मुंगेर ।
Wednesday, July 16, 2025
"ख़ुशी की जिद और वर्षा की जीत"
मुंगेर ।
Friday, June 13, 2025
"कदम छोटा था, असर गहराई तक गया"
हर बार जब मैं उनके घर जाती, मैं सिर्फ एक ही बात कहती –
“अपने बच्चों को पढ़ने का पूरा मौका दीजिए, पढ़ाई से ही उनका भविष्य संवरेगा।”
आर्थिक परेशानियां बार-बार सामने आईं, लेकिन मैंने हार नहीं मानी।
हर बार मैं नंदनी का उदाहरण देती – उसी गांव की एक SC समुदाय की लड़की, जो आज बिहार पुलिस की तैयारी कर रही है।
यह हर उस लड़की की कहानी है जो सिर्फ एक मौके की तलाश में है। और यह कहानी हर उस इंसान की भी है – जो बिना थके, बिना रुके, लड़कियों के लिए वो मौका बना रहा है।
जमुई
Monday, June 2, 2025
"नई राह की ओर: एक बेटी के सपनों को फिर से जगाने की कोशिश”
"मेरी उम्र की सभी सहेलियों की शादी हो चुकी है, और अब मुझे अकेले पढ़ने जाने में अच्छा नहीं लगता।"
"ज़िंदगी में कई बार ऐसे मोड़ आते हैं जहाँ हमें अकेले ही कदम बढ़ाने पड़ते हैं।"
जैसे हम अकेले इस दुनिया में आते हैं, और अकेले ही एक दिन चले भी जाते हैं,
उसी तरह कुछ फैसले भी ऐसे होते हैं, जिन्हें हमें अपने दम पर लेना होता है — बिना किसी का इंतज़ार किए। हमने कहा, "हर रास्ते पर भीड़ नहीं चलती बहन, कुछ रास्ते अकेले तय करने पड़ते हैं — और वही सबसे मजबूत बना देते हैं।"
हमने कहा,
"पहले हम भी एक-दूसरे को नहीं जानते थे। लेकिन किसी एक ने पहल की, और आज हमारे बीच इतना अपनापन है कि लगता ही नहीं कभी अजनबी थे।"
फिर मुस्कराकर जोड़ा,
"अगर आप भी एक बार घर से बाहर निकलेंगी और पढ़ाई शुरू करेंगी, तो यकीन मानिए — नए दोस्त, नई बातें और एक नई दुनिया आपका इंतज़ार कर रही है।"
"कभी-कभी बस एक कदम ही काफी होता है जुड़ने के लिए — जैसे हम जुड़ गए।"
“अब पढ़ाई कर के क्या होगा? मम्मी तो मेरा रिश्ता देखने में लगी हैं।”
इस पर प्रियंका दीदी ने बड़ी सादगी से जवाब दिया,
“शादी के बाद क्या लड़कियां पढ़ाई नहीं करतीं? मैं खुद शादी के बाद ग्रेजुएशन की और i-सक्षम से जुड़ कर आपके सामने हूं।”
हमने उन्हें बताया कि
शिक्षा सिर्फ नौकरी पाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह जीवन को बेहतर समझने का तरीका है।
“अब एडमिशन करवा दूं? ”बेटी ने थोड़ी नाराजगी में कहा,
“जब करवाना था तब नहीं करवाया, अब क्या फायदा? ”मम्मी ने भावुक होकर जवाब दिया, “जब बच्चे सवाल पूछते हैं और मैं जवाब नहीं दे पाती, तो बहुत दुख होता है। इसलिए मैं चाहती हूं कि मेरी बेटी पढ़े और ऐसा खालीपन न महसूस करे।”
हमने उनकी हर चिंता को धैर्य से सुना और कहा, “अब 9वीं में नामांकन हो रहा है। अगर आप पढ़ाई जारी रखेंगी तो आपके परिवार और हमें भी गर्व होगा।”हमारी बातों का असर हुआ, और उन्होंने कहा,
“ठीक है दी, मैं दो-तीन दिन में एडमिशन करवाने की कोशिश करूंगी।”यह बातचीत हमारे लिए भी बहुत प्रेरणादायक रही। हमने जाना कि सच्चे मन से और धैर्य से समझाने पर बदलाव जरूर आता है।
नाजिया , टीम
मुंगेर ।
"मेरे संग बच्चे भी मुस्कुराने लगे"
विद्यालय का वातावरण धीरे-धीरे बदलने लगा l मेरे गांव से शिक्षक अभिभावक बैठक से यह निकल कर आ रहे हैं,कि इस विद्यालय में बच्चे अब पहले के जैसे विद्यालय में बैग रखकर बाहर घूमते नहीं रहते हैं l उनकी बातचीत में रहन-सहन में भी परिवर्तन हुआ है l "मेरा विद्यालय से जुड़ने का उद्देश्य यह था कि मैं विद्यालय के बच्चों को एक अच्छे नागरिक की दिशा में आगे बढ़ते हुए देख सकूं।"
तू करीम, कृष्ण, खुदा हुआ,
तू ही वाहे गुरु, तू यशु मसीह,
हर नाम में तू समाया हुआ।"
नाम- मुस्कान कुमारी
बैच-10 , मुजफ्फरपुर
Friday, April 18, 2025
क्या आपने कभी बच्चों को खुद की पसंद-नापसंद समझते देखा है? मीना मंच ने यह मुमकिन कर दिखाया!
Saturday, February 1, 2025
दो वर्षों का सीखने और बदलने का सफर: मौसम की प्रेरणादायक कहानी
i-सक्षम की सीख:- i-सक्षम में जो भी नियम और प्रक्रियाएँ हैं, उन्होंने मुझे जीवन के महत्वपूर्ण सबक सिखाए हैं। मंथली बॉडी टॉक के दौरान हम अपनी परेशानियाँ साझा करते हैं और बॉडी हमें उन चुनौतियों से निपटने के लिए प्रेरित करती है। इस प्रक्रिया से मुझे अपनी कमजोरियों और खूबियों का पता चला।
मंथ में होने वाले सेशन्स ने मुझे यह सिखाया कि हिंसा के खिलाफ आवाज उठाना और अपनी पहचान बनाना कितना महत्वपूर्ण है। इसके अलावा क्लस्टर मीटिंग्स के माध्यम से हमने एक-दूसरे से विचार साझा किए और कम्युनिटी में आने वाली चुनौतियों का समाधान पाया।Friday, January 31, 2025
मेरा बदलाव और सफलता की यात्रा: खुशबू की कहानी
स्कूल में भी जब हेडमास्टर सर से बात करनी होती थी, तब डर लगता था। सोचती थी कि सर क्या कह देंगे और मैं क्या जवाब दूँगी। लेकिन अब यह डर खत्म हो गया है और मैं बेझिझक सर से बात कर पाती हूँ। अपने परिवार में भी अब मैं अपनी बात रख पाती हूँ। पहले जमुई जाना होता था तो बिना किसी घर के सदस्य के नहीं जा सकती थी। लेकिन अब अकेले जमुई जाना और लौट आना मेरे लिए सामान्य हो गया है, भले घर वाले सहमत न हों।
मैं आई-सक्षम का धन्यवाद करती हूँ जिसने मुझे यह मौका दिया और मेरे जीवन में यह बदलाव लाया।
खुशबू
बैच-11
जमुई


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