Wednesday, March 15, 2023

रजनीः एक बेहद सकारात्मक दिन था लेकिन अचानक पता चला कि एक मां अपनी बच्ची को पीट रही है?

आजकल लोगों के पास एक-दूसरे के लिए भी वक्त नहीं है। ऐसे में एक एडु-लीडर का घरों तक जाना और बच्चों के नामांकन की जानकारी जुटाना, उनके स्कूल जाने की स्थिति को आंकना और अभिभावकों को जागरुक करना वाकई एक सकारात्मक और जिम्मेदारी से भरपूर पहल की ओर इशारा करती है। 

हमारे एडु-लीडर्स ना केवल बच्चियों को स्कूल से जोड़ रहे हैं बल्कि उनकी स्थिति पर भी नियमित नजरें बनाए हुए हैं कि जिन बच्चियों का नामांकन हुआ है, वे नियमित स्कूल तो आ रही हैं, उनकी पढ़ाई कैसी चल रही है इत्यादि। इसी कड़ी में सर्वे करना भी शामिल है और अपने सर्वे के अनुभव को रजनी ने हमारे साथ साझा किया है। 

                   

मेरा नाम रजनी है और मैं आप सबके साथ एक प्यारा सा अनुभव साझा करने जा रही हूं। आज मैं अभयपुर गांव में सर्वे करने गई थी, जहां मैंने एससी कम्युनिटी से सर्वे करना शुरू किया। वहां सर्वे करके मुझे बहुत खुशी हुई क्योंकि वहां के सभी 6 से लेकर 14 साल तक के बच्चे नियमित स्कूल जा रहे थे। वहीं जिनका हाल ही में 6 साल पूरा हुआ था, उन बच्चों के अभिभावक उनका एडमिशन करवाने के लिए भी तैयार थे। 


साथ ही वहां का हर बच्चा प्रतिदिन युनिफॉर्म में स्कूल जाता है। ना केवल माता-पिता बल्कि बच्चे भी साफ सफाई का काफी ख्याल रखते हैं। साथ ही अधिकांश अभिभावक अपने बच्चों को लेकर काफी सक्रिय भी थे। 


हालांकि जब मैं उस टोली में आगे गई तो मैंने देखा कि एक मां अपनी बच्ची को पीट रही थी। उस मां ने अपनी बच्ची को इतना ज्यादा पीटा था कि उस बच्ची का सिर भी फूट गया था इसलिए मैंने सोचा कि मैं वहां जाकर परिस्थिति को समझने का प्रयास करुंगी। मैंने वहां जाकर बातचीत की कि असल में मसला क्या है? 


मेरे पूछने पर उस बच्ची की मां ने बताया कि इसकी परीक्षा चल रही है और यह परीक्षा देने के लिए स्कूल नहीं जा रही है। इस वजह से मैं इसे पीट रही हूं। इसके बाद मैंने उस बच्ची से बात करने की कोशिश की और उसे समझाया भी लेकिन वह बच्ची  बहुत रो रही थी। यही कारण था कि वे मुझसे बात करने के लिए भी तैयार नहीं थी। 


इसके बाद मैंने बच्ची की मां से बात की और उन्हें समझाया कि बच्चों को प्यार से समझाना चाहिए क्योंकि मार-पीट करने से बच्चों में गलत संस्कार का विकास हो सकता है, जिससे बच्चे चिड़चिड़े हो सकते हैं। मेरे समझाने के बाद उस बच्ची की मां अफसोस करने लगी कि मुझे इस तरीके से बच्ची को नहीं पीटना चाहिए था। इसके बाद मैंने उन्हें आश्वासन दिया कि बच्ची से मिलने दोबारा आऊंगी और मैं अपने कर्तव्यपथ पर आगे निकल गई। 




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