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Thursday, June 5, 2025

"पहले खुद जागी, अब पूरे गांव को जगा रही है"

हर गांव की गलियों में कुछ चेहरे ऐसे होते हैं
जो चुपचाप अपनी राह बनाते हैं —
न कोई शोर, न कोई शिकायत।
लेकिन उनके कदम इतने मजबूत होते हैं कि पीछे आने वालों को रास्ता साफ दिखने लगता है।
हमारे फरदा गांव की ऐसी ही एक शख्सियत हैं — प्रेरणा कुमारी
एक आम-सी लड़की, जो एक छोटे से गांव से निकल कर आई थी,
जिसने दुनिया को वैसा ही देखा था जैसा उसके घरवालों ने दिखाया था।

उसकी सोच की सीमाएं भी वहीं तक थीं, जहां तक उसने अपने घर के आंगन से झांका था।

मगर आज प्रेरणा वहां है, जहां वो अकेले ही 60 से ज़्यादा बच्चों को अपने शिक्षण केंद्र में उनके हुनर और  आत्मविश्वास के लिए तैयार कर रही हैं।

जब मैं पहली बार उनके लर्निंग सेंटर पहुंची, तो मन में एक साधारण-सी छवि थी —
सोचा था, एक छोटा-सा कमरा होगा, कुछ कुर्सियाँ होंगी, और कुछ बच्चे पढ़ते मिलेंगे।

लेकिन जो वहां देखा... वो दिल को छू गया।
वो सिर्फ एक क्लासरूम नहीं था —
वो एक ऐसी जगह थी, जहां हर बच्चा खुलकर सोच रहा था,
अपने मन की कह रहा था, और
जहां एक लड़की — प्रेरणा — चुपचाप हर दिल को छू रही थी।


मैंने एक ऐसी लड़की को देखा, जो दिखने में तो बिल्कुल साधारण थी, लेकिन उसके भीतर
आत्मविश्वास और समझ की एक खास चमक थी। वह जिस सादगी से बच्चों से जुड़ती, उन्हें सिखाती, और हर बच्चे की छिपी क्षमता को पहचानती थी — उसे देखकर लगा, ये सिर्फ पढ़ाना नहीं, बल्कि ज़िंदगी को एक नई दिशा देना है।
आज प्रेरणा कुमारी, FEA (Freedom Employability Academy) संस्था के साथ मिलकर फरदा गांव में एक शिक्षण केंद्र चला रही हैं। यहां केवल अंग्रेज़ी बोलना नहीं सिखाया जाता, बल्कि ये सिखाया जाता है कि खुद पर भरोसा कैसे किया जाए, और दुनिया के सामने खड़े होकर अपने हक की बात कैसे कही जाए। प्रेरणा हर बच्चे के भीतर कुछ खास देखती हैं — और उसी हुनर को निखारने में जी-जान लगा देती हैं।


लेकिन प्रेरणा का यह सफर कभी आसान नहीं रहा।
सीमित संसाधन, घरेलू जिम्मेदारियां और समाज की संकीर्ण सोच — इन सबके बीच उन्होंने पढ़ाई का दामन थामे रखा।जब आसपास की दुनिया लड़कियों को सिर्फ रसोई और चौखट तक सीमित रखने की बातें कर रही थी,तब प्रेरणा ने i-Saksham से जुड़कर न सिर्फ खुद को बदला,बल्कि यह ठान लिया कि अब अपने गांव में भी बदलाव लाना है —और आज, वो वही कर रही हैं... पूरे संकल्प और सच्ची नीयत के साथ।


प्रेरणा से मिलकर मुझे महसूस हुआ कि असली बदलाव भाषणों से नहीं, बल्कि अपने काम से आता है।
उनकी हर छोटी कोशिश, हर एक शब्द गांव के युवाओं में आत्मविश्वास जगाता है।
अब लड़कियां खुलकर सपने देखती हैं, और लड़के अपने भविष्य को लेकर जागरूक होते जा रहे हैं —
क्योंकि किसी ने उन्हें दिखा दिया है कि ये सच में मुमकिन है।


प्रेरणा — एक उम्मीद की मिसाल हैं।
वो हमारे गांव की वह पहली लड़की हैं, जिसने हिम्मत जुटाई, अपनी राह बनाई —

और आज उसी राह पर कई और कदम बढ़ाने लगे हैं।

प्रेरणा की तरह, फरदा गांव की कई महिलाएं और लड़कियां भी अब आगे बढ़ रही हैं।
हमें पूरा विश्वास है कि ये बदलाव हमारे समाज के लिए एक नया सूरज लेकर आएगा —
जो हर अंधेरे को दूर करेगा, और नई रोशनी बिखेरेगा

प्रेरणा कुमारी
जिला- मुंगेर

Thursday, October 17, 2024

i-सक्षम में एक वर्ष की यात्रा- MG-ML से ट्यूशन पढ़ाना हुआ आसान

मुझे i-सक्षम से जुड़े हुए लगभग एक वर्ष पूरा होने वाला है। इस एक वर्ष में मैंने बहुत कुछ सीखा है, स्वयं में बहुत से बदलाव से बदलाव देखें हैं, जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं।

  • अब मैं हजारों की भीड़ में खुद को सबसे अलग महसूस करती हूँ।

  • दस लोगों के सामने अपनी बातों को रख पाती हूँ और उन्हें समझा पाती हूँ। 

  • सामने वाले व्यक्ति की भावनाओं को समझ पाती हूँ और अपनी भावनाएँ समझा पाती हूँ।

  • स्वयं के लिए सही-गलत का चुनाव कर पाना।

  • खुद की गलतियों में सुधार कर पाना।


जब मैं इन चीजों को खुद में देख पा रही हूँ तो मुझे खुद पर बहुत गर्व महसूस हो रहा है। यह मेरे लिए बहुत बड़ी बात है।


मैं एक-दो महीने पहले का एक छोटा सा अनुभव आपके साथ शेयर कर रही हूँ। पहले जब मैं छ:-सात बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती थी तब मैं उनके दो घंटे के ट्यूशन के समय को सही से मैनेज (manage) नहीं कर पाती थी। मुझे खुद ही लगता था कि मैं उन बच्चों को ठीक से नहीं पढ़ा पाती हूँ। हालाँकि मेरे पास विषय (हिन्दी, अंग्रेजी और गणित) का ज्ञान तो था परन्तु पढ़ाने का सही तरीका नहीं पता था। 


ट्यूशन वाले बच्चों की कक्षा भी अलग-अलग होती है और उनका स्तर भी अलग-अलग होता है। जिस कारण मैं समझ नहीं पाती थी कि दो घंटे में एक साथ उन्हें कैसे पढ़ाऊँ?


फिर एक दिन हमारा Multi-grade Multi-level Class (MG-ML) का सेशन हुआ और सेशन से मेरी समझ काफी बेहतर बन पाई कि मैं इसे अपने ट्यूशन में सभी बच्चों को बेहतर ढंग से कैसे पढ़ा सकती हूँ। मैंने MG-ML के सभी नियम अपनी कक्षा में फ़ॉलो (follow) किए और आज मेरे पास 15 बच्चे ट्यूशन पढ़ रहें हैं। अब मुझे भी कोई समस्या नहीं होती और बच्चे भी मेरे पढ़ाने के तरीकों को पसंद करते हैं। मैं अपनी इस प्रोग्रेस (progress) से बहुत खुश हूँ और इसे सीखने से मेरा जीवन थोड़ा आसान हुआ है।


“जीवन में हर चीज आसान नहीं होती बल्कि हमें आसान बनानी पड़ती है”। मुझे अपने जीवन में क्या, कब, और कैसे करना है यह सवालों के जवाब मैं दूसरों से पूछती थी, लेकिन जब से i-सक्षम संस्था मेरे जीवन में आयी है तब से मुझे इन सवालों के जवाब स्वयं ही मिल जाते हैं।


शीतल कुमारी 

बैच 10, जमुई


Saturday, October 5, 2024

नीतू की कोशिशों को शिक्षिका ने सराहा

जब मैं मनिका मुर्रा विद्यालय में गई, तो मेरी मुलाकात संजना मैडम से हुई। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि पहले नीतू अपने कक्षा में बच्चों से गतिविधियों के माध्यम से कम जुड़ पाती थीं। लेकिन अब नीतू बच्चों को विभिन्न प्रकार की गतिविधियों से जोड़ रही हैं। गतिविधियों में कुछ बालगीत अहम हैं, जैसे "बारिश आई छम-छम," "हाथी राजा बहुत बड़े," "मम्मी मुझसे प्यार करती, कितना गहरा" जैसी कविताओं के माध्यम से बच्चों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं।

नीतू अब गणित के पाठ को और अधिक रोचक बनाने के लिए जमीन पर डिब्बे बनाकर बच्चों को गिनती सिखाने का प्रयास करती हैं। संजना मैडम ने बताया कि नीतू अब पहले से कहीं अधिक उत्साहित रहती हैं और उनका जुड़ाव बच्चों से गहरा हुआ है। साथ ही, नीतू और संजना मैडम के बीच भी बेहतर तालमेल बन गया है, जिससे नीतू के प्रयास और अधिक प्रभावशाली हो गए हैं।

स्वाति
बडी, मुजफ्फरपुर 


Tuesday, April 11, 2023

कक्षा साफ ना होने पर अनन्या ने किया समस्या समाधान कौशल का प्रयोग

फोटो क्रेडिट- आई सक्षम

सामान्यतः जब हमारे जीवन में कोई समस्या आती है या हमारी कोई इच्छा पूरी नहीं होती, तब हम उसे अपनी नियति मान लेते हैं और परिस्थिति से समझौता कर लेते हैं, जो कहीं ना कहीं दृढ़ इच्छाशक्ति की कमी को दर्शाता है जबकि हमारी कोशिश होनी चाहिए कि हम अंत कर प्रयास करें क्योंकि सबकुछ जीत लेने में और अंत तक हार ना मानने में कोई अंतर नहीं है। इस मंतव्य को हमारी एडु लीडर अनन्या ने साबित करके दिखाया है। वे लिखती हैं-  

मेरा नाम अनन्या है और मैं जमुई की रहने वाली हूं। मैं बैच-9 की एडु लीडर हूं। मैं आप लोगों के साथ आज के क्लास रूम का अनुभव साझा करने जा रही हूं। 


इस बार सेशन में मुझे बहुत सारे TLM मिले।  TLM का मतलब Teaching Learning Method है, जिसके जरिए कलात्मक तरीकों से बच्चों को पढ़ाया जाता है इसलिए मुझे TLM बहुत अच्छे लगते हैं। यही कारण था कि TLM मिलने से मुझे बहुत खुशी हुई। मेरी इच्छा था कि मैं रंग-बिरंगे TLM को साफ-सुथरी कक्षा में लगाऊं लेकिन कक्षा अब तक साफ नहीं हुई थी। 



जब नहीं हुई साफ-सफाई


हालांकि मैंने कुछ दिन पहले अपने स्कूल के प्रिंसिपल सर से बात भी किया था कि सर अगर क्लास रूम की साफ-सफाई हो जाती, तो बढ़िया होता। इस पर प्रिंसिपल सर ने कहा था कि हां कक्षा की सफाई भी करवानी थी और पेंट भी करवाना था लेकिन अभी तक काम शुरु भी नहीं हुआ था।  


फोटो क्रेडिट- आई सक्षम

इस पर मैंने सोचा कि बार-बार गुजारिश की लेकिन काम शुरु नहीं हुआ तो क्यों ना मैं खुद ही क्लास रुम की सफाई कर लूं। इसके लिए मैंने एडु लीडर आस्था की अनुमति ली क्योंकि मुझे क्लास को साफ करने में कुछ बड़े बच्चों की आवश्यकता थी, जो मेरी मदद कर सकें। आस्था मेरी बगल की कक्षा में ही क्लास ले रही थीं। आस्था से बात करने के बाद उन्होंने हामी भर दी और क्लास समाप्त होने के बाद बच्चों ने रुक कर क्लास रुम को साफ किया। 


बच्चों के साथ की सफाई 


कुछ बच्चों ने दीवारों पर लगे मकड़ी के जालों को साफ किया, तो कुछ बच्चों ने बेंच-डेस्क आदि को कपड़ों से पोंछा, कुछ बच्चों ने मिल कर फर्श को धोया। यहां सबसे अच्छी बात यह लगी कि जो बच्चे साफ-सफाई नहीं कर पा रहे थे, उन्होंने ऊंचाई पर खड़े बच्चों के बेंच-डेस्क को थामा हुआ था। तकरीबन दो-तीन घंटों की मेहनत के बाद हमारी कक्षा साफ-सुथरी हो गई। अब बारी TLM लगाने की थी। 


एडु लीडर अनन्या ने जिस प्रकार कक्षा की सफाई करने का बीड़ा उठाया, यह उनकी नेतृत्व क्षमता की ओर इंगित करता है। साथ ही परेशानी से भागने या उसे स्वीकार ना करने की इच्छाशक्ति भी क्योंकि TLM लगाने के लिए उन्हें साफ-सफाई की जरुरत थी और साफ-सफाई ना होने की स्थिति में उन्होंने इस परेशानी को स्वयं दूर करने का सोचा, जो उनके समस्या समाधान विधि की ओर इंगित करता है। 


देखा जाए, तो एडुलीडर्स ना केवल शिक्षा के प्रति बल्कि अन्य हिस्सों में भी उभर कर सामने आ रहे हैं क्योंकि कक्षा में पढ़ाने के साथ-साथ जहां एक ओर उनके शिक्षण के कौशल का विकास हो रहा है, वहीं वे नेतृत्व करने और निणर्य लेने में भी आगे आ रही हैं, जिसे ऊपर दिए गए अनुभव द्वारा समझा जा सकता है।  


Friday, April 7, 2023

एडुलीडर के प्रयासों से बच्चियों को मिला हौसला कि वे भी करेंगी हर समस्या का सामना

फोटो क्रेडिट- आई सक्षम


मैं स्मृती कुमारी बैच- 9 मुंगेर जिले की एडुलीडर हूं। आज मैं आप लोगों के साथ अपनी कक्षा का अनुभव साझा करने जा रही हूं।

आज जब मैं कक्षा में गई, तो बच्चे मुझसे मेरा इमोशन मतलब मेरी भावनात्मक स्थिति के बारे में पूछने लगे। उन्होंने मुझसे पूछा, “दीदी, आपको कैसा लग रहा हैं?” उन्होंने मुझसे जिस तरह से मेरे इमोशन के बारे में पूछा, ये देख कर मुझे बहुत खुशी हुई। 

बच्चों ने पूछा मेरा इमोशन 

मैंने उनको बताया कि मैं खुश हूं। साथ ही अपनी खुशी का कारण भी बताया। इसके बाद मैंने बच्चों को मेडिटेशन करवाया फिर बच्चों से उनके इमोशन के बारे में जाना। इस पर बच्चों ने कहा, “वे उत्साहित महसूस कर रहे हैं।” उनके उत्साह को बढ़ाते हुए मैंने उनसे कहा, “आज मैं आप लोगों के लिए कुछ लाई हूं। इतना सुनते ही सभी बच्चे खुश होकर पुछने लगे कि क्या मैं क्या लाई हूं, तो मैंने कहा, “पहले जल्दी से एक मिनट के लिए सभी बच्चे अपनी आंखें बंद किजिए।” 

मेरे इतना कहने के बाद सभी बच्चों ने अपनी आंखें बंद कर ली। इसके बाद मैं कक्षा के लिए जो घड़ी लेकर आई थी, उसे मैंने कक्षा में लगा दिया। इसके बाद सभी बच्चों को आंखें खोलने के लिए कहा। आंख खोलते ही जब बच्चों की नजर घड़ी पर पड़ी, तब उनकी मुस्कुराहट बढ़ गई। बच्चों के चेहरे पर मुस्कान थी और मुझे भी उन्हें खुश देख कर बहुत अच्छा महसूस हो रहा था। 

घड़ी से समय का ज्ञान

आज मैंने बच्चों को गणित का भाग ‘समय’ पढ़ाया कि समय कैसे देखते हैं, घड़ी की बड़ी-छोटी सुई के बारे में बताया फिर मैंने कक्षा के ही एक बच्चे को कहा, “आप घड़ी बना कर दिखाएं और इसे जुड़े सवाल भी करें।” इसके बाद हमने एक खेल खेला और फिर बच्चों में से सोनाक्षी ने बुक रीडिंग करके सबको सुनाया। साथ ही इसके बाद मैंने बच्चों को होमवर्क दिया। 

आज से मेरी कक्षा के जो चौथी के बच्चे थे, वे सभी पाचंवी में चले गये थे। आज से उनकी कक्षा अलग हो गई थी।

आप हमें भूल जाएंगी? 

पांचवी कक्षा की रितिका और प्रियंका मेरे पास आई और बोलने लगी, “दीदी, नई कक्षा में मन नहीं लगता है। अब तो आप हम सबको भूल जाइयेगा। इतना कहते-कहते उनकी आंखों से आंसु आ गए। उन्हें चुप कराते हुए मैंने कहा, “क्यों भूलूंगी? मैं आपकी कक्षा में जरुर आऊंगी।” इतना कहने बाद मैंने उन्हें अपनी बांहों में भर लिया और समझाया मैं तो यही हूं। 

आपको जब मेरे पास आने की इच्छा करें आप आकर बैठ सकते हैं फिर मैंने उन्हें कहा, “आइये बच्चों हम सब एक तस्वीर लेते हैं इसलिए पहले आप रोना बंद किजिए नहीं तो अच्छी तस्वीर नहीं आएगी। बच्चों ने रोना बंद किया और फिर मैंने तस्वीर ली और उनको कहा, “अब मैं इसको रोज देखुंगी, तब तो आपको कभी नहीं भुलूंगी। मेरी ये बात सुनकर वे हंसने लगे। 

मेरे प्रति बच्चों का ऐसा लगाव देखकर मेरा मन भी भावुक हो गया। उस वक्त मुझे एहसास हुआ कि हां, मैंने कक्षा में अपने दोस्त बना लिए हैं। मेरे छोटे और मासूम से प्यारे दोस्त। 

इस अनुभव से कई चीजें सामने आती हैं। जैसे- 

  • एडुलीडर अगर एक महिला हो, तो बच्चे उनसे ज्यादा जुड़ाव महसूस करते हैं। खासकर लड़कियां अपने दिल की बातों को लड़कियों के साथ साझा करने में सहज महसूस करती हैं। 
  • कक्षा में घड़ी का ना होना, एक विषय है लेकिन एडुलीडर के प्रयासों से कक्षा में घड़ी की उपलब्धता होना एक अहम विषय है क्योंकि कई बार हम मुश्किलों के आगे घुटने टेक देते हैं या उसे अपनी नियति मान लेते हैं, मगर एडुलीडर स्मृति ने अपनी पहल द्वारा इस समस्या के समाधान हेतू कदम बढ़ाया और बच्चों को घड़ी से अवगत कराया। 
  • साथ ही वे इस तरह अन्य पीढियों के लिए भी प्रेरणास्त्रोत साबित हो रही हैं, जो भविष्य में बेहतर करना चाहती हैं, या अपनी पहचान बनाना चाहती हैं। जैसे- कक्षा में मौजूद छोटी बच्चियां एडुलीडर को देखकर रोल-मॉडल के रुप में चुन सकती हैं कि हां, मुझे भी समाज में बदलाव लाना है, नेतृत्व करना है और समस्याओं से लड़ना है।