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Wednesday, July 16, 2025

"ख़ुशी की जिद और वर्षा की जीत"

आज सुबह मै हमेशा की तरह ऑफिस के लिए निकली थी। टोटो में बैठकर अपने-अपने ख्यालों में थी की तभी मेरी नज़र एक लड़की पर पड़ी, वो साईकिल चला कर स्कूल जा रही थी। पर वो कोई साधारण लड़की नहीं थी। वो थी वर्षा।

आप पूछेंगे - वर्षा कौन हैं ? - तो सुनिए , वर्षा की कहानी है, जिसने हालातो से हार मान ली थी। लेकिन फिर किसी और लड़की की हिम्मत ने उसे दोबारा खड़ा कर दिया। 

वर्षा , मुंगेर के एक गॉव रामनगर (भागिचक) की लड़की है। सातवीं कक्षा के बाद उसकी पढाई छुट गई थी। उसी समय वर्षा के पिता का देहांत हो गया था ,घर में बस माँ और दो बहनें थी। माँ एक छोटी सी दुकान चलाकर जैसे-तैसे घर चलाते थे। पढाई फिर से शुरू करने का न तो हौसला था न ही कोई सहारा। 

और फिर उसकी जिंदगी में आई-सक्षम की एडू-लीडर ख़ुशी जो बैच-11 की है, यह आई-सक्षम संस्था में काम करती हैं। ख़ुशी बहुत ही मेहनती और जिद्दी लड़की, जिस काम को ले कर ठान लेती है, तो पीछे नहीं हटती हैं। 

अक्टूबर-नवंबर का महीना था। हमारे क्लस्टर में तय हुआ कि हम उन किशोरियों को फिर से स्कूल भेजेंगे, जिन्होंने किसी कारण से पढ़ाई छोड़ दी है। उसी अभियान के दौरान खुशी को वर्षा मिली।
जब खुशी ने वर्षा की माँ से बात की तो जवाब साफ थी। अब क्या पढ़ेगी? सात साल हो गए। मुश्किल से घर चलता है, पढ़ाई के लिए समय और पैसे कहाँ हैं?
लेकिन खुशी हार मानने वालों में से नहीं थी। उसने समझाया कि सरकार की तरफ़ से लड़कियों को छात्रवृत्तियाँ मिलती हैं, कई योजनाएं हैं। फिर उसने वर्षा से सीधा पूछा। क्या तुम फिर से पढ़ना चाहती हो?
वर्षा की आँखों में हल्की-सी चमक आई। वो बोली। मन तो है दीदी, पर स्कूल में दाखिला मिलेगा क्या? मेरे पास तो टीसी भी नहीं है। खुशी मुस्कराई और कहा , तुम साथ दो, बाकी मै आपको मदद करूंगी। खुशी ने स्कूल से लेकर DRCC ऑफिस और कोर्ट तक पहुँची । चार दिन DRCC के ऑफिस में, तीन दिन कोर्ट में — वो तब तक नहीं रुकी जब तक वर्षा की टीसी नहीं मिल गई। कुछ दिन बाद मिलने के बाद ख़ुशी ने वर्षा का मई में स्कूल में दाख़िला करवाए , तो जून की गर्मियों में, सात साल बाद, वर्षा फिर से स्कूल गई। 
आज जब मैंने उसे साइकिल से स्कूल जाते देखा, तो ऐसा लगा जैसे उम्मीद सचमुच साइकिल चला रही है। खुशी ने सिर्फ़ एक बच्ची की पढ़ाई शुरू नहीं करवाई। उसने उसके भविष्य का रास्ता खोला।
हम एक ऐसे समाज की कल्पना करते हैं जहाँ हर लड़की के पास अपनी आवाज़ हो, अपनी पसंद हो, और वह किसी दूसरी लड़की की ताक़त भी बन सके।
स्मृति , बड्डी
मुंगेर





Friday, January 31, 2025

“हर मुश्किल के बाद सफलता की नई शुरुआत”

साक्षी मुंगेर जिले के एक छोटे से गांव (फरदा) की लड़की है, जिसका परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। पिताजी ईंट-भट्टे में मजदूरी करते थे, लेकिन काम बंद हो जाने के कारण उन्हें परदेस (जयपुर) जाना पड़ा। शुरुआत में उन्होंने घर पैसे भेजे, जिससे परिवार का खर्च चलने लगा। लेकिन धीरे-धीरे फैक्ट्री मालिक ने उनका शोषण करना शुरू कर दिया, और उनका परिवार से संपर्क टूट गया।
माँ ने बच्चों के साथ मायके जाकर खेतों में काम किया और कठिन परिस्थितियों का सामना किया। इस बीच एक पुजारी की भविष्यवाणी के बाद साक्षी के पिताजी घर लौट आए, जिससे परिवार फिर से एकजुट हो गया।

लेकिन जीवन की परीक्षाएँ यहीं खत्म नहीं हुईं। साक्षी की बहन सिमरन की बीमारी से मौत हो गई, और पिताजी का दुर्घटना में गंभीर चोट लगने से कामकाज ठप हो गया। इन कठिनाइयों ने साक्षी को प्रेरित किया कि वह अपने परिवार की जिम्मेदारी उठाए।

साक्षी ने पढ़ाई जारी रखी और संघर्ष करते हुए i-सक्षम जैसे संगठन से जुड़कर अपने जीवन में बदलाव लाने की कोशिश की।

यह कहानी हमें सिखाती है कि कठिन परिस्थितियों में भी परिवार की एकजुटता, संघर्ष और कभी हार न मानने का साहस सफलता की कुंजी है। जीवन में चाहे कितनी भी मुश्किलें आएँ, हौसला और मेहनत से उन्हें पार किया जा सकता है।

साक्षी कुमारी
बैच-11
मुंगेर

Wednesday, January 29, 2025

i-सक्षम से जुड़ने के बाद जीवन में आए बदलाव

आज मैं आप लोगों के साथ i-सक्षम में जुड़ने के बाद खुद में आए बदलाव को साझा करने वाली हूँ। i -सक्षम से जुड़े मुझे छह महीने होने वाले हैं, इस बीच मैंने खुद में कई नए बदलावों को महसूस किया।

बहार जाने का आत्मविश्वास 

i-सक्षम से जुड़ने से पहले हम घर से बाहर बहुत कम जाते थे। अकेले बाहर जाने में डर सा लगता था। कि लोग क्या सोचेंगे। अगर कुछ सामान लाना होता तो मैं अपने पति से या घर के किसी अन्य सदस्य से बोलती थी। क्योंकि हमें घर से बाहर निकलने में भीड़ और भरी सड़कों को पार करने में हिचकिचाहट सी होती थी। लेकिन अब हम घर के बाहर के अपने काम को खुद ही जाकर कर निपटाने लगी हूँ।

सपनो की पहचान की यात्रा 

पहले मुझे लगता था की घर और बच्चा ही जीवन के केंद्रे हैं। लेकिन जब मै i-सक्षम से जुडी, तो मुझे एहसास हुआ की खुद के भी सपना होते हैं। जिन्हें पूरा कर सकते हैं। 


आत्मविश्वास और बातचीत में सुधार

मुझे लोगों से बात करने में हिचकिचाहट होती और डर लगता था। बातचीत के दौरान मेरा आई कांटेक्ट (Eye Contact) नहीं हो पता था। जिससे मै अपनी बात  बेहतर तरीके से नहीं रख पाती थी। लेकिन अब यह डर काफी हद तक कम हो गया है।


शिक्षा के लिए वॉइस एंड चॉइस का उपयोग

मैंने अपने आगे की पढाई के लिए अपने वॉइस एंड चॉइस का उपयोग किया। मैंने अपने पति से बिना हिचकिचाहट के कहा मुझे आगे पढाई करना है। मुझे कंप्यूटर सिखने का बहुत मन था, लेकिन मेरे पति कहते थे, “तुम क्या करोगी सीखकर?” जब मुझे क्लस्टर में प्राइम बुक मिला, तो मै बहुत खुश हुई। मैंने पति से कहा “देखिए, अब मै कंप्यूटर भी सिख सकती हूँ और अपने सपने को पूरा भी कर सकती हूँ। 

क्लस्टर मीटिंग का अनुभव  

जब मै पहली बार क्लस्टर मीटिंग में गई। तो मुझे आजादी का अनुभव हुआ। मुझे हर महीने के आखिरी गुरुवार का विश्ववारी इंतज़ार रहता है, क्युकी वहां की खुली हवाएं और ऊँचे-ऊँचे पहाड़ मुझे प्रेरणा देते हैं।


समाज के प्रति जागरूकता

क्लस्टर में सामिल होने के बाद मै यह सोचने लगी की हमारे समाज में क्या अच्छा हो रहा है और ऐसा क्या किया जाये जिससे लोग जागरूक हो सकें। अब मै अपने समाज के लिए बेहतर सोचने औए कदम उठाने में सक्षम हूँ। 

निर्णय लेने की क्षमता

i-सक्षम से जुड़ने के बाद मेरे अंदर इतना बदलाव आए हैं की अब मै सही और गलत के बिच अंतर कर पाती हूँ,अपने जीवन से जुड़े सही निर्णय ले पाती हूँ, जो पहले नहीं कर पाती थी।

जुली कुमारी 

बैच-11 

जमुई 


Wednesday, December 25, 2024

हिचकिचाहट से आत्मविश्वास तक का सफर: गुड्डी

 हिचकिचाहट से आत्मविश्वास तक का सफर: गुड्डी

आई-सक्षम: एक नई दिशा

आई-सक्षम केवल एक प्लेटफॉर्म नहीं है, यह एक ऐसा वातावरण है जहाँ हर व्यक्ति की बात सुनी जाती है, समझी जाती है, और जरूरत पड़ने पर उसे पूरा समर्थन मिलता है। यहाँ मैंने अपने व्यक्तित्व और क्षमताओं को समझने और निखारने का अनमोल अवसर पाया।

पहले और अब के बीच का बदलाव

दो साल पहले, मैं एक ऐसी लड़की थी जो लोगों से जुड़ने में हिचकिचाती थी। अपनी बातें दूसरों के सामने रखने की हिम्मत नहीं थी और समूह में कार्य करना तो दूर की बात थी। लेकिन जब मैंने आई-सक्षम के साथ अपनी यात्रा शुरू की, तो मेरे अंदर अद्भुत बदलाव आया।

अब मैं न केवल लोगों से जुड़ने लगी हूँ, बल्कि शिक्षकों, प्रिंसिपल, बच्चों, उनके अभिभावकों और अपने समाज से भी सक्रियता से संवाद करने लगी हूँ। क्लस्टर के माध्यम से मैं समूह में कार्य करने और सहयोग निभाने का आनंद ले रही हूँ।
बच्चों के जीवन में बदलाव
जो बच्चे स्कूल आने से कतराते थे, पढ़ाई से दूर भागते थे या खेल को प्राथमिकता देते थे, उन्हें मैंने खेल-खेल में शिक्षा से जोड़ा। इस प्रक्रिया में बच्चे खेलते भी हैं और सीखते भी हैं। उनका उत्साह और रुचि देखकर मुझे अपने प्रयासों पर गर्व होता है।

लाइब्रेरी: शिक्षा का नया केंद्र
हमारे क्लस्टर के प्रयास से फर्दा में एक लाइब्रेरी की स्थापना की गई है। यह केवल किताबों का घर नहीं, बल्कि एक दोस्ताना माहौल, शिक्षा के संसाधन, और सीखने के नए तरीकों का केंद्र है। यहाँ बच्चे और समुदाय के लोग समान रूप से लाभान्वित हो रहे हैं।

मेरी सीख और आगे का रास्ता
आई-सक्षम ने मुझे आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझने का अवसर दिया। यह यात्रा न केवल मेरे लिए बल्कि उन सभी के लिए प्रेरणादायक है, जिनके जीवन को मैंने छूने का प्रयास किया।
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गुड्डी कुमारी
बैच-10, मुंगेर