यह सिर्फ कल्पना का कॉलेज जाना नहीं है — यह उस जज़्बे की उड़ान है, जिसने समाज की तमाम बंदिशों को पार कर अपने सपनो को पाया है।
कल्पना
बैच-10,मुजफ्फरपुर
कल्पना
बैच-10,मुजफ्फरपुर
अब वही शीतल I-Saksham में काम कर रही है और साथ ही 25 बच्चों को ट्यूशन पढ़ा रही है। वह B.A (सेमेस्टर 3) की विद्यार्थी भी है। उसकी मेहनत और लगन ने न केवल उसके परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर किया बल्कि उसे आत्मनिर्भर भी बनाया।
शीतल
बैच 10
जमुईउसने न केवल अपने आत्मविश्वास में बल्कि अपने लक्ष्य में भी स्पष्टता पाई। अब वह B.Ed करके शिक्षिका बनने का सपना देख रही थी, ताकि वह दूसरों को भी सशक्त बना सके।
उन्होंने आगे बताया कि उनका सरकारी शिक्षिका के पद पर चयन भी हो गया था, लेकिन उनके पति ने उन्हें नौकरी करने की अनुमति नहीं दी, क्योंकि उस समय घर की बहूओं का बाहर जाकर काम करना समाज में स्वीकार्य नहीं था। हालाँकि, उन्होंने अपने बच्चों और बहू की पढ़ाई को हमेशा प्राथमिकता दी।
उनकी बहू ने शादी के बाद स्नातक पूरा किया और बिहार पुलिस तथा एसएससी की परीक्षाओं के लिए आवेदन भी किया, लेकिन सफल नहीं हो सकीं। इसके बाद, पारिवारिक जिम्मेदारियों में व्यस्त होने के कारण उनकी पढ़ाई छूट गई।
शिक्षा के प्रति जागरूकता और आत्मनिर्भरता
जब हम वहाँ से जाने लगे, तो उन्होंने प्यार भरे शब्दों में कहा—
"बेटी, फिर जरूर आइएगा,"
स्कूल में भी जब हेडमास्टर सर से बात करनी होती थी, तब डर लगता था। सोचती थी कि सर क्या कह देंगे और मैं क्या जवाब दूँगी। लेकिन अब यह डर खत्म हो गया है और मैं बेझिझक सर से बात कर पाती हूँ। अपने परिवार में भी अब मैं अपनी बात रख पाती हूँ। पहले जमुई जाना होता था तो बिना किसी घर के सदस्य के नहीं जा सकती थी। लेकिन अब अकेले जमुई जाना और लौट आना मेरे लिए सामान्य हो गया है, भले घर वाले सहमत न हों।
खुशबू
बैच-11
जमुईपरिवार की जिम्मेदारियों को संभालना और खुद में बदलाव लाना
i-सक्षम से जुड़ने के बाद मेरी जिंदगी में जो बदलाव आए, उन्हें मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकती। यह सफर न केवल मेरे व्यक्तित्व को निखारने का रहा है, बल्कि मुझे आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने का भी रहा है।
शुरुआत और बदलाव की ओर पहला कदम
डेढ़ साल पहले, जब मैंने i-सक्षम से जुड़ने का फैसला किया, तब मैं एक साधारण लड़की थी, जो घर और स्कूल की चारदीवारी तक सीमित थी। मुझे यह भी नहीं पता था कि किसी के साथ बातचीत कैसे की जाती है। धीरे-धीरे मैंने सीखा कि कैसे किसी से संवाद करना है, अपनी बातों को आत्मविश्वास के साथ रखना है और दूसरों की मदद के लिए आगे आना है।
मेरे भाई और पापा बाहर जॉब(Job) करते हैं। जिसके वजह से घर पर नहीं रहते हैं। जो काम लोगों के घरों में पापा या भाई करते हैं, वो सब
अंशु
बैच-9, बेगूसराय