा , कि break होनी चाहिए | सभी  साथी को 15 मिनट का  break मिला| कुछ साथी अपने घर से लेकर आए हुए  Lunch  करने लगे तो कुछ  अपने दोस्तों से बात करते हुए इधर –उधर विचरण कर रहे थे|

Break के बाद सभी साथी पुनः प्रशिक्षण कक्ष में बैठ गए| मैंने फिर से  3 समूह बनाए , सभी समूह में एक mentor भी बैठे हुए थे| अब मैंने सभी साथियों को  Baseline Class-1 Hindi Test Paper  दिया | सभी साथियों को  Test Paper में सवाल देखने थे –उन्हें भाषा के स्तम्भ –सुनना ,बोलना ,लिखना  एवं पढना के सवाल को समझना था | सभी साथी अपने समूह में चर्चा करने लगे | साथियो को बताने थे कि इनमे से कौन –कौन से सवाल पढने वाले,बोलने वाले और कौन –कौन से पढने और लिखने वाले है |





मैंने बोर्ड पर चार खंड बनाए जहाँ १.सुनना २. बोलना ३.पढना ४. लिखना | सभी प्रतिभागियों से प्रत्येक सवाल के बारे में पूछ रहा था कि ये सवाल भाषा में किस सूचक को प्रदर्शित कर रहा है | सभी साथी अपना मत रख रहे थे | कुछ समूह का कहना था कि सभी सवाल में बहुत सारी  चीज़े समान है जैसे कि अगर कोई सवाल लिखने वाला है | फिर भी पहले बच्चा पढ़ेगा, तभी लिखेगा | लेकिन पढने के साथ –साथ समझेगा फिर ही वो लिख पाएगा | एक साथी के अनुसार सुनना फिर बोलना एक समझना भी है | क्या हम  इसे भी भाषा के सूचक के रूप में देख सकते है | अगर हम कुछ बोलते है तो बच्चा समझता है तभी वो समझ कर अपनी बात रख पाता  है | मै उनसे सहमत था और काफी बेहतर महसोस कर रहा था कि साथी चीजों को गहराइयों में जाकर समझ पा रहे थे |



 अब हम सवाल संख्या ५ की बात करे तो यहाँ साथियों का कहना था कि ये सवाल का केंद्र बिंदु  “बोलने” वाला है , लेकिन  बच्चा यहाँ सुनने का भी काम कर रहा है तो पहले यहाँ सुनना है फिर बोलने की क्रिया हो रही है |
सवाल संख्या १३ में, ये सवाल लिखने वाले है , लेकिन इससे पहले बच्चा या शिक्षक पहले पढेंगे ,समझेंगे तब लिखेंगे | एक साथी के अनुसार , कुछ सवाल को  स्तिथिजन्य तरीकों से भी करवा सकते है क्यूंकि कक्षा -१ के सभी बच्चें को सही तरीकों से पढने में कठिनाई होती है | तो यहाँ शिक्षक को सवाल खुद पढ़ कर समझाना पड़ेगा, फिर बच्चें सवाल को हल कर पायेंगे|
कुछ साथियों के अनुसार (काजल ,रूपा ,मीनाक्षी ,शबनम ,प्रशांत) कि हम बच्चों के स्तर के अनुसार समूह में इस तरीको के सवालों का प्रयास भी करवा सकते है | इस तरीकों का सवाल हम खुद से भी कहानी और कविता पढ़ाने  के समय बना कर अभ्यास करा सकते है |
अब सत्र का समापन का समय हो चूका था | सभी साथियों को अंग्रेजी एवं गणीत का  Baseline Test Paper दिया गया  कि वो अगले सत्र में इसे बच्चों के स्तर के अनुसार समझ के आएंगे कि अलग-अलग स्तर के बच्चों को विषयवार किन –किन तरह के सवालों का अभ्यास करवाया जा सकता है | अगले सप्ताह ,हम सभी  साथी पुनः इसपर चर्चा जारी रखेंगे |

Feedback from mentor:-

·         Wakil Ji – कुछ साथियों को  Confusion हो रहा था ,लेकिन वो गहराइयों में जाकर समझ पा रहे थे | पहले मुझे भी   कुछ  Confusion  था | लेकिन चर्चा के बाद काफी कुछ स्पष्टता के साथ समझ बन पाई | कुछ साथी पिछले सत्र में अनुपस्तिथ थे, उन्हें MG और ML की समझ नहीं थी |

·         Dharmveer – एक प्रतिभागी (सिन्धु) ‘कुम्हार और मिटटी” की गतिविधि को करने में असहजता महसूस कर रही थी | मुझे काफी बेहतर लगा कि पिछले सप्ताह के अनुभव के समय सभी साथियों का अभ्यास हो गया और वे शुरू से लेकर अभी तक के सत्र का अभ्यास कर पाए |Meditation में Volunteer  साथियों द्वारा करने का तरीका काफी बेहतर लगा |सभी साथी Aser  के अनुसार समूह बनाना बेहतर रूप में समझ पाए | एक साथी (रूपा) शुरू में Participate कर रही थी , लेकिन सत्र के अंत में  Involve  नहीं थी |हम इस बैच में भी  Session  Symbol  बनाना बोल सकते है |

·         Kaifee –ये एक  Tough Discussion  है | इसे कोई भी एक बार में नहीं समझ सकता | लेकिन प्रतिभागी अलग-अलग सवालों को गहराइयों में जाकर समझ पा रहे थे| एक प्रतिभागी (प्रशांत) ट्रेनर को अगले सवाल पर चले जाने के बाद, पहले सवाल पर वापस आकर चर्चा कर रहे थे|

Particpants -11
Buddy’s from team-4