i-सक्षम की सीख:- i-सक्षम में जो भी नियम और प्रक्रियाएँ हैं, उन्होंने मुझे जीवन के महत्वपूर्ण सबक सिखाए हैं। मंथली बॉडी टॉक के दौरान हम अपनी परेशानियाँ साझा करते हैं और बॉडी हमें उन चुनौतियों से निपटने के लिए प्रेरित करती है। इस प्रक्रिया से मुझे अपनी कमजोरियों और खूबियों का पता चला।
मंथ में होने वाले सेशन्स ने मुझे यह सिखाया कि हिंसा के खिलाफ आवाज उठाना और अपनी पहचान बनाना कितना महत्वपूर्ण है। इसके अलावा क्लस्टर मीटिंग्स के माध्यम से हमने एक-दूसरे से विचार साझा किए और कम्युनिटी में आने वाली चुनौतियों का समाधान पाया।
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Saturday, February 1, 2025
दो वर्षों का सीखने और बदलने का सफर: मौसम की प्रेरणादायक कहानी
मुझे बहुत कुछ सिखाया और मेरे जीवन में गहरे बदलाव लाए। तीन मुख्य बदलाव मेरे जीवन में आए हैं, जिन्हें मैं आपसे साझा करना चाहती हूँ।
व्यक्तिगत विकास: सबसे पहला बदलाव यह है कि अब मैं अपने लक्ष्यों को निर्धारित कर पाती हूँ और उन्हें प्राप्त करने के लिए मेहनत करती हूँ। पहले मैं अपने गोल बनाने और उन्हें पाने के बारे में नहीं सोच पाती थी। यह आत्मविश्वास और लक्ष्य निर्धारण की कला मैंने i-सक्षम के माध्यम से सीखी।
समुदाय में संवाद कौशल: पहले मैं अपने समुदाय के सामने अपनी बात नहीं रख पाती थी। लेकिन जब मैंने समुदाय में काम करना शुरू किया, तो मैं लोगों से जुड़ाव बनाने लगी और अपनी राय खुलकर व्यक्त करने लगी। अब मैं बिना झिझक अपनी बातें सामने रखती हूँ और दूसरों के विचारों को भी महत्व देती हूँ।
विद्यालय में शिक्षण क्षमता: विद्यालय में बच्चों को पढ़ाने के दौरान मैंने कई नई बातें सीखी हैं। अब मैं एक्टिविटी आधारित शिक्षण करती हूँ, जिससे बच्चे न केवल सीखते हैं बल्कि कक्षा में आनंद भी महसूस करते हैं। मैंने सेशन प्लानिंग करना सीखा है, जिसके अनुसार मैं बच्चों को पढ़ाती हूँ। इससे बच्चे कक्षा में कभी बोर नहीं होते।
PTM का नया अनुभव: पहले बच्चों में PTM (Parents-Teacher Meeting) को लेकर डर रहता था। बच्चे अपने माता-पिता को बुलाने से कतराते थे क्योंकि उन्हें शिकायत की आशंका रहती थी। लेकिन मैंने बच्चों और अभिभावकों के साथ संवाद करके यह डर दूर किया। अब बच्चे बिना किसी डर के अपने माता-पिता को PTM के लिए बुलाते हैं। PTM में शिकायत करने के बजाय हम माता-पिता को यह समझाते हैं कि अपने बच्चों को बेहतर तरीके से कैसे प्रोत्साहित करें।
मौसम कुमारी
बैच-10
बेगुसराई
Friday, January 31, 2025
शिक्षक का असली उद्देश्य: आरती दीदी की प्रेरणादायक कहानी
यह कहानी इस बात को बेहतरीन उदाहरण है की शिक्षक केवल किताबों तक सिमित नहीं होते, बल्कि वे समाज के हर उम्र और वर्ग के व्यक्ति की मदद ले सकते हैं। आरती दीदी ने जिस तरह से एक जागरुकतमंद महिला की मदद की ओर उसे आत्मनिर्भर बनाया, वह शिक्षा के वास्तविक उदेश्य को दर्शाता है। शिक्षा न केवल ज्ञान देना है, बल्कि आत्मविश्वास और आत्मनिर्भर का निर्माण करना भी है।
आरती दीदी ने उस महिला को न कवक जीवन की नई दिशा दी, बल्कि यह भी सिखाया की किसी भी उम्र में सिखने की प्रकिया समाप्त नहीं होती। यह प्रयास दिखाता है की शिक्षा का दायरा केवल बच्चो तक सिमित नहीं हैं, बल्कि यह जीवन के हर पहलू में व्याप्त है।
इस प्रयास से यह भी समझ आता है की एक छोटी सी मदद किसी के जीवन को सकारात्मक दिशा दे सकती है। आरती दीदी की यह प्रेरक कहानी हमें यद् दिलाती है की समाज में शिक्षक सिर्फ कक्षा तक ही सिमित नहीं रहती, बल्कि वे बदलाव लाने मार्गदर्शक भी होती हैं।
इस तरह के प्रयास हमें प्रेरणा देते हैं की हर व्यक्ति के पास समाज में बदलाव लाने की क्षमता होती है, बस जरूरत है हौसले और सही दृष्टिकोण की।
मौसम कुमारी
बडी, मुजफ्फरपुर
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